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कीट आकर्षित फसल लगायें, फसलों को हानिकारक कीटों से बचाये

अखिलेश कुमार, सौरभ पदमशाली, मनोज कुमार पैंकरा,

कीट आकर्षित फसलें एक प्रकार की रक्षक फसलें हैं जो कि एक महत्वपूर्ण अवधि के दौरान कीटों कों अपनी ओर आकर्षित कर मुख्य फसल को विभिन्न प्रकार के कीटों या अन्य जीव जैसे निमेटोड के प्रकोप से बचाने के लिये उगाई जाती हैं। यह या तो मुख्य फसल के बीच में अंर्तवर्तीय के रूप में या मुख्य फसल के चारो ओर बॉर्डर फसल या मुख्य फसल से पहले या बाद मे लगाई जाती है। ये फसलें मुख्य फसल के कुल की या उससे भिन्न कुल की हो सकती है।फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों में कीटों की भूमिका अहम रहती है। विभिन्न प्रकार के कीटों की जातियॉं जैसे-काटने चबाने वाली इल्ल्यिॉ, तनाछेदक, बीटल और चूसने वाले कीट जैसे-माहु, थ्रिप्स, लीफ हॉपर आदि अपने मुॅंख के विभिन्न भागों से फलों, सब्जियों एवं खाघानों को चूसकर, कुतरकर, खाकर एवं उसमें घुसकर हानिकारक पदार्थ छोडतें है, जिससे फसल तो खराब होती ही है साथ ही उसकी गुणवत्ता व बाजार मूल्य भी कम हो जाता है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पडता है।

इसी के संदर्भ में कीट आकर्षित फसलें विभिन्न फसल पद्धिति को कीटों से बचाने की एक रणनीति है। एक औसत अनुमान के अनुसार कीट आकर्षित फसलें उगाने से कीटों के आक्रमण से बचाव व कीटनाशी छिडकाव से बचत करके 10-30 प्रतिशत तक किसानों की आर्थिक आय में बढोतरी की जा सकती है।

कीट आकर्षित फसल लगाने के लाभ

  • यह मुख्य फसल की गुणवत्ता को बनाये रखती है।
  • यह मृदा स्वास्थ्य व पर्यावरण के संतुलन को बनाये रखती है।
  • फसल के उत्पादकता को बढाती है।
  • जैव विविधता को बढाने में सहायक होती है।
  • फसलों के मित्र कीटों को आकर्षित करती है।
  • हानिकारक कीटों के प्रकोप से मुख्य फसल की रक्षा करती है।
  • कीटनाशी के अधिक मात्रा में उपयोग को कम करती है।

कीट आकर्षित फसलों के प्रकार
वास्तव में रक्षक फसलों को हानिकारक कीटों के लिये एक विकल्प के रूप में उगाया जाता है जिससे मुख्य फसल पर कीटों का आक्रमण कम किया जा सके। कीट आकर्षित फसलों को उनके स्थानिक वितरण एवं स्वाभाविक विशिष्ट लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
अ. विशिष्ट लक्षणों के आधार पर वर्गीकरण
1. परंपरागत/पारंपरिक फसलेंः यह सामान्य प्रयोग में लायी जाने वाली विधि है। इस विधि में रक्षक फसलों को मुख्य फसल के आगे लगाया जाता है जिसमे रक्षक फसल मुख्य फसल की अपेक्षा प्राकृतिक रूप से अधिक से अधिक कीटों को भोजन व अण्डे देने के लिये आकर्षित करती है। उदाहरण के लिए, अरंडी अथवा गेंदा को लीफ माइनर की रोकथाम के लिये मूंगफली के साथ लगाना व रिजका (अल्फा-अल्फा) को लाइगस बग के रोकथाम के लिये कपास के साथ उगाना आदि।
2. गतिरोधी फसलः इस प्रकार की रक्षक फसल कीटों को अधिक आकर्षित करने वाली होती है, लेकिन इसका परिणाम ज्यादा समय तक आस्तित्व में  नही रहता। उदाहरण के लिए, सरसों को हीरक पृष्ठ शलभ के रोकथाम के लिये गोभी के साथ उगाना।
3. आनुवांशिक रूप से परिवर्तित फसलः इस प्रकार की रक्षक फसल आनुवंशिक रूप से परिवर्तित होती है जो कीटों को आकर्षित करती है। उदाहरण के लिए, कोर्लाडो पोटाटो बीटल की रोकथाम के लिये सामान्य आलू की फसल में आनुवंाशिक अभियांत्रिकी विधि से परिवर्तित (बी.टी.) आलू को लगाना।

ब. स्थानिक वितरण के आधार पर वर्गीकरण
1. परिधि/परिमाप फसलें : इस विधि मे रक्षक फसलों को मुख्य फसलों के चारो ओर बॉर्डर के रूप मे लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, कपास के चारो ओर भिण्डी लगाना।
2. क्रम के अनुसारः इस विधि में रक्षक फसलों को मुख्य फसलों के पहले या बाद में लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, हीरक पृष्ठ शलभ से बचाव हेतु गोभी के खेत में सरसों को उगाना।
3. विविध/बहुरूपी फसलेंः इस विधि में विभिन्न रक्षक फसलों की प्रजातियों को मिश्रित करके या मुख्य फसल के साथ लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, मूंगफली में लीफ माइनर की रोकथाम के लिये अरंडी, मिलेट्स व सोयाबीन को मिश्रित करके लगाना।
4. पुश पुल फसलेंः इस विधि में रक्षक फसलों एवं निरोधक फसलों को मिश्रित रूप से मुख्य फसल के साथ लगाया जाता है। जिसमें रक्षक फसल कीटों को आकर्षित करती है व निरोधक फसलें कीटों का ध्यान हटाकर मुख्य फसल से दरू रखती है। उदाहरण के लिए, मिर्च के साथ गेंदा व प्याज को लगाना एवं मक्का या ज्वार में तना छेदक के रोकथाम के लिये नेपियर या सुडान घांस को रक्षक फसल के रूप में मक्का के चारो तरफ तथा डेस्मोडियम (पुष्पीय फसल) को मक्के के बीच में कतारों में निरोधक फसल के रूप में लगाया जाता है।

कीट आकर्षित फसलों या रक्षक फसलों को लगाने का तरीका

  • गोभी में हीरक पृष्ठ शलभ के रोकथाम के लिये बोल्ड सरसों को गोभी के प्रत्येक 25 कतारों के बाद 2 कतारों में लगाना।
  • कपास की इल्ली अथवा छेदक के रोकथाम के लिये लोबिया को कपास के प्रत्येक 5 कतारों के बाद 1 कतार में लगाना।
  • कपास की इल्ली अथवा छेदक के रोकथाम के लिये तंबाकू को कपास के प्रत्येक 20 कतारों के बाद 2 कतारों में लगाना।
  • टमाटर में फल छेदक अथवा निमेटोड के रोकथाम के लिये अफ्रीकन गेंदे को टमाटर के प्रत्येक 14 कतारों के बाद 2 कतारों में लगाना।
  • बैगन में तना व फल छेदक के रोकथाम के लिये धनिया/मेथी को बैगन के प्रत्येक 2 कतारों के बाद 1 कतार में लगाना।
  • चने में इल्ली के रोकथाम के लिये धनिया/गेंदा को चना के प्रत्येक 4 कतारों के बाद 1 कतार में लगाना।
  • अरहर में चने की इल्ली के रोकथाम के लिये गेंदा को अरहर के चारों तरफ बॉर्डर में लगाना।
  • मक्का में तना छेदक के रोकथाम के लिये नेपियर/सुडान घांस को मक्का के चारो तरफ बॉर्डर में लगाना।
  • सोयाबीन में तंबाकू की इल्ली के रोकथाम के लिये सूरजमुखी या अरंडी को सोयाबीन के चारों तरफ 1 कतार में लगाना।

रक्षक फसलों की सफलता के कुछ गुर

  • सर्वप्रथम एक फार्म प्लान बनाना चाहिये, जो यह दर्शाये कि कब व कहॉं रक्षक फसलों को उगायें।
  • फसलों को हानि पहुॅचाने वाले कीटों की पहचान व जानकारी होना आवश्यक है।
  • रक्षक फसलों के रूप में ऐसे फसल का चुनाव करें जो कीटों को अधिकाधिक आकर्षित कर मुख्य फसलों की रक्षा कर सके। इसके लिये कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेनी चाहिये।
  • फसलों की नियमित रूप से देख-रेख व निगरानी करते रहना चाहिये।
  • रक्षक फसलों पर यदि कीट अधिक आकर्षित होते है एवं इनकी संख्या बहुत अधिक हो जाती है या मुख्य फसल में कीट प्रकोप बढने की संभावनायें बढ जाती है तो रक्षक फसलों को समय-समय पर कॉंट-छॉंट करते रहना चाहिये। यदि आवश्यक हो तो कीटनाशी का भी छिडकाव करना चाहिये या इन्हे उखाड़ने व नष्ट करने के लिये भी तैयार रहना चाहिये ताकि समय पर रोकथाम की जा सके।

कीट आकर्षित फसलें (रक्षक फसल) एवं उनके द्वारा नियंत्रित किये जाने वाले कीट

मुख्य फसल रक्षक फसल लगाने का तरीका नियंत्रित कीट
गोभी मूली गोभी के प्रत्येक 15 कतारों के बाद 2 कतारें मूली की लगाना पिस्सू भृंग (फ्लीबीटल)
गोभी सरसो गोभी के प्रत्येक 25 कतारों के बाद 2 कतारें सरसों की लगाना हीरक पृष्ठ शलभ
गोभी नासटुरटियम अंतवर्तीय फसल के रूप में माहु, पिस्सू भृंग
लहसुन गेंदा गेंदा को लहसुन के चारो ओर बॉर्डर फसल के रूप में लगाना थ्रिप्स
गाजर प्याज व लहसुन बॉर्डर फसल के रूप में गाजर की मक्खी
टमाटर गेंदा टमाटर के प्रत्येक 14 कतारों के बाद 2 कतारें गेंदा की लगाना फल छेदक व निमेटोड
आलू गेंदा अंतवर्तीय फसल के रूप में निमेटोड
बैगन धनिया/सौंफ बैगन की प्रत्येक 2 कतारों के बाद 1 कतार धनिया/सौंफ की लगाना तना व फल भेदक
सूरजमुखी गेंदा अंतवर्तीय फसल के रूप में इल्लियॉ
कपास गेंदा अंतवर्तीय फसल के रूप में इल्लिया
कपास रजका अंतवर्तीय फसल के रूप में लाइगस बग
कपास भिण्डी बॉर्डर फसल के रूप में इल्लियॉ
अरहर सोयाबीन/मूंग बॉर्डर फसल के रूप में थ्रिप्स
चना गेंदा अंतवर्तीय फसल के रूप में इल्लियॉ

निष्कर्ष
हानिकारक कीटों से फसल को बचाने के लिये कीट आकर्षित फसलों को उगाना एक सस्ता, सरल व पर्यावरण हितेषि विकल्प है जिसे जरूर अपनाना चाहिए।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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