सरकारी योजनाएं

उद्यानिकी फसलों पर दी जाने वाली अनुदान का लाभ उठायें किसान

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना अंतर्गत अनुदान का प्रावधान

देश में फसलोत्पाद बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बागवानी फसलों पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना (National Horticulture Mission) संचालित कर रहा है| छत्तीसगढ़ में यह 24 जिले बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, गरियाबंद, जगदलपुर, जशपुर, कबीरधाम, कोण्डागांव, कोरबा, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, खैरागढ़-छुइखादान-गंडई, सरगुजा, सूरजपुर में लागू है तथा वर्ष 2025-26 से  प्रदेश के समस्त जिला में लागु हो जायेगा|

योजना को प्रमुख रूप से पौध-प्रवर्धन अधोसंरचना, फसलों का क्षेत्रात्छादन, मशरूम उत्पादन, जल स्रोतों का विकास, जैविक खेती, संरक्षित अधोसंरचना, फसलोत्तर प्रबंधन, विपणन, मानव संसाधन विकास में विभाजित किया गया है|

नये उद्यानों की स्थापना -(अनुदान एवं पात्रता)

  1. फल-

(ए) ज्यादा लागत वाली (Cost Intensive) फलदार पौधों का रोपण (अधिकतम 4 हे. प्रति हितग्राही) –

स्ट्राबेरी – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्राबेरी के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 1.25 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.50 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 24691 (90×45 सेमी) स्ट्राबेरी के पौधे रोपित किये जाते हैं।

केला (टिशु कल्चर) – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में टिशु कल्चर केला के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 1.25 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.50 लाख)  का अनुदान दो किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 3086 (1.8 x 1.8 मी.) केल के पौधे रोपित किये जाते हैं।

पपीता – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में पपीता के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.60 लाख का 0 प्रतिशत तक (रू. 0.30 लाख)  का अनुदान दो किस्तों (75:25) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 3086 (1.8 x 1.8 मी.) पपीता के पौधे रोपित किये जाते हैं।

(बी) कम लागत वाली फलदार पौधों का रोपण (अधिकतम 4 हें. प्रति हितग्राही) –

नाशपाती- 1 हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.38 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.152 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 400 (5 x 5 मी.) नाशपाती के पौधे रोपित किये जाते हैं।

लीची -1 हेक्टेयर क्षेत्र में लीची के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू.   0.3535 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.1414 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 178 (7.5 x 7.5 मी.) लीची के पौधे रोपित किये जाते हैं।

अमरूद -1 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू.   0.7333 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.29332 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 1111 (3 x 3 मी.) अमरूद के पौधे रोपित किये जाते हैं।

सीताफल-1 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.9320 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.3728 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 1600 (2.5 x 2.5 मी.) सीताफल के पौधे रोपित किये जाते हैं।

ड्रेगन फ्रूट-1 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रेगन फ्रूट के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.3535 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.1414 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 625 (4 x 4 मी.) ड्रेगन फ्रूट के पौधे रोपित किये जाते हैं।

एप्पल बेर-1 हेक्टेयर क्षेत्र में एप्पल बेर के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.4375 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.1750 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 625 (4 x 4 मी.) एप्पल बेर के पौधे रोपित किये जाते हैं।

नीबू – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में नीबू के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.5498 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.21992 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 555 (4 x 4.5 मी.) नीबू के पौधे रोपित किये जाते हैं।

आंवला – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में आंवला के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.40008 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.16003 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 278 (6 x 6 मी.) आंवला के पौधे रोपित किये जाते हैं।

आडू (Peach) – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में आडू के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.91655 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.36662 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 1333 (3 x 2.5 मी.) आडू के पौधे रोपित किये जाते हैं।

आलू बुखारा (Plum) – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू बुखारा के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.67640 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.27056 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 816 (3.5 x 3.5 मी.) आलू बुखारा के पौधे रोपित किये जाते हैं।

अनानास – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में अनानास के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 2.1450 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.858 लाख)  का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 43000 से 50,000 (0.6 x 0.3 मी.) अनानास के पौधे रोपित किये जाते हैं।

सब्जी (अधिकतम 2 हे.)-

1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के संकर (हायब्रिड) सब्जी के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.50 लाख का 40 प्रतिशत तक (रू. 0.20 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजनान्तर्गत एक हितग्राही को अधिकतम 2 हे. क्षेत्र तक अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।

पुष्प (अधिकतम 2 हे.)-

कट फ्लावर (गुलाब, जरबेरा) -1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कट फ्लावर के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 1.00 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू. 0.40 लाख) तथा बड़े कृषकों को 25 प्रतिशत तक (रू. 0.25 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। 1 हेक्टेयर क्षेत्र में गुलाब के 27777 (60×60 सेमी) तथा जरबेरा के 83333 (40 x 30 सेमी) पौधों का रोपण किया जाता है।

कंदीय पुष्प (रजनीगंधा, ग्लेडियोलस)- 1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कंदीय पुष्प के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 1.50 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू. 0.60 लाख) तथा बड़े कृषकों को 25 प्रतिशत तक (रू. 0.375 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। 1 हेक्टेयर क्षेत्र में रजनीगंधा के 111111 (30 x 30 सेमी) बल्ब तथा ग्लेडियोलस के 166666 (30 x 20 सेमी) बल्ब का रोपण किया जाता है।

लूज फ्लावर (गेंदा, गैलार्डिया) -1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के लूज फ्लावर के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.40 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू. 0.16 लाख) तथा बड़े कृषकों को 25 प्रतिशत तक (रू. 0.10 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। 1 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा एवं गैलार्डिया के 62500 (40 x 40 सेमी) पौधों का रोपण किया जाता है।

मसाले (अधिकतम 4 हे.) –

बीज मसाले तथा कंदीय प्रजातियॉं – 1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के बीज एवं कंद से तैयार होने वाले मसाला फसलों के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू.  0.30 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू. 0.12 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। बीज से उगाये जाने वाली मसाला फसलों में धनिया, मिर्च, मेथी, अजवाइन फसलों के रोपण पर तथा कंदीय मसाला फसलों में हल्दी एवं अदरक के रोपण हेतु अनुदान दिया जाता है।

औषधी एवं सुगंधित फसलें (अधिकतम 4 हे.)-

1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के औषधी एवं सुगंधित फसलों, यथा- एलोवेरा, लेमनग्रास, मिन्ट, पचौली, स्टीविया, ई.सिट्रीडोरा आदि के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.40 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू. 0.16 लाख) का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।

प्लांटेशन क्राप (अधिकतम 4 हे.)-

1 हेक्टेयर क्षेत्र में काजू पौधों के रोपण पर होने वाले व्यय की अनुमानित लागत रू. 0.50 लाख पर लघु/सीमांत कृषकों को 40 प्रतिशत तक (रू.    0.20 लाख) का अनुदान तीन किस्तों (60:20:20) में देय है। द्वितीय वर्ष का अनुदान 75 प्रतिशत पौधों के जीवित होने तथा तृतीय वर्ष का अनुदान 90 प्रतिशत पौधों के जीवित होने पर देय है। प्रति हेक्टेयर 204 (7 x 7 मी) काजू के पौधे रोपित किये जाते हैं।

योजना से लाभ प्राप्त करने हेतु चयनित जिलों के अपने निकटम उद्यान अधिकारी से संपर्क कर सकते है |

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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