अंतर्राष्ट्रीय

खाद्य पैकेजिंग में रीसायकिल प्लास्टिक का प्रयोग हो सकता है ख़तरनाक

कहने में तो ये बात बहुत अच्छी लगती है कि प्लास्टिक का प्रयोग एक बार नहीं करके, उसे रीसायकिल किया जाए, यानि प्लास्टिक उत्पादों को बार-बार प्रयोग किया जाए, मगर रीसायकिल किए गए प्लास्टिक के, खाद्य पैकेजिंग में बढ़ते इस्तेमाल के साथ, खाद्य सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं|

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पुनःप्रयोग (Recycled) प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल, वैसे तो पर्यावरण के लिए फ़ायदेमन्द है, क्योंकि इससे प्लास्टिक कूड़ा-कचरा कम होता है मगर खाद्य वस्तुओं के सम्पर्क में आने वाला प्लास्टिक, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है|  इसके मद्देनज़र, रिपोर्ट में वैश्विक खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देशों की ज़रूरत पर बल दिया गया है| वर्तमान में, वैश्विक खाद्य पैकेजिंग बाज़ार लगातार बढ़ रहा है. साल 2024 में, इसकी अनुमानित क़ीमत 505 अरब डॉलर से अधिक थी, और 2030 तक यह 815 अरब डॉलर से ऊपर पहुँचने का अनुमान है|

FAO के खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता अधिकारी विट्टोरियो फत्तोरी का कहना है कि “प्लास्टिक कचरा एक बढ़ती वैश्विक समस्या बन चुका है. बेहतर और प्रभावी रीसायकलिंग इसका एक अहम समाधान है, लेकिन प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और रीसायकलिंग  सुधारने के प्रयासों के साथ यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि एक समस्या का समाधान करते हुए हम कहीं दूसरी नई समस्याएँ नहीं उत्पन्न कर दें.”

 

  • यूएन अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि रीसायकिल किया गया प्लास्टिक और खाद्य वस्तुओं के सम्पर्क में आने वाली अन्य वैकल्पिक सामग्री, पर्यावरण के लिए लाभकारी हो सकती हैं,  लेकिन इनके साथ खाद्य सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी उठते हैं|
  • “रिपोर्ट में हमने स्पष्ट किया है कि सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धान्तों को अपनाना बेहद ज़रूरी है, लेकिन यह सही तरीके़ से किया जाना चाहिए, वरना रीसायकिल के दौरान सम्भावित रासायनिक प्रदूषण से, खाद्य सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं.”
  • रिपोर्ट बताती है कि मक्का, गन्ना और कसावा जैसे प्राकृतिक व नवीकरणीय स्रोतों से बने, जैव-आधारित खाद्य सम्पर्क पदार्थों पर भी विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है.
  • इन सामग्रियों से उनके कच्चे पदार्थों के कारण नए जोखिम उपज सकते हैं, जिनमें कीटनाशक, पर्यावरणीय प्रदूषक, प्राकृतिक विषैले तत्व या एलर्जी उत्पन्न करने वाले पदार्थ शामिल हैं.

सुझाव…

  • FAO अधिकारी के अनुसार, रिपोर्ट में कई सिफ़ारिशें और आगे की राह सुझाई गई है.
  • सबसे पहले, रीसायकलिंग की प्रक्रिया को अच्छी तरह नियंत्रित करना ज़रूरी है, जिसमें रासायनिक प्रदूषकों की सफ़ाई और उन्हें हटाना शामिल हो, ताकि ये रसायन भोजन तक नहीं पहुँच सकें.
  • दूसरा, यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि कुछ पदार्थों पर खाद्य सुरक्षा से जुड़ा बहुत कम वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध है. इसलिए यह जानने के लिए और अधिक शोध व आँकड़ों की आवश्यकता है कि ये रसायन कैसे बनते हैं और क्या पैकेजिंग सामग्री से भोजन में पहुँच सकते हैं, अगर हाँ तो, किस तरह?
प्लास्टिक के कपों में रंगीन पेय पदार्थों की पंक्तियाँ, जिनमें प्लास्टिक की स्ट्रॉ लगी हैं।

FAO की भूमिका

  • FAO की भूमिका देशों को खाद्य पैकेजिंग सामग्रियों से जुड़े खाद्य सुरक्षा नियमों के सामंजस्य में सहयोग देने की है.
  • रिपोर्ट के निष्कर्ष विशेष रूप से Codex Alimentarius Commission में होने वाली चर्चाओं और कार्यों को दिशा देंगे.
  • यह संयुक्त राष्ट्र की संस्था है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और वैश्विक व्यापार को सुगम बनाने के लिए अन्तरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानक निर्धारित करती है.

Source : https://news.un.org/hi/story/2026/05/1088128

 

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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