पशुपालन

अण्डों की कैन्डलिंग (भ्रूण परीक्षण)

डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. ऋतु गुप्ता, डॉ. निंगथाउ खोंग जम लिन्दा, डॉ. कस्तुरी प्रधान, डॉ. कमलेश कुमार चौधरी, डॉ आशीष कुमार महंत

अंडों की कैंडलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अंडे के छिलके के आर-पार तेज रोशनी डालकर उसके अंदरूनी भागों को देखा जाता है। उर्वरता की पहचान करने, भ्रूण के विकास पर नज़र रखने, नमी की निगरानी करने और संदूषण (Contamination) रोकने के लिए अनुपयोगी अंडों को हटाने के लिए कैंडलिंग एक आवश्यक प्रक्रिया है।

ग्रामीण पारंपरिक मुर्गी-पालन व्यवस्था में मुर्गियों से प्राप्त सभी अण्डे मुर्गियों के नीचे सेने हेतू रख दिए जाते है। इस प्रकार मुर्गी इन अण्डों को, प्राकृतिक विधि से सेने का कार्य करती है, जिससे 21 दिनों पश्चात चूजे उत्पन्न होते हैं।
अण्डे दो प्रकार के होते हैं-शाकाहारी (बांझ) एवं मांसाहारी (उर्वर)। शाकाहारी अण्डे मादा पक्षियों द्वारा नर की अनुपस्थिति में दिए जाते हैं,

अतः इनमें भू्रण (बच्चा) नहीं होता । मादा पक्षियों को नर से प्रजनन कराने के बाद मांसाहारी (उर्वर) अण्डे प्राप्त होते हैं जिसमें भू्रण उपस्थित रहता है। इस प्रकार के अण्डों से, मुर्गी के नीचे 21 दिनों तक रखने के पश्चात् चूजे निकलते हैं।

कैंडलिंग का महत्व

  • बाँझ अंडों की पहचान: कैंडलिंग की मदद से बांझ अंडों को देख सकते है। इन अंडों को इनक्यूबेटर से हटाकर उपलब्ध स्थान का अधिकतम उपयोग और ऊर्जा की बचत होती है।
  • संदूषण से बचाव: बांझ अंडे अथवा वे अंडे जिनमें भ्रूण प्रारंभिक अवस्था में ही मर जाते हैं, अंततः सड़ जाते हैं। उन्हें समय रहते निकाल लेने से इनके फटने और स्वस्थ अंडों को हानिकारक जीवाणुओं से दूषित करने का खतरा टल जाता है।
  • भ्रूण विकास की निगरानी: भ्रूण की रक्त वाहिकाओं और भ्रूण की वृध्दि पर नज़र रखी जा सकती है जिससे की यह जाना जा सकता है कि भ्रूण का विकास निर्धारित समय पर हो रहा है।उन अंडों को हटाया जा सकता है जिनका विकास रूक गया है।
  • वायु कोशिकाओं की जाँच: अंडे के पतले सिरे पर स्थित वायु थैली नमी खोने के साथ-साथ बढ़ती जाती है। कैंडलिंग से वायु कोशिका की वृध्दि दर के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि इनक्युबेटर में आर्द्रता (Humidity) का स्तर सही है या नहीं।
  • अंडे के छिलके में असामान्यताओं का पता लगाना: कैंडलिंग से बारीक दरारें, पतले छिलके या दोहरी जर्दी का पता चलता है। जो अंडे से बच्चा निकालने में बाधा डाल सकते हैं और अंडे को जीवाणु संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।

कैण्डलर (भ्रूण परीक्षक)

  • मुर्गी द्वारा सेने हेतु अण्डों को मुर्गियों के नीचे रखने से पहले अथवा इनक्युबेटर में भू्रण परीक्षण करने वाले उपकरण को कैन्डलर कहते हैं।
  • साधरणतः यह एक बेलनाकार डब्बा होता है, जिसके एक सिरे पर बल्ब लगा होता है तथा दूसरे सिरे पर एक छेद होता है।
  • जमीन पर अंधेरे कमरे में कैन्डलर के बल्ब को जलाकर, दूसरे सिरे पर अण्डा रखा जाता है।
  • ध्यान से देखने पर यदि अण्डे के चौड़े सिरे की ओर, अण्डे के भीतर, कालापन लिए एक छोटा गोला, पतली लाल नशों के साथ तैरता हुआ दिखाई दे, तो वह भ्रूण लिए अर्थात उर्वर अंडा होगा।
  • यह परीक्षण कार्य मुर्गी के अण्डा सेने से चौथे-पांचवें दिन पर करना चाहिए,जब भ्रूण इतना विकसित हो जाता है कि देखने पर पहचानना आसान होता है। इनक्युबेटर में पहले के तीन दिनों में और आखिरी के तीन दिनों में कैंडलिंग नहीं किया जाना चाहिए।
  • यदि अण्डे में भ्रूण न हो तो उसे स्वयं के खाने अथवा बेचने में उपयोग किया जा सकता है।
  • कैण्डलर के स्वरूप में ग्रामीण परिस्थिति को देखते हुए सुविधा एवं उपलब्ध संसाधन अनुसार बदलाव कर कैण्डलर बनाया जा सकता है।

डब्बा कैन्डलर

  • ग्रामीण परिवारों में प्रायः प्रत्येक घर में टिन का डब्बा आसानी से उपलब्ध रहता है।
  • एक साधारण टिन के डब्बे को लेकर असमें छैनी हथौडी की सहायता से डब्बे की गोलाई के मध्य में एक लगभग 3 से.मी. व्यास का गोला काटें।
  • डब्बे के निचले सिरे पर बल्ब के होल्डर जितने साईज का गोला काटकर उसमें होल्डर फिट करें तथा बिजली कनेक्शन से जोड़ते हुए बल्ब जलाएं।
  • इस डब्बे को जमीन पर रखने के लिए एक स्टैंड भी बनाया जा सकता है। अथवा डब्बे को ऐसे ही रखा जा सकता हैं।

टॉर्च कैन्डलर

  • बिजली की अनुपलब्धता होने की स्थिति में एक बार में 10-15 तक अण्डों का भू्रण-परीक्षण करने हेतु टॉर्च का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
  • इस हेतु साधारण पाउडर या टिन का लंबा सा डब्बा ले लें तथा नीचे की पेंदी निकालकर ऊपरी सतह पर एक छेद कर दें तथा टॉर्च को जला कर डब्बे के अन्दर रख दें।
  • कार्डबोर्ड (गत्ता) को गोलाई में मोड़कर टॉर्च के आकार का बना लें। कार्डबोर्ड का एक ढक्कन बना कर उसमें ऊपरी सिरे पर अण्डा परीक्षण हेतु एक छेद बनायें।
  • अब टॉर्च को कार्डबोर्ड या पाउडर या टिन के डब्बे के अन्दर जलाकर रखें तथा ऊपर से छेद वाले ढक्कन को लगाकर टॉर्च की रोशनी में अण्डों का भ्रूण परीक्षण करें।
  • किसी भी कैंडलर का नियमित उपयोग से पहले, पद्धति का अच्छा अभ्यास कर लेना अति आवश्यक है।

ऑटोमैटिक और सेमी-औटोमैटिक कैन्डलर

  • विकसित मुर्गी फार्म में इनका उपयोग किया जाता है।
  • एक ही साथ 100 – 200 या अधिक अंडों को देखा जा सकता है।

लेखक:
डॉ. अभिषेक कुमार (पशु चिकित्सक),
डॉ.ऋतु गुप्ता (सहायक प्राध्यापक),
डॉ. निंगथाउ खोंग जम लिन्दा (सहायक प्राध्यापक),
डॉ. कस्तुरी प्रधान (पशु चिकित्सक) ,
डॉ. कमलेश कुमार चौधरी (पशु चिकित्सक),
डॉ आशीष कुमार महंत (पशु चिकित्सक)

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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