कड़कनाथ – लोकप्रिय कुक्कुट नस्ल
डॉ दीप्ति किरण बारवा, डॉ केशर परवीन, डॉ रामचंद्र रामटेके, डॉ आशुतोष तिवारी


भारत में स्वदेशी, विदेशी और अंतर-विदेशी क्रॉस की लगभग उन्नीस मुर्गियों की नस्लें है। पंजीकृत कई देशी मुर्गों की नस्लों में से एक प्रसिद्ध देशी नस्ल ‘कड़कनाथ‘ (Kadaknath) है, जो मध्य प्रदेश राज्य के पश्चिमी क्षेत्र, गुजरात और राजस्थान के आसपास के क्षेत्रों में निवास करती है। इसे कभी-कभी “काला-मांसी” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है काले मांस वाली मुर्गी। इन मुर्गियों की न केवल काली त्वचा होती है बल्कि वे सचमुच ऊपर से पैर तक, अंदर और बाहर काले होते हैं। उनका रंग ही उन्हें सबसे खूबसूरत दिखने वाली मुर्गियों में से एक बनाता है। यह एक ऐसी मुर्गी है जिसे असानी से कम लागत में पाला जा सकता है। उन्हें कम रखरखाव की आवश्यकता होती है और वे खराब स्थिति में भी जीवित रहने के लिए जाने जाते हैं।
कड़कनाथ मुर्गे की पृष्ठभूमि और इतिहास
कड़कनाथ चिकन एक भारतीय नस्ल है और काले मांस के साथ देश की एकमात्र मुर्गी है। इसकी उत्पत्ति मध्य प्रदेश में हुई थी और इसे ज्यादातर स्थानीय आदिवासी जनजातियों (भील, भिलाला और अन्य) द्वारा पाला गया है। कड़कनाथ न केवल इन लोगों के इतिहास का हिस्सा हैं बल्कि उनके वर्तमान जीवन का भी हिस्सा हैं।
नस्ल प्रकार और मानक
कड़कनाथ मुर्गे की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह कितना काला है। इस नस्ल की सबसे आम किस्म सिर से पांव तक काली होती है। कड़कनाथ ”सिल्की“ मुर्गियों की तरह ही फाइब्रोमेलैनिस्टिक मुर्गियॉ हैं। फाइब्रोमेलानोसिस हाइपरपिग्मेंटेशन का कारण है जो इन मुर्गियों को सुंदर और सुंदर बनाता है।
कड़कनाथ चिकन के तीन प्रकार हैं। पहला, जेट ब्लैक कड़कनाथ, जो तीनों में सबसे प्रमुख है, हलांकि सभी काले ही होते हैं। अन्य दो भी फाइब्रोमेलानोसिस से प्रभावित होते हैं, लेकिन पेंसिल्ड कड़कनाथ के गले में सफेद पंख होते हैं, जबकि गोल्डन कड़कनाथ में सोने के पंख होते हैं, इस प्रजाति के मुर्गो के पंखों पर गोल्डन कलर के छीटे होते है। इन पक्षियों की काली परत एक सुंदर फिरोजा चमक देती है जो उनकी सुंदरता को बढ़ाती है और उनकी कलगी उनके परिष्कृत रूप को पूरा करती है।
कड़कनाथ में मुर्गियों का वजन लगभग 1.1 किलोग्राम हो सकता है, जबकि मुर्गों का वजन 1.3 किलोग्राम तक हो सकता है।
कड़कनाथ के अंडे
कड़कनाथ मुर्गे के अंडे का रंग क्रीम होता है, लेकिन कभी-कभी यह भूरे रंग का भी हो सकता है। अंडों का आकार मध्यम होता है।अंडे उत्पादन में यह औसत अंडा देने वाली मुर्गियों के श्रेणी में आते हैं। वे लगभग 80 से 120 अंडे सलाना दे सकते हैं। अंडों की संख्या मुर्गी और उसे मिलने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर करती है।
ये मुर्गियॉ प्रायः अंडों पर नहीं बैठती इसलिए अंडों में से चूजे निकालना थोड़ा मुसकिल होता है, इसके लिए मशीन की मदद ले़ सकते हैं।

स्वास्थ्य और देखभाल
कड़कनाथ चिकन निस्संदेह सबसे स्वस्थ और मजबूत नस्लों में से एक है। इनमें मुर्गियों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियों से लड़ने की प्रकृतिक क्षमता होती है। इसके अलावा, यह सबसे कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है। उन्हें न्यूनतम प्रावधानों के साथ भी पाला जा सकता है।
इनके चुजों को शुरू के छः सप्ताह में ब्रुडिंग की आवश्यकता होती है। ब्रुडींग के लिए कम लगत वाले ब्रुडर तथा बल्ब उष्म प्रदान करने हेतु उपयोग किया जा सकता है। छः सप्ताह पश्चात पर्याप्त जगह देनी चहिए। जमीन में बिछावन हेतु धान की भुसी या पैरा के टुकडों को उपयोग में लाया जा सकता है। धान की भुसी या पैरा के टुकडों में 1.5% चुना मिलाने से बिछावन में नमी नहीं आती तथा बिमारियों से भी बचाव होता है। यह बिछावन सर्दियों में गर्माहट तथा गर्मी में ठडंकता प्रदान करती है। इस बिछावन को समय-समय पर चुना एवं पलटना चाहिए तथा नमी ज्यादा हो जाने पर बदल देना चाहिए।
गावों में उपलब्ध कम खर्चीले पौष्टिक सामर्गी जैसे की जैविक अनुपयोगी पदार्थ, अनाज के टुकडे, कीड़े-मकोड़े, घास के टुकड़े, आदि को आहार में उपयोग किया जा सकता है। पत्तेदार हरा चारा मुर्गियों को दिया जाए तो प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन भी मिल जाती है। दीमक भी प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। इससे इनकी प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है किन्तु उर्जा की आवश्यकता स्थानीय उपलब्ध अनाज जैसे मक्का, बजरा, कोदो, रागी आदि से पूरी किया जा सकता है। ग्रमीण स्तर में मुर्गी आहार के रूप में चॉवल का भूसा, गेहूं का भूसा, तिल का टुकड़ा एवं मछली का टुकड़ा उपयोग में लाया जा सकता है। पीने हेतु स्वच्छ पानी दिया जाना चाहिए।
समय-समय पर मुर्गियों को मेरेक्स, रानीखेत, इनफेक्सियस ब्रसल, एवं चेचक जैसे रोगों से बचाव हेतु टिकाकरण कराया जाना चाहिए। पेट के कीर्मी से बचाव हेतु नियमित रूप से कीर्मीरोधक दवाई दी जानी चाहिए।
कड़कनाथ सेहत के लिए फायदेमंद है – इस मुर्गे में औषधीय गुण होते हैं जिसके कारण कई बीमारियों में डॉक्टर इस मुर्गे को खाने की सलाह देते हैं।
1. कड़कनाथ चिकन में अन्य चिकन के मुकाबले कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है। जिससे इसके सेवन से शरीर मे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नही बढ़ती है।
2. जहाँ अन्य मुर्गो में 18-20% प्रोटीन पाया जाता है वहीं, कड़कनाथ मुर्गे में 25% प्रोटीन पाया जाता है।
3. कड़कनाथ चिकन में अधिक मात्रा में अमीनो एसिड पाया जाता है। जो सेहत के लिए फायदेमंद है।
4. आयरन भी अधिक मात्रा में पाया जाता है।
5. कड़कनाथ चिकन ह्रदय रोगी, कैंसर रोगी के लिए फायदेमंद है। उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए।
महिलाओं के लिए विशेष रुप से उपयोगी
यह मुर्गा महिलाओं के लिए विशेष रुप से फायदेमंद होता है। क्योंकि महिलाओं के शरीर में सामान्यत कम प्रोटीन होता है जिसके कारण उन्हें कई सारी बीमारियां होती हैं। लेकिन प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए जब महिलाएं अंडा, दूध और चिकन खाती हैं तो उन्हें वजन बढ़ने का डर होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन सारी चीजों में फैट और कोलेस्ट्रॉल काफी मात्रा में होता है। जबकि कड़कनाथ मुर्गे में केवल 0.73-1.03% फैट होता है। वहीं सामान्य मुर्गे में 13-25% फैट होता है। इसी तरह काले मुर्गे में 184.75मि.ग्रा./100मि.ग्रा. कोलेस्ट्रॉल होता है जबकि सामान्य मुर्गे में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 218.12मि.ग्रा./100मि.ग्रा. होता है।

कड़कनाथ चिकन के अंडे और मॉस के दाम
कड़कनाथ नस्ल के मुर्गियों द्वारा दिये गए अंडे बाजारों में 25 से 30 रुपये प्रति अंडा बिक जाता है। जो कि काफी अच्छा मूल्य है और इसके चिकन का भी बाजारों में खूब मांग होता है। कड़कनाथ चिकन के 1 किलो का दाम 600 से 1000 रुपये तक होता है। जो अन्य नस्ल के मुर्गो के हिसाब से 2 से 3 गुना अधिक दामो में बिकता है।
अन्य किस्मों की तुलना में कड़कनाथ मुर्गे का उच्च-प्रोटीन युक्त होने के कारण कड़कनाथ मुर्गे का माँस, चूजे और अंडा बहुत महंगा होता है। कुक्कुट पालन नियमित आय का साधन है। कड़कनाथ कुक्कुट के सही रख-रखाव एवं उत्तम आहार से उच्च आय अर्जित की जा सकती है तथा इससे ग्रार्मीण आहार का स्तर भी बढ़ेगा।










