

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कुछ मामलों में ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम को सरल बनाने के लिए सुधार किया है| इस बदलाव से पीएफ ट्रांसफर प्रोसेस और सरल हो जाएगी| साथ ही ट्रांसफर करने में हो रही देरी घट जाएगी और दक्षता बढ़ाने की उम्मीद है|
EPFO New Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 7.6 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है. केंद्र सरकार ने इनके लिए नई सुविधा शुरू की है. अब ईपीएफओ के सदस्य नाम और जन्मतिथि जैसी व्यक्तिगत जानकारियों को नियोक्ता या ईपीएफओ की मंजूरी के बिना ही ऑनलाइन अपडेट सकते हैं.
खास बात यह है कि यह सुविधा आज यानी 18 जनवरी 2025 से ही प्रभावी हो गई है. इसके अलावा जिन सदस्य के ईपीएफ अकाउंट्स की आधार के जरिए ई-केवाईसी हो चुकी है, वे बिना कंपनी की मदद के खुद ही आधार ओटीपी के जरिए ईपीएफ हस्तांतरण दावा ऑनलाइन फाइल कर सकते हैं.
पीटीआई के मुताबिक, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को दो नई सेवाओं की शुरुआत की. मंत्री ने कहा कि सदस्यों द्वारा दर्ज की गई लगभग 27 प्रतिशत शिकायतें सदस्य प्रोफ़ाइल/केवाईसी मुद्दों से संबंधित हैं. अब इस सुविधा के शुरू होने के बाद शिकायतों में बहुत गिरावट आएगी. उन्होंने कहा कि ईपीएफओ ने ईपीएफओ पोर्टल पर संयुक्त घोषणा की प्रक्रिया को सरल बनाया है. इससे कर्मचारी नाम, जन्म तिथि, लिंग, राष्ट्रीयता, पिता/माता का नाम, वैवाहिक स्थिति, पति/पत्नी का नाम, शामिल होने की तिथि और छोड़ने की तिथि जैसे व्यक्तिगत डिटेल्स में खुद ही सुधार कर सकते हैं.
EPFO ने नौकरी बदलने वालों को बड़ी राहत देने के लिए यह कदम उठाया है. ये काम आधार और अन्य डॉक्यूमेंट की मदद से पूरा हो सकेगा |
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अक्सर अपने नियमों में बदलाव करता रहता है, ताकि सदस्यों को सही लाभ मिल सके. इसी के तहत ईपीएफओ ने ट्रांसफर नियमों में भी बदलाव किया है. अब कर्मचारी आसानी से खुद ही अपने EPF अकाउंट को ट्रांसफर कर सकेंगे. दरअसल, ताजा बदलाव के तहत ईपीएफओ ने नौकरी बदलने पर प्रॉविडेंट फंड के ट्रांसफर करने के बेहद सरल बनाया है और अब नौकरी बदलने पर अब मेंबर्स को पुराने या नए एम्पलॉयर के जरिए प्रॉविडेंट फंड ट्रांसफर करने के नियम को खत्म कर दिया है.
क्या होंगे लाभ?
तुरंत ट्रांसफर: कुछ मामलों में नियोक्ता के हस्तक्षेप की आवश्यकता को समाप्त करके, ट्रांसफर प्रॉसेस में तेजी आएगी.
सुविधाजनक मैनेजमेंट: सदस्यों के पास ईपीएफओ पोर्टल पर सीधे ट्रांसफर की क्षमता होगी.
बेहतर ट्रांसपैरेंसी: सरल प्रॉसेस स्पष्टता को बढ़ावा देगी और नियोक्ताओं पर निर्भरता कम करेगी.
इन अकाउंट पर नहीं नियोक्ताओं का दखल
गौरतलब है कि 1 अक्टूबर, 2017 के बाद आवंटित यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से जुड़े और आधार से जुड़े सदस्य आईडी के लिए, नियोक्ता का हस्तक्षेप अब आवश्यक नहीं है. इसी प्रकार, 1 अक्टूबर 2017 के बाद जारी किए गए, लेकिन एक ही आधार से जुड़े कई यूएएन से संबद्ध सदस्य आईडी के बीच ट्रांसफर के लिए, एक सरल प्रॉसेस लागू है.
कौन से अकाउंट किए जाएंगे ट्रांसफर?
1 अक्टूबर, 2017 से पहले जारी किए गए UAN से जुड़े सदस्य आईडी और आधार से जुड़े ट्रांसफर के लिए सुव्यवस्थित ट्रांसफर प्रोसेस के लिए दोनों अकाउंट पर एक ही नाम, डेट ऑफ बर्थ और जेंडर होना आवश्यक है. अलग-अलग UAN से जुड़े सदस्य ID के बीच ट्रांसफर किया जा सकता है, बशर्ते कि कम से कम एक UAN 1 अक्टूबर, 2017 से पहले आवंटित किया गया हो और उसी आधार नंबर से जुड़ा हो. यह तभी लागू होता है जब नाम, डेट ऑफ बर्थ और जेंडर सभी सदस्य आईडी में एक समान हों.
कैसे करें Aadhaar को लिंक?
- EPFO सदस्य ई-सेवा वेबसाइट पर जाएं
- अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा का उपयोग करके लॉग इन करें.
- ‘मैनेज’ मेनू पर जाएं और ‘KYC’ विकल्प चुनें. अब आधार के लिए बॉक्स को चेक करें.
- अपना 12 अंकों का आधार नंबर और नाम दर्ज करें जैसा कि आपके आधार कार्ड पर दिखाई देता है.
- सत्यापन के लिए जानकारी सबमिट करने के लिए ‘सेव’ पर .
- आपके आधार डिटेल को UIDAI रिकॉर्ड के साथ क्रॉस-चेक किया जाएगा.
- वेरीफिकेशन के बाद, आपका आधार आपके EPF खाते से सफलतापूर्वक जुड़ जाएगा.
डिटेल्स को कर सकते हैं सही
उन्होंने कहा कि नियोक्ता द्वारा किसी सत्यापन या ईपीएफओ द्वारा अनुमोदन के बिना यह सुविधा उन सदस्यों के लिए उपलब्ध होगी, जिनका यूएएन (सार्वभौमिक खाता संख्या) 1 अक्टूबर, 2017 (जब आधार मिलान अनिवार्य किया गया था) के बाद जारी किया गया था. ऐसे मामलों में किसी सहायक दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है. यदि यूएएन 1 अक्टूबर, 2017 से पहले जारी किया गया था, तो नियोक्ता ईपीएफओ की मंजूरी के बिना डिटेल्स को सही कर सकता है. ऐसे मामलों के लिए सहायक दस्तावेज की आवश्यकता को भी सरल बनाया गया है. उन्होंने बताया कि केवल जहां यूएएन आधार से जुड़ा नहीं है, वहां कोई भी सुधार नियोक्ता को भौतिक रूप से प्रस्तुत करना होगा और सत्यापन के बाद अनुमोदन के लिए ईपीएफओ को फॉरवर्ड करना होगा.
पहले करने पड़ते थे ये काम
यूएएन पंजीकरण कर्मचारी के लिए शामिल होने के समय नियोक्ता द्वारा किया जाता है. कई कर्मचारियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान या बाद में पिता/पति या पत्नी का नाम, वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता और सेवा विवरण दर्ज करने में नियोक्ताओं द्वारा गलतियां की गईं. इन गलतियों को ठीक करने के लिए, कर्मचारी को सहायक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन अनुरोध करना पड़ता था. अनुरोध को नियोक्ता द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए और फिर किसी भी परिवर्तन को लागू करने से पहले अनुमोदन के लिए ईपीएफओ को अग्रेषित करना चाहिए. इस प्रक्रिया को संयुक्त घोषणा कहा जाता था.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 24-25 में नियोक्ताओं द्वारा ईपीएफओ को भेजे गए 8 लाख अनुरोधों में से, यह देखा गया कि केवल 40 प्रतिशत 5 दिनों के भीतर भेजे गए थे, 47 प्रतिशत 10 दिनों के बाद भेजे गए थे और नियोक्ता द्वारा लिया गया औसत समय 28 दिन था. ऐसे में सरलीकरण से 45 प्रतिशत मामलों में आधार ओटीपी सत्यापन के माध्यम से तत्काल सुधार और शेष 50 प्रतिशत मामलों में नियोक्ता के माध्यम से कर्मचारियों को राहत मिलेगी. यदि कोई सदस्य जो स्वयं स्वीकृति दे सकता है, उसने पहले ही अपना अनुरोध दायर कर दिया है जो नियोक्ता के पास लंबित है, तो सदस्य पहले से दायर अनुरोध को हटा सकता है और सरलीकृत प्रक्रिया के अनुसार स्वयं स्वीकृति दे सकता है. इससे नियोक्ता के पास लंबित लगभग 3.9 लाख मामलों को लाभ मिलेगा.
क्या बोले मंत्री
मंत्री ने कहा कि पूरी तरह से ई-केवाईसी ईपीएफ खातों वाले ईपीएफ सदस्य नियोक्ता के हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना सीधे आधार ओटीपी के साथ अपने ऑनलाइन स्थानांतरण दावे दायर कर सकते हैं. यदि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दायर दावों की संख्या (1.3 करोड़) पर विचार किया जाए तो 94 प्रतिशत दावे (1.2 करोड़) तुरंत ईपीएफओ तक पहुंच जाएंगे.
ईपीएफ हस्तांतरण दावा प्रसंस्करण का टर्नअराउंड समय काफी कम हो जाएगा, क्योंकि इसके लिए नियोक्ता द्वारा अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है. यदि किसी सदस्य ने पहले ही अपना स्थानांतरण दावा दायर कर दिया है जो नियोक्ता के पास लंबित है, तो सदस्य पहले से दायर अनुरोध को हटा सकता है और सीधे ईपीएफओ के पास दावा प्रस्तुत कर सकता है.
मंत्री ने कहा कि सरलीकरण से सदस्यों की शिकायतों में भी काफी कमी आएगी (फिलहाल कुल शिकायतों में से 17% स्थानांतरण से संबंधित मुद्दों से संबंधित हैं) और संबंधित अस्वीकृतियों में भी कमी आएगी.
पहले क्या था नियम
वर्तमान में, नौकरी बदलने की स्थिति में पीएफ खाते के हस्तांतरण के लिए किसी भी ऑनलाइन अनुरोध को ईपीएफओ को जमा करने से पहले नियोक्ता द्वारा सत्यापित किया जाना होता है. इस प्रक्रिया में स्थानांतरण को सत्यापित करने के लिए दावा ईपीएफओ तक पहुंचने से पहले नियोक्ताओं द्वारा औसतन 12 से 13 दिन का समय लिया जाता है. पिछले नौ महीनों के दौरान, लगभग 20 लाख दावे 15 दिनों से अधिक समय तक नियोक्ताओं के पास लंबित रहे. मंत्री ने यह भी कहा कि ईपीएफओ द्वारा सेवाओं की डिलीवरी में सुधार के लिए कई पहल की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य उन्हें बैंकिंग प्रणाली के बराबर लाना है.










