कृषि

ट्रेक्टर में ईंधन की खपत में कमी तथा अपव्ययों को रोकने के आसान तरीके

डॉ. मनीषा साहू एवं डॉ. सुनील अग्रवाल

देशमें बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न पदार्थों को उपलब्ध कराने तथा महंगे किस्म के उन्नत बीजों, रासायनिक खादों के सही प्रयोग हेतु भारतीय किसान अब यांत्रिक खेती की ओर बढ़ता जा रहा है। कृषि कार्यों में दिन-प्रतिदिन ट्रेक्टर का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। बढ़ती टैªक्टरों की संख्या, ईंधन की खपत, कीमतों में बढ़ोत्तरी तथा सीमित संसाधनों को देखते हुए निम्न जानकारियों का पालनकर कृषि कार्यों में ईंधन की खपत में कमी तथा अपव्ययों से बचाया जा सकता है।

1. अपने ट्रेक्टर के बारे में जानें: ट्रेक्टर के साथ दी गई पुस्तिका के अनुरूप् ट्रेक्टर का रखरखाव करें। अनुसंधान से यह साबित हो चुका है कि यदि ट्रेक्टर का रखरखाव सही तरह से नहीं किया गया तो 30 प्रतिशत तक अधिक डीजल की खपत होती है। अतः ट्रेक्टर का परीक्षण किसी अच्छे गैरेज से करायें।

2. डीजल लीक न होने दीजिए: काम पर जाने से पहले टैªक्टर के चारों तरफ घूमकर देखें कि जमीन पर डीजल या तेल का निशान तो नहीं है। यदि है, तो इनके जोड़ों जैसे- डीजल की टंकी, डीजल पम्प, फ्यूल इनजैक्टर, डीजल लाइन्स को जांचिए, क्योंकि-अनुसंधान से यह साबित हो चुका है कि यदि प्रति सेकण्ड एक बूंद डीजल टपकता रहे तो प्रतिवर्ष 2000 लीटर डीजल का नुकसान होगा। जब ट्रेक्टर को अधिक समय तक रोकना पड़े तो इंजन बन्द कर दीजिए।

3. रूकने पर इंजन को बन्द करें: जब ट्रेक्टर को अधिक समय तक रोकना पड़े तो ईंजन बन्दकर दीजिए। अनुसंधान से यह पता चला है कि बिना वजह के ट्रेक्टर का ईंजन चलते रहने से हर घण्टे एक लीटर से अधिक डीजल की बर्बादी होती है। बैटरी, डायनेमो और सेल्फर्स्टाटर को बिल्कुल ठीक रखिये अन्यथा आपको रूके हुए ट्रेक्टर में भी ईंजन चालू रखने को मजबूर होना पड़ सकता है।

4. ट्रेक्टर हमेशा सही गियर में चलाईये: लोड के अनुसार एक गियर उपर का चुनें और ईंजन की रफ्तार डीजल बचाने के लिये कम रखें। गलत गियर लगाने से डीजल की खपत 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और कार्यक्षमता 50 प्रतिशत घटने की सम्भावना रहती है।

5. क्या ट्रेक्टर अधिक धुआं देता है: बड़े साइज के उपकरणों या गलत गियर लगाने से ट्रेक्टर धुंआ देने लगता है। यदि ट्रेक्टर से बहुत ज्यादा धुंआ निकले तो समझिये कि उसमें कीमती डीजल बर्बाद हो रहा है। 25 हार्सपावर वाले यंत्र को जैसे 35 हार्सपावर वाले यंत्र ट्रेक्टर के साथ इस्तेमल करने का मतलब है कि शक्ति और डीजल का दुरूपयोग। अक्सर 45-50 हार्सपावर वाले टैªक्टर 9 फालों वाले कल्टीवेटर के साथ काम करते हुए दिखाई देते हैं, जबकि 11 या 13 फालों वाले कल्टीवेटर का इस्तेमाल करना चाहिए। यह भी याद रखें- फ्यूलइंजेक्शन के खराब होने से ईंधन की खपत में 25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।

6. धूल, ईंजन का सबसे बड़ा दुश्मन: ईंजन में धूल भर जाने का मतलब-

  • खिंचाई की ताकत कम।
  • अधिक तेल की खपत।
  • अत्यधिक डीजल की खपत।

अच्छी गुणवत्तावाला एक फिल्टर ही प्रयोग कीजिए क्योंकि ट्रेक्टर को अक्सर धूल-मिट्टी में से जाना पड़ता है।

  • एयर क्लीनर को साफ रखें और तेल बदलें। अधिक धूल के काम में एयर क्लीनर तेल जल्दी बदलें।
  • एयर क्लीनर के जोड़ों से लीक न होनेदें।
  • ईंजन ब्रीदर साफ रखें।
  • ईंजन में मोबिलआयल समय से बदलें और साफ तथा सही मानक मोबिल आयल डालें।
  • तेल बदलते समय फिल्टर अवश्य बदलें।

अनुसंधान से पता चलता है कि बिना फिल्टर की हुई हवा से सिलेण्डर बोर, सामान्य के मुकाबले 45 गुना तेजी से और पिस्टन रिंग्स 115 गुना तेजी से घिसते हैं।

7. जो पहिये फिसलते हैं, उनसे डीजल की बर्बादी होती है:
घिसे हुये टायर ज्यादा फिसलते हैं और खींचने की शक्ति घट जाती है। टायरों के फिसलने के अनुपात में ही डीजल बर्बाद होता है। घिसे हुये टायर और टायरों में अधिक हवा दबाव होने से डीजल की खपत ज्यादा और काम कम होता है। अतः ट्रेक्टर के पहियों को पानी का अतिरिक्त भार और ढलुआ लोहे का वनज डालकर फिसलने से बचाइए। याद रखिये-प्रचालन का काम खत्म हो जाए तो फालतू भार हटा दीजिए। टायरों को समय परबदलें या दोबारा रबड़ चढ़ायें। पुराने टायरों से ईंजन के खींचने की शक्ति घट जातीहै।

8. वनज उतना ही लीजिए, जितना ढोने की क्षमता हो: उपकरणों का आकार और ट्रेक्टर चलाने की रफ्तार वैसी ही रखें, जो ईंजन की शक्ति से मेल खाये। टॉप गियर में चलिये, लेकिन टेªक्टर से धुआं न निकले। यदि आपका टेªक्टर टॉप गियर में भी पूरी गति के साथ आगे बढ़ता है तो आपका उपकरण बहुत छोटा है। एक बड़ा उपकरण या कई उपकरणों की मिली-जुली व्यवस्था से आपको ट्रेक्टर की शक्ति का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने और डीजल की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी। क्योंकि अनुसंधान से यह साबित हो चुका है कि यदि आप आकार से छोटे उपकरणों का इस्तेमाल करें या कम स्पीड पर चलें तो आप 30 प्रतिशत तक अधिक डीजल की खपत कर सकते हैं। याद रखिये उपकरणों का चुनाव करते समय किसी विशेषज्ञ की सलाह लीजिए।

9. खेत में प्रचालन की योजना बनानी चाहिए: अत्यधिक जुताई हानिकारक और व्यर्थ होती है। खेत की ज्यादा तैयारी न केवल भूमि की बनावट बिगाड़ती है बल्कि फसल की पैदावार भी घटाती है। पहले से ही खाका बनाकर उसके अनुसार जुताई करें तो बिना जरूरत चालू रखने में कमी आयेगी और टेªक्टर को बार-बार इधर-उधरन हीं करना होगा। अनुसंधान से यह साबित हो चुका है किस ही तरीके से टेªक्टर यदि खेत में चले तो डीजल की बचत 20 से 25 प्रतिशत आसानी से की जा सकती है।

10. खेत में हलाई सोच-विचार करके ही शुरू करें:
उदाहरण के लिए एक ट्रेक्टर खेत यानी 50×200 मी0 के खेत आकार में एक 9 फालों वाले 2 मीटर की चौड़ाई के टिलर से लम्बाई से जुताई करने पर कुल हलाइयॉं 50/2 बराबर 25, चौड़ाई से जुताई करने पर हलाइयॉं 200/2 बराबर 100 हलाइयॉं। इसलिए चौड़ाई की तरफ जुताई करने पर लम्बाई की तरफ जुताई करने की तुलना मेें 4 गुना ज्यादा घूमने का समय लगता है। अतः खेत को लम्बाई में जोतें न कि चौड़ाई में एवं सीधे व समान्तर हलाई करें। याद रखिए -आपका आरम्भिक मार्ग सीधा और समान्तर चाहिए। बगल की ओर उपर की जमीन के खेत के चारों ओर लगातार संचालन करके जोतें। जुते हुए खेत को दोबारा न जोतें।

अच्छी ड्राइविंग आदतें-
1. धीरे व एक ही गति से चलायें: 40-50 कि0मी0 प्रति घण्टा की गति से ही वाहन चलायें। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसा करने से आपकी यात्रा का समय बहुत अधिक नहीं लगेगा। अचानक वाहन रोकना या बार-बार रोककर चलना ईंधन की खपत बढ़ाता है। अनुसंधान से पता चलता है कि बहुत तेज ड्राइविंग ईंधन की खपत को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है।

2. अपने ईंजन को दुरूस्त रखेंः बहुत से वाहनों पर परीक्षण करने से पता चला है कि ईंजन की नियमति जांच-पड़ताल करवाने से आप 6 प्रतिशत से भी अधिक ईंधन बचा सकते हैं। यदि आपके ईंजन से धुआ निकलता है या वाहन खींचने में कठिनाई होती है तो उसी क्षण उसे परीक्षण के लिए किसी अच्छे गैरेज में ले जायें।

3. ब्रेक का इस्तेमाल कम करें: अच्छे चालक आने वाले स्आप का ध्यान रखते हुए ड्राइव करता है। जब आप अचानक झटके से ब्रेक लगाते हैं तो ईंधन व उर्जा की खपत अधिक होती है। आन ेवाले मोड़ों के विषय में पहले से ही सोच लेने से आप बिना ब्रेक प्रयोग के अपना वाहन मोड़ सकेंगे।

4. क्लच का प्रयोग कम करें: बिना आवश्यकता के क्लच का प्रयोग करने के लिए ईंजन की उर्ज की खपत अधिक होती है। क्लच पैर रखकर वाहन ना चलायें इस सेक्च प्लेट जल्दी खराब हो जाती है।

5. एयर फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें: इंजन के पुर्जे में धूल भर जाने से न ये केवल जल्दी घिसते हैं, बल्कि इससे ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है। धूल से सने एग्जास्ट और साइलेन्सर आपके इंजन पर अधिक भार डालते हैं जिससे कम्बसशन की शक्ति कम हो जाती है।

6. टायरों की हवा की नियमित जांच करें: टायरों में यदि हवा का दबाव कम होतो ईंधन की खपत बढ़ जाती है। परीक्षणों से पता चलता है कि यदि आपके टायर में 25 प्रतिशत हवा कम है, तो आपके ईंधन की खपत 5 प्रतिशत बढ़ जाती है और आपके टायर का टिकाउपन 25 प्रतिशत कम हो जाता है।

7. यदि 2 मिनट से ज्यादा रूकना होतो इंजन बद कर दें: बिना वजह इंजन के चलते रहने से पैसे व ईंधन, दोनों की हानि होती है। जहां आपको अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी हे, जैसे रेल्वेक्रासिंग, या सड़क पर सिग्नल आदि के लिए तो अपने इंजन को बंद कर दें।

8. सही ग्रेड लुब्रीकेशन तेल का ही प्रयोग करें: सही ग्रेड लुब्रीकेशन तेल के इस्तेमाल से इंजन के घूमने वाले पुर्जों में घर्षण कम होती है, जिससे इंजन पूरी क्षमता से काम करता है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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