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इफको राज्य कार्यालय में नमो ड्रोन दीदी एवं ड्रोन उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

आज इफको राज्य कार्यालय में नमो ड्रोन दीदी एवं ड्रोन उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों, विशेषकर ड्रोन आधारित छिड़काव एवं इफको के नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना, साथ ही महिलाओं एवं युवाओं को स्वरोज़गार से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना रहा। कार्यक्रम में प्रदेश भर से नमो ड्रोन दीदियों एवं ड्रोन उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्य विपणन प्रबंधक, इफको श्री आर. के. एस. राठौर जी  रहे। उन्होंने उपस्थित नमो ड्रोन दीदियों एवं ड्रोन उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि पृथ्वी केवल हमारी आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से खेतों की उत्पादक क्षमता कमजोर पड़ रही है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे जलवायु असंतुलन एवं जल संसाधनों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के रूप में नैनो उर्वरकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया और बताया कि नैनो यूरिया, नैनो डीएपी , नैनो जिंक, नैनो कॉपर, बायो डी-कम्पोज़र तथा एन.पी.के. कंसोर्टिया जैसे उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने में सहायक हैं।

श्री राठौर जी  ने बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलता है, जिससे खेती की लागत घटती है और किसान की आय बढ़ती है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध कराते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। वहीं नैनो जिंक एवं नैनो कॉपर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर कर फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं, जबकि बायो डी-कम्पोज़र एवं एन.पी.के. कंसोर्टिया मिट्टी की सेहत सुधारने, कार्बनिक पदार्थों के अपघटन तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नैनो उर्वरकों एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है और केंद्र व राज्य सरकारें भी इन उत्पादों के उपयोग के लिए किसानों को निरंतर प्रेरित कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि एक ड्रोन के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकता है तथा वर्षभर में करीब 4000 एकड़ क्षेत्र में सेवाएं दी जा सकती हैं। यदि प्रति एकड़ 300 रुपये की दर से छिड़काव किया जाए, तो प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख रुपये तक की आय अर्जित की जा सकती है। ड्रोन एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग से किसानों को समय, लागत, पर्यावरण एवं आर्थिक रूप से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। राज्य विपणन प्रबंधक श्री आर. के. एस. राठौर द्वारा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग की विधि पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में धान की बुवाई मुख्यतः छिड़काव पद्धति, लाई-चौपी विधि एवं रोपा विधि से की जाती है। इन तीनों विधियों में नैनो डीएपी से बीजोपचार के सही तरीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही फसल की विभिन्न अवस्थाओं में नैनो उर्वरकों की उचित मात्रा, छिड़काव का सही समय तथा ड्रोन संचालन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में उप महाप्रबंधक (इफको) श्री राजेश कुमार गोले ने इफको के अन्य उत्पादों जैसे जल घुलनशील उर्वरक, विशिष्ट उर्वरक,जैव-उर्वरक आदि के उपयोग एवं लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल घुलनशील उर्वरकों का ड्रोन के माध्यम से प्रयोग कर किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है। मुस्कान तिवारी क. क्षेत्र प्रतिनिधि ने ड्रोन उद्यमियों के लिए इफको सहकार उड़ान ऐप तथा किसानों के लिए ड्रोन छिड़काव बुकिंग हेतु इफको किसान उदय ऐप की जानकारी भी दी गई, जिससे सेवाओं को और अधिक सुगम बनाया जा सके।

इसी क्रम में उप प्रबंधक श्री दिनेश कुमार गांधी द्वारा इफको की संकट हरण बीमा योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में रबी मौसम के लिए बेहतर कार्य योजना बनाकर कार्य करने हेतु सभी नमो ड्रोन दीदियों एवं ड्रोन उद्यमियों को प्रोत्साहित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले ड्रोन उद्यमियों चित्रागंद पटेल – जिला बेमेतरा , बेदराम पटेल – जिला बेमेतरा, मालती साहु – जिला बलौदा बाजार, शांति विश्वकर्मा – जिला राजनंदगांव को सम्मानित किया गया, जिससे अन्य प्रतिभागियों में भी उत्साह का संचार हुआ। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन किया गया।

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