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पौध-प्रवर्धन अधोसंरचना – नर्सरी, टिशु कल्चर यूनिट, बीज अधोसंरचना पर अनुदान

बागवानी मिशन योजना (National Horticulture Mission)

देश में फसलोत्पाद बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बागवानी फसलों पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना (National Horticulture Mission) संचालित कर रहा है| छत्तीसगढ़ में यह 24 जिले बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, गरियाबंद, जगदलपुर, जशपुर, कबीरधाम, कोण्डागांव, कोरबा, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, खैरागढ़-छुइखादान-गंडई, सरगुजा, सूरजपुर में लागू है|

योजना को प्रमुख रूप से पौध-प्रवर्धन अधोसंरचना, फसलों का क्षेत्रात्छादन, मशरूम उत्पादन, जल स्रोतों का विकास, जैविक खेती, संरक्षित अधोसंरचना, फसलोत्तर प्रबंधन, विपणन, मानव संसाधन विकास में विभाजित किया गया है|

पौध-प्रवर्धन अधोसंरचना एवं विकास (अनुदान एवं पात्रता)

  1. हाईटेक नर्सरी – (4 हे.) – उच्च गुणवत्तायुक्त कलमी/ग्राफ्टेड/बडेड फलदार पौधों के उत्पादन हेतु हाईटेक नर्सरी तैयार करने के लिये रू. 00 लाख प्रति हेक्टेयर की लागत से अधिकतम 4 हेक्टेयर हेतु रू. 100.00 लाख तक की सहायता का प्रावधान है। शासकीय क्षेत्र में कुल लागत का 100% एवं निजी क्षेत्र में 40% तक अनुदान दिया जाता है। अनुदान प्राप्त करने के लिये प्रति हेक्टेयर 50,000 पौधे तैयार करना आवश्यक है।
  2. छोटी नर्सरी – (1 हे.) – उच्च गुणवत्तायुक्त कलमी/ग्राफ्टेड/बडेड फलदार पौधों के उत्पादन हेतु 1 हेक्टेयर क्षेत्र में छोटी नर्सरी तैयार करने के लिये रू. 00 लाख की सहायता का प्रावधान है। शासकीय क्षेत्र में कुल लागत का 100% एवं निजी क्षेत्र में 50% तक अनुदान दिया जाता है। अनुदान प्राप्त करने के लिये प्रति हेक्टेयर 25,000 पौधे तैयार करना आवश्यक है।
  3. पुरानी नर्सरियों का जीर्णोद्धार- (4 हे.) – पूर्व से स्थापित 4 हेक्टेयर तक की रोपणियों में अधोसरंचरनाओं के जीर्णोद्धार एवं नवीन सुविधायें विकसित करने हेतु रू. 00 लाख के अनुमानित व्यय पर शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र में 50% तक अनुदान दिया जाता है।
  4. नवीन टिशु कल्चर यूनिट की स्थापना – 25 लाख पौधों की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली नवीन टिशु कल्चर यूनिट की स्थापना हेतु संभावित स्थापना लागत रू. 00 लाख प्रति यूनिट के मान से शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र (बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर) में 40% तक अनुदान दिया जाता है।
  5. विद्यमान टिशु कल्चर (टीसी) यूनिटों का पुनर्वास – पूर्व से स्थापित टिशु कल्चर यूनिट के उन्नयन हेतु रू. 00 लाख प्रति इकाई की दर से शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र में 50% तक अनुदान दिया जाता है।
  6. सब्जी के बीजों का उत्पादन तथा वितरण  – स्व परागित किस्म के उन्नत सब्जी बीजों के उत्पादन के लिये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत रू. 35 लाख पर शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र में 35% तक अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान अधिकतम 5 हेक्टेयर क्षेत्र तक देय है।
  7. सब्जी के बीजों का उत्पादन तथा वितरण – सब्जी फसलों के संकर (हायब्रिड) बीजों के उत्पादन के लिये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत रू. 50 लाख पर शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र में 35% तक अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान अधिकतम 5 हेक्टेयर क्षेत्र तक देय है।
  8. बीज अधोसंरचना- उद्यानिकी फसलों के बीजों की हैण्डलिंग, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण आदि हेतु अधोसंरचना विकास के लिये रू. 00 लाख तक के परियोजना प्रस्ताव के आधार पर शासकीय क्षेत्र में 100% एवं निजी क्षेत्र में 50% तक अनुदान दिया जाता है।

योजना से अनुदान प्राप्त करने हेतु चयनित जिलों के अपने निकटम उद्यान अधिकारी से संपर्क कर सकते है |

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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