सरकारी योजनाएं

ग्रामीण भारत को बदल रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)

मुख्‍य विशेषताएं

  1. एआई भारत में समावेशी ग्रामीण विकास के एक मूलभूत चालक के रूप में उभर रहा है।
  2. भारत की एआई शासन संरचना बहिष्करण और प्रशासनिक नुकसान को रोकने के लिए निष्पक्षता, जवाबदेही, पारदर्शिता और संदर्भ-विशिष्ट जोखिम शमन को प्राथमिकता देती हैं।
  3. पंचायती राज संस्थानोंडिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और कल्याण प्रणालियों के भीतर एआई एकीकरण पारदर्शितादक्षतायोजना और जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ाता है।
  4. भाषिणीभारतजेन और आदि वाणी जैसे बहुभाषी और आवाजसक्षम प्लेटफॉर्म भाषाई और साक्षरता बाधाओं को कम करते हैं, सेवाओं और शासन तक पहुंच का विस्तार करते हैं।
  5. राष्ट्रीय मिशनक्षेत्रीय पहलराज्य – आधारित नवाचार और भारतएआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के विजन के साथ मापनीयलोककेंद्रित एआईसंयोजित की ओर एक समन्वित बदलाव को दर्शाते हैं।

प्रस्‍तावना

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मशीनों की संज्ञानात्मक कार्यों जैसे सीखने, तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता को संदर्भित करता है। हाल के वर्षों में, एआई तेजी से प्रयोगात्मक उपयोग से व्‍यापक स्‍तर पर तैनाती की ओर बढ़ गया है, जो डेटा, कंप्यूटिंग शक्ति  और कनेक्टिविटी में प्रगति से प्रेरित है। भारत में, एआई को समावेशी कल्याण के दृष्टिकोण के साथ एक सामाजिकउद्देश्य ढांचे  के भीतर विकसित किया जा रहा है, जो इसे विशिष्टता के बजाय समानता और व्यापक-आधारित पहुंच के उद्देश्य से एक सार्वजनिक वस्तु के रूप में स्थापित करता है। सेवा वितरण को मजबूत करके, डेटा-संचालित शासन का समर्थन करके और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को औपचारिक प्रणालियों में एकीकृत करके, एआई कृषिस्वास्थ्य देखभालकौशलरोजगार और स्थानीय शासन  में ग्रामीण विकास के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। इस दृष्टिकोण का लोक-केंद्रित अनुकूलन भारत एआई प्रभाव शिखर  सम्मेलन 2026 में परिलक्षित होता है,  जो कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और शासन  जैसे सेक्‍टरों में ग्रामीण आजीविका,  सामाजिक समावेश और सेवा वितरण पर बल देता है। संस्थागत समन्वय को बढ़ावा देकर और इंडिया एआई मिशन और डिजिटल इंडिया  के तहत सिद्ध उपयोग के मामलों को बढ़ाकर, इस समिट ने समान और सतत ग्रामीण विकास के लिए पायलट पहल से प्रणाली-व्यापी कार्यान्वयन में परिवर्तन का संकेत दिया है।

समावेशी विकास के लिए राष्ट्रीय एआई नीति और शासन ढांचा

एआई के प्रति भारत का दृष्टिकोण एक दोहरे ढांचे पर आधारित है जो सभी सेक्‍टरों में, विशेष रूप से ग्रामीण और सामाजिक रूप से संवेदनशील संदर्भों में जिम्मेदारपारदर्शी और न्यायसंगत तैनाती सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत शासन संरचना के साथ समावेशी विकास के लिए एक दूरदर्शी राष्ट्रीय रणनीति को जोड़ता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय रणनीतिसभी के लिए एआई

नीति आयोग द्वारा जून 2018 में शुरू की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय रणनीति, आवश्यक सेवाओं की पहुंच, सामर्थ्य और गुणवत्ता में सुधार करके भारत की विकास चुनौतियों का समाधान करने के लिए एआई की पहचान एक परिवर्तनकारी टूल के रूप में की गई है। चूंकि, ग्रामीण भारत को लगातार सेवा और बुनियादी ढांचे के अंतराल के कारण एक प्रमुख फोकस क्षेत्र  के रूप में मान्यता दी गई है, यह समावेशी और सामाजिक रूप से उन्मुख विकास- विशेष रूप से वंचित सेक्‍टरों और क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है। कृषिस्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे सेक्‍टरों में, एआई-सक्षम निर्णय-समर्थन प्रणाली और डेटा-संचालित प्लेटफार्मों  की परिकल्पना  अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और स्थानीय संस्थानों को मजबूत करने, व्यापक भौतिक बुनियादी ढांचे  के विस्तार के बिना दूरदराज की आबादी को सेवाएं प्रदान करने के लिए की गई है।

यह कार्यनीति मानव श्रम के विस्थापन के बजाय वृद्धि पर जोर देती है, एआई को किसानोंस्वास्थ्य कार्यकर्ताओंशिक्षकों और प्रशासकों के लिए एक समर्थन प्रणाली के रूप में स्थापित करती है। यह विकेंद्रीकृत कौशल निर्माण, डिजिटल कार्य के अवसरों और प्रौद्योगिकी-संयोजित प्रशिक्षण के माध्यम से समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने में एआई की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है। #AIforAll ढांचे के तहत, एआई को समावेशी ग्रामीण विकास, मजबूत शासन और बढ़ी हुई मानव क्षमता के लिए उत्प्रेरक के रूप में तैयार किया गया है।

इंडिया एआई गवर्नेंस दिशानिर्देशग्रामीण भारत में एआई का जिम्मेदारी के साथ उपयोग

नवंबर 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा लॉन्च किए गए इंडिया एआई गवर्नेंस दिशानिर्देश, एआई नीति को अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करने से लेकर शासन ढांचेसुरक्षा उपायों और संस्थागत तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह दृष्टिकोण, ग्रामीण भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ये दिशानिर्देश पक्षपातबहिष्करण और अपारदर्शी निर्णय लेने  के जोखिमों को कम करने के लिए निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे जन-केंद्रित सिद्धांतों को स्थापित करते हैं। यह स्वीकार करते हुए कि वैश्विक जोखिम मॉडल भारत के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ को पूरी तरह से पकड़ नहीं सकते हैं, इसकी संरचना भारतविशिष्ट जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षा की वकालत करती है, विशेष रूप से कल्याण वितरण  प्रणालियों में जहां स्वचालित उपकरण लक्ष्यीकरण और सेवा प्रावधान को प्रभावित करते हैं।

ढांचे में चार प्रमुख घटक शामिल हैं:

  1. नैतिक और जिम्मेदार एआई के लिए सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र)।
  2. एआई शासन के छह स्तंभों में प्रमुख अनुशंसाएं।
  3. लघु, मध्यम और दीर्घकालिक समयसीमा के लिए मानचित्रित एक कार्य योजना।
  4. पारदर्शी और जवाबदेह एआई तैनाती सुनिश्चित करने के लिए उद्योगडेवलपर्स और नियामकों के लिए व्यावहारिक दिशानिर्देश।

यह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से प्रणाली-स्तरीय शासन को बढ़ावा देता है, इसकी रूपरेखा गोपनीयता, अंतरसंचालनीयता और जवाबदेही को शामिल करती है। एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण मंत्रालयों और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ाता है, समावेशी और विश्वासआधारित एआईसक्षम शासन सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता, शिकायत निवारण और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करता है।

ग्रामीण गवर्नेंस और विकेंद्रीकृत प्रशासन में एआई

सार्वजनिक सेवाओं तक पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक पहुंच में सुधार करके ग्रामीण शासन को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से उपयोग किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत और स्थानीय शासन के लिए एआई टूल्‍स

विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने के लिए एआई को सीधे पंचायती राज संस्थानों में एकीकृत किया जा रहा है। ऐसा ही एक टूल है सभासार, जो एक एआईसक्षम टूल है जो ऑडियो या वीडियो इनपुट से ग्राम सभा और पंचायत की बैठकों के संरचित कार्यवृत्त तैयार करता है। दस्तावेज़ीकरण को स्वचालित करके, सभासार मैन्युअल प्रयास को कम करता है, स्थिरता में सुधार करता है, और समय पर तथा निष्पक्ष रिकॉर्ड सुनिश्चित करता है। भाषिनी के साथ एकीकृत, यह 14 भारतीय भाषाओं में कार्यक्षमता में सहायता करता है, जिससे ग्रामीण समुदायों को बहुभाषी सुगम्‍यता प्राप्‍त होती है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके, सभासार स्थानीय अधिकारियों को शासन के परिणामों और सेवा वितरण पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।

ग्राम स्वराज और ग्राम मानचित्र जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआईसक्षम शासन को और सुदृढ़ किया गया है। पंचायत मिशन मोड परियोजना के तहत विकसित और अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया, ई-ग्रामस्वराज योजनाबजटलेखांकननिगरानीपरिसंपत्ति प्रबंधन और भुगतान सहित प्रमुख पंचायत कार्यों को एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली में समेकित करता है। वित्त वर्ष 2024-25 में, इस प्‍लेटफॉर्म ने 6,409 ब्लॉक पंचायतों और 650 जिला पंचायतों के साथ 2.53 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑनबोर्ड कवर किया, जो विकेंद्रीकृत शासन में इसके व्यापक अंगीकरण को दर्शाता है।

ग्राम मानचित्र ग्रामीण विकास में सहायता करने के लिए जीआईएस-आधारित विज़ुअलाइज़ेशन और प्‍लानिंग टूल्‍स प्रदान करके प्रशासनिक प्रणालियों में मदद करता है। यह पंचायतों को परिसंपत्तियों का मानचित्रण करनेपरियोजनाओं की निगरानी करने और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जी.पी.डी.पी.) में स्थानिक डेटा को एकीकृत करने में सक्षम बनाता है। जियोटैग किए गए बुनियादी ढांचे को जनसांख्यिकीय और पर्यावरणीय डेटा के साथ जोड़कर, यह प्लेटफॉर्म बुनियादी ढांचे की योजनाप्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया में साक्ष्यआधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, जिससे योजना और कार्यान्वयन के बीच समन्‍वयन मजबूत होता है। वित्त वर्ष 2024-25 तक, 2.44 लाख ग्राम पंचायतों ने जीपीडीपी तैयार और अपलोड किए हैं, 2.06 लाख ने 15वें वित्त आयोग अनुदान के तहत ऑनलाइन लेनदेन पूरा कर लिया है और 2.32 लाख ग्राम सभा की बैठकें आयोजित की हैं।

 

एआई कोषग्रामीण गवर्नेंस के लिए उपयोगमामले

एआई कोष सार्वजनिक क्षेत्र के नवोन्‍मेषण को आगे बढ़ाने के लिए एआई डेटासेट और मॉडल के राष्ट्रीय भंडार के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी और गैरसरकारी स्रोतों से डेटा को समेकित करता है और विभिन्न क्षेत्रों में रेडी-टू-डिप्लॉय एआई मॉडल प्रदान करता है। 20 उद्योगों में फैले 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 एआई मॉडल के साथ, यह प्लेटफ़ॉर्म शासन और सेवा वितरण अनुप्रयोगों को डिजाइन करने वाले डेवलपर्स के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करता है। मूलभूत एआई घटकों के पुन: उपयोग को सक्षम करके, एआईकोड ग्रामीण गवर्नेंस और लोक प्रशासन के लिए समाधानों के विकास में तेजी लाता है। 9 फरवरी 2026 तक, प्लेटफ़ॉर्म ने 69.80 लाख से अधिक विज़िट, 17,500 पंजीकृत उपयोगकर्ता और 5,004 मॉडल डाउनलोड दर्ज किए हैं, जो सार्वजनिक कल्‍याण के लिए एआई को बढ़ाने में साझा डेटा बुनियादी ढांचे की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।

ग्रामीण भारत में एआई बुनियादी ढांचा और सेक्‍टर-वार एकीकरण

ग्रामीण विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभावी उपयोग एप्लिकेशन डिजाइन से परे मजबूत डिजिटल और संस्थागत बुनियादी ढांचे की स्थापना तक फैला हुआ है। भारत में, सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय मंचों को शामिल करते हुए सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से एआई बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जा रहा है। ये पहल ग्रामीण संदर्भों में योजना, निगरानी और सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए डेटा संसाधनों, कम्प्यूटेशनल क्षमता और डोमेन विशेषज्ञता को एकीकृत करती हैं। सामूहिक रूप से, वे एआई समाधानों को बढ़ाने और उन्हें जमीनी स्तर पर विकास प्राथमिकताओं के साथ संयोजित करने के लिए आवश्यक मूलभूत इको-सिस्‍टम का निर्माण करते हैं।

भू प्रहरीग्रामीण परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए एआई और भूस्थानिक बुनियादी ढांचा

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आईआईटी दिल्ली के सहयोग से मई 2025 में शुरू किया गया भूप्रहरी मनरेगा के तहत बनाई गई परिसंपत्तियों की निगरानी के लिए एआई और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। प्रारंभ में, इस प्लेटफॉर्म का उपयोग अमृत सरोवरों की निगरानी के लिए जल वेधशाला के रूप में किया गया था, जिससे उपग्रह और जमीन-आधारित डेटा के माध्यम से पानी की उपलब्धता और भंडारण की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सके। इस प्लेटफॉर्म का उपयोग अब रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीणके लिए विकसित भारतगारंटी (वीबी-जी राम जी) के तहत बनाई गई परिसंपत्तियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एआई-संचालित एनालिटिक्स के साथ ग्राउंड- और सैटेलाइट-आधारित डेटा का लाभ उठाकर, यह प्लेटफ़ॉर्म वास्तविक समय की संपत्ति ट्रैकिंग को सक्षम बनाता हैपारदर्शिताजवाबदेही और संसाधन अनुकूलन को बढ़ाता है। एआई और भू-स्थानिक बुनियादी ढांचे का यह संयोजन व्‍यापक स्‍तर पर ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के योजना निर्माण और कार्यान्वयन को सुदृढ़ करता है।

अनौपचारिक श्रमिकों के लिए डिजिटल श्रम सेतु मिशन और एआई

डिजिटल श्रम सेतु मिशन अनौपचारिक क्षेत्र के भीतर एआई और अन्य अग्रणी प्रौद्योगिकियों को तैनात करने के लिए एक समन्वित पहल है। नियामक ढांचे और प्रभाव मूल्यांकन के साथ प्रौद्योगिकीय तैनाती को संयोजित करके, यह मिशन अनौपचारिक और ग्रामीण श्रमिकों के लिए सेवा वितरण और आजीविका सहायता को बढ़ाता है, जिससे समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलता है

कृषि में एआई बुनियादी ढांचा

कृषि में, एआई खेत स्तर पर एक निर्णय-सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जो डेटा-संचालित प्रबंधन प्रथाओं को सक्षम बनाता है। अनुप्रयोगों में मौसम पूर्वानुमानकीट का पता लगाना और बुवाई तथा सिंचाई कार्यक्रम का अनुकूलन शामिल है।कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने किसान ई-मित्र जैसी पहलों के माध्यम से एआई को तैनात किया है, जो आय सहायता कार्यक्रमों सहित सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने वाला एक वर्चुअल सहायक है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य निगरानी जैसे प्लेटफ़ॉर्म वास्तविक समय की सलाह उत्पन्न करने के लिए उपग्रह इमेजरी, मौसम संबंधी डेटा और मिट्टी की जानकारी को एकीकृत करते हैं। ये उपाय विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में उत्पादन जोखिम को कम करते हैंउत्पादकता बढ़ाते हैं और किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

शिक्षा और कौशल निर्माण के लिए एआई बुनियादी ढांचा

राष्ट्रीय स्तर पर, एनसीईआरटी के दीक्षा प्लेटफॉर्म में एआई-सक्षम सुविधाओं जैसे कीवर्ड-आधारित वीडियो खोज और रीड-अलाउड टूल को शामिल किया गया है, ताकि विशेष रूप से दृष्टिबाधित और विविध शैक्षिक आवश्यकताओं वाले छात्रों के लिए पहुंच बढ़ाई जा सके और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें सहायता करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग ने कक्षा आठवीं से बारहवीं तक के छात्रों को अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से मूलभूत एआई और सामाजिकतकनीकी कौशल से सुसज्जित करने के लिए यूथ फॉर उन्नति और विकास को एआई (युवाके साथ पेश किया है। कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास सहित सभी सेक्‍टरों में एआई को सक्षम करके, यह प्रोग्राम विभिन्न संदर्भों में वास्तविक दुनिया की समस्यासमाधान और भविष्य के लिए तैयार दक्षताओं को बढ़ावा देता है।

ग्रामीण विकास में एआई को बढ़ावा देने के लिए राज्य-आधारित पहल

सुमन सखी व्हाट्सएप चैटबॉट ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए एआई के राज्य-स्तरीय अंगीकरण का वर्णन करता है। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आरंभ, यह पहल महिलाओं और परिवारों को सुलभ मातृ और नवजात स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करने के लिए एआईसक्षम संवादी उपकरणों का उपयोग करती है। यह प्लेटफ़ॉर्म डिलीवरी सेवाओं, आस-पास की स्वास्थ्य सुविधाओं और आशा तथा एएनएम जैसे अग्रि‍म पंक्ति के कार्यकर्ताओं से सहायता के बारे में विवरण प्रदान करता है। व्हाट्सएप का लाभ उठाने से खासकर ग्रामीण और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में, अंतिममील तक पहुंच बढ़ती है। बहुभाषी पहुंचशिकायत निवारण और वास्तविक समय अपडेट सहित नियोजित विशेषताएं, समावेशी और उत्तरदायी ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय रूप से प्रासंगिक एआई समाधानों की क्षमता को प्रदर्शित करती हैं।

भाषा समावेशन और बहुभाषी शासन के लिए एआई

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्‍थ और जनजातीय क्षेत्रों में नागरिकों को अपनी भाषाओं में डिजिटल सेवाओं के साथ बातचीत करने में सक्षम बनाकर भारत में भाषा पहुंच और समावेशन का विस्तार करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है, जिससे अंतिम-मील सेवा वितरण और सहभागी शासन को मजबूत किया जा सके।

भाषिणी – राष्ट्रीय प्राकृतिक भाषा अनुवाद मिशन

भाषिणी एक एआई-सक्षम भाषा प्‍लेटफॉर्म है जिसे डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने में भाषाई बाधाओं को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और वर्तमान में यह 23 से अधिक सरकारी सेवाओं के साथ एकीकृत है। जुलाई 2022 में लॉन्च किया गया, यह प्‍लेटफॉर्म 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवादस्पीचटूटेक्स्ट और आवाजआधारित इंटरफेस प्रदान करता है, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित साक्षरता या डिजिटल दक्षता वाले उपयोगकर्ताओं के लिए समावेशन को बढ़ावा देता है। सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे और क्रॉस-सेक्टर साझेदारी के साथ एकीकरण के माध्यम से इस प्‍लेटफॉर्म ने अत्‍यधिक प्रगति की है। अक्टूबर 2025 तक, भाषिणी ने 350 से अधिक एआई भाषा मॉडल की सहायता की है और एक मिलियन डाउनलोड को पार कर चुका है

भाषिणी प्‍लेटफॉर्म कृषि, शासन, शिक्षा और लोक प्रशासन में बहुभाषी समाधान विकसित करने के लिए 50 से अधिक मंत्रालयों, स्टार्टअप और निजी संस्थाओं के साथ साझेदारी करते हुए सह-निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने वाले एक सहयोगी इकोसिस्टम के रूप में काम करता है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में वॉयसफर्स्ट और भाषासमावेशी डिज़ाइन को एकीकृत करके , यह अंतिम-मील कनेक्टिविटी को बढ़ाता है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में समान भागीदारी को बढ़ावा देता है। ग्रामीण विकास के संदर्भ में, भाषिणी प्‍लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करता है कि भाषाई विविधता कल्याणकारी योजनाओं, सूचना या सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच में बाधा न डाले।

भाषिणी संचलन केंद्रीय मंत्रालयों और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन की एक सहयोगी पहल है जो एआई-सक्षम भाषा प्रौद्योगिकियों के माध्यम से बहुभाषी शासन को मजबूत करती है। व्यापक भाषिणी कार्यक्रम के तहत कार्यान्वित, यह शासन प्रक्रियाओं और सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक डिजिटल प्रणालियों में वॉयसफर्स्ट इंटरफेस और अनुवाद क्षमताओं को एकीकृत करता है। यह पहल डोमेनविशिष्ट भाषा मॉडल के विकास का समर्थन करती है, अनुवाद सटीकता को बढ़ाती है और सहयोगी मॉडल प्रशिक्षण के माध्यम से शब्दावली को मानकीकृत करती है। यह पहल, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, भाषाई समावेशन और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देती है।

भारतजेन एआईभारत का बहुभाषी एआई मॉडल

जून 2025 में लॉन्च किया गया भारतजेन, भारत का पहला सरकारी वित्त पोषितसंप्रभुबहुभाषी और मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल है। अंतरविषयक साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन के तहत विकसित और इंडियाएआई मिशन के माध्यम से उन्नत, यह 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और पाठ, भाषण और दस्तावेज़-विजन क्षमताओं को एकीकृत करता है। भारतकेंद्रित डेटासेट पर निर्मित और शैक्षणिक संस्थानों के एक परिसंघ के नेतृत्व में, भारतजेन सार्वजनिक और विकासात्मक अनुप्रयोगों के लिए घरेलू रूप से विकसित एआई स्टैक स्थापित करता है।

ग्रामीण विकास के संदर्भ में, भारतजेन समावेशी, भाषा-सुलभ एआई समाधानों को सक्षम बनाता है जो साक्षरता और डिजिटल बाधाओं को कम करते हैं। इसकी आवाज-सक्षम और बहुभाषी क्षमताएं कृषिशासन और नागरिक सेवाओं में अनुप्रयोगों का समर्थन करती हैं, डिजिटल अर्थव्यवस्था में अंतिम-मील वितरण और ग्रामीण भागीदारी को मजबूत करती हैं।

आदि वाणीसमावेशी ग्रामीण और जनजातीय विकास को सक्षम बनाना

आदि वाणी एक एआईसक्षम भाषा मंच है जिसे दूरस्‍थ और वंचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के सामने आने वाली संचार बाधाओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आदि कर्मयोगी ढांचे के तहत, यह देशी जनजातीय भाषाओं में शासन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की सुविधा प्रदान करता है। राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रामाणिक भाषाई डेटा का उपयोग करके विकसित, यह प्‍लेटफॉर्म सामुदायिक ज्ञान के साथ तकनीकी नवाचार को एकीकृत करता है। इसमें भाषाई सटीकतासांस्कृतिक प्रासंगिकता और निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के लिए फीडबैक तंत्र शामिल हैं।

अनुवाद के अतिरिक्‍त, आदि वाणी प्‍लेटफॉर्म लुप्तप्राय भाषाओं और मौखिक परंपराओं को डिजिटाइज़ करके भाषा संरक्षणसांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण और डिजिटल सीखने में सहायता करता है । सार्वजनिक सेवाओं में भाषाई समावेशन को बढ़ाकर और सामुदायिक सशक्तिकरण की सहायता करने के द्वारा यह प्‍लेटफॉर्म राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जुड़े समावेशी ग्रामीण और जनजातीय विकास को आगे बढ़ाने के लिए एआई के जिम्मेदार उपयोग का उदाहरण देता है।

निष्कर्ष

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न केवल एक प्रौद्योगिकीय युक्ति के रूप में बल्कि समावेशी विकास लक्ष्यों के साथ जुड़े एक एकीकृत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में भी भारत में ग्रामीण परिवर्तन के एक मूलभूत स्तंभ के रूप में लगातार विकसित हो रहा है। कार्यनीतिक विजनशासन सुरक्षा उपायोंडिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचेबहुभाषी प्लेटफार्मों और कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल और स्थानीय शासन में क्षेत्रीय एकीकरण के संयोजन के माध्यम से, एआई को मानव क्षमता को प्रतिस्‍थापित करने के बजाय इसे बढ़ाने के लिए संस्थागत बनाया जा रहा है। जब एआई को निष्पक्षता, पारदर्शिता और भाषाई समावेशन के सिद्धांतों के भीतर समावेशित किया जाता है तो यह  अंतिममील सेवा वितरण को सुदृढ़ बनाता है, सहभागी शासन को बढ़ाता है और संरचनात्मक विषमताओं को कम करता है। जैसे-जैसे देश विकसित भारत@2047 की ओर आगे बढ़ रहा है, ग्रामीण इको-सिस्‍टम में एआई का जिम्मेदार और लोक-केंद्रित उपयोग गतिशीलन्यायसंगत तथा भविष्य के लिए तैयार विकास प्रणालियों के निर्माण की केंद्रीय भूमिका में बना रहेगा।

संदर्भ

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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