पशुपालन

मवेशियों में कृत्रिम गर्भाधान

डॉ. विनिता वासनिक, डॉ. आर.सी. रामटेके, डॉ. विनोद चिमनकर

पारंपरिक रूप से पशुपालन में प्रजनन प्राकृतिक मिलन (नेचुरल मेटिंग) पर निर्भर था, जिसमें चोट लगने का खतरा, प्रजनन संबंधी रोगों के फैलने की संभावना, और सीमित आनुवंशिक सुधार जैसी समस्याएँ होती थीं।

कृत्रिम गर्भाधान आधुनिक डेयरी पशुपालन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है। कृत्रिम गर्भाधान का मतलब है बिना सांड के गाय को गर्भवती करना । इसमें वेटरनरी डॉक्टर पशु चिकित्सक अच्छी नस्ल के सांड का वीर्य सही समय पर गाय के अंदर डालता है । इससे किसान को उच्च दूध देनेवाली, अच्छी नस्ल की, रोगमुक्त बछिया मिलती है ।

कृत्रिम गर्भाधान के फायदे

  1. एक बैल के वीर्य से विस्तारित वीर्य के माध्यम से बड़ी संख्या में मादाओं को कवर किया जा सकता है। इस प्रकार एक बैल से बड़ी संख्या में संतान प्राप्त की जा सकती है।
  2. उत्पादन और आर्थिक महत्व के अन्य गुणों के लिए आनुवंशिक सुधार गाय में क्रॉसब्रीडिंग और उन्नयन कार्यक्रम द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, जिसे कृत्रिम गर्भाधान द्वारा तेजी से किया जा सकता है।
  3. कृत्रिम गर्भाधान उन छोटे डेयरी किसानों के लिए उपयोगी है जिनके पास गायों की संख्या कम है और वे उच्च वंशावली वाली संतति को नहीं रख सकते।
  4. यहां तक कि बड़े झुंड में भी एक या दो सांड प्रजनन काल के दौरान एक ही या लगातार दिनों में कामोत्तेजित होने वाली कई गायों को सफलतापूर्वक भर नहीं सकते, इसलिए बड़े झुंड में प्रजनन के एक तरीके के रूप में कृत्रिम गर्भाधान एक बेहतर विकल्प है।
  5. युवा बछिया कभी-कभी भारी और बड़े आकार के सांड के साथ प्रजनन नहीं कर पाती और कृत्रिम गर्भाधान ही प्रजनन का एकमात्र विकल्प रह जाता है।
  6. हिमीकरण तकनीक के आगमन से वीर्य को देश भर में ले जाया जा सकता है, इस प्रकार वीर्य का आयात क्रॉस प्रजनन कार्यक्रम के लिए बैल को आयात करने की तुलना में बहुत सस्ता हो गया है ।
  7. स्वस्थ बैल से वीर्य एकत्र किया जाता है, उसका मूल्यांकन किया जाता है, उसे संसाधित किया जाता है और कृत्रिम गर्भाधान में उपयोग के लिए जमाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप गर्भधारण दर अधिक होती है ।
  8. यौन संचारित रोगों जैसे आईबीआर-आईपीवी वायरस, कैम्पिलोबैक्टर, ट्राइकोमोनिएसिस आदि पर नियंत्रण संभव हो जाता है क्योंकि इन रोगों से मुक्त बैल का चयन किया जाता है और वीर्य संग्रह के लिए उपयोग किया जाता है ।
  9. पैर की चोट, श्रोणि आदि की मामूली समस्याओं वाली श्रेष्ठ गाय को कृत्रिम गर्भाधान द्वारा प्रजनन कराया जा सकता है जो कि बैल के साथ संभव नहीं है ।
  10. कृत्रिम गर्भाधान से पहले गाय और भैंस की स्त्री रोग संबंधी चिकित्सकीय जांच की जाती है, इस प्रकार कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से प्रजनन के लिए केवल प्रजनन की दृष्टि से स्वस्थ मादा का ही चयन किया जा सकता है।
  11. कृत्रिम गर्भाधान से उचित रिकॉर्ड रखने में मदद मिलती है और इस प्रकार डेयरी झुंड का प्रजनन प्रबंधन अधिक कुशल हो जाता है ।
  12. यह बैल की मृत्यु के बाद भी जमे हुए वीर्य का उपयोग करने में सक्षम बनाता है, इस प्रकार चयनित लाइन वाले बैल के वीर्य को लंबी अवधि के लिए संग्रहीत किया जा सकता है।
  13. कृत्रिम गर्भाधान में श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म की बर्बादी नहीं ।
  14. कृत्रिम गर्भाधान डेयरी किसानों के घर पर ही किया जा सकता है, इसलिए कामोत्तेजित मादा गाय को कृत्रिम गर्भाधान केंद्र तक ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है और परिवहन के दौरान कामोत्तेजित मादा गाय पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं पड़ता है तथा इससे गर्भधारण दर बढ़ाने में मदद मिलती है।

यदि इसे सही तकनीक, स्वच्छता और सही समय (हीट) की पहचान के साथ किया जाए, तो बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं।
कृत्रिम गर्भाधान कराने का सही समय (हीट पहचानना) – जब गाय हीट में होती है, तभी कृत्रिम गर्भाधान करना चाहिए ।

हीट के लक्षण –
1. गाय दूसरे पशु में कूदे तो वह खड़ी रहती है ।
2. साफ, चिपचिपा बलगम निकलना योनि (वल्वा) से ।
3. बेचैनी रंभाना ।
4. खाना कम करना ।
5. दूसरे पशुओं पर चढ़ने की कोशिश ।

कृत्रिम गर्भाधान का सबसे सही समय – हीट दिखने के 12 घंटे बाद ।
उदाहरण –
सुबह 6 बजे हीट दिखी – शाम 6 बजे कृत्रिम गर्भाधान करवाना चाहिए ।
शाम 6 बजे हीट दिखी – सुबह 6 बजे कृत्रिम गर्भाधान करवाना चाहिए ।

किसान को अपनी गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराने के लिए निम्नलिखित कार्य करना चाहिए-

  1. हीट को रोज देखना। सुबह-शाम गाय को ध्यान से देखें। हीट दिखे तो तुरंत आगे की तैयारी करें ।
  2. नजदीकी कृत्रिम गर्भाधान के तकनीशियन/वेटरनरी डॉक्टर/पशुचिकित्सक को फोन करें और उन्हें बताएं। गाय की हीट का समय, नस्ल, उम्र ।
  3. नजदीकी कृत्रिम गर्भाधान के तकनीशियन/वेटरनरी डॉक्टर/पशुचिकित्सक के आने से पहले गाय को मजबूती से बांधें, पूंछ और पिछले हिस्से को साफ रखें, गाय को पानी दें । जरुरत पड़े तो एक आदमी पकड़े रहने के लिए रखें । बाकी सामान तकनीशियन अपने साथ लाता है । ( कृत्रिम गर्भाधान की गन, सीमन, ग्लोब्स आदि)
  4. कृत्रिम गर्भाधान के तकनीशियन/वेटरनरी डॉक्टर/पशुचिकित्सक करेगा वह हीट की जॉंच करेगा, सीमन पिघलाकर गन में भरेगा, गाय की गर्भाशय में सही जगह वीर्य डाल देगा, तारीख और सांड नंबर लिख देगा ।

लेखक;
डॉ. विनिता वासनिक, डॉ. आर.सी. रामटेके, डॉ. विनोद चिमनकर
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय-दुर्ग (छत्तीसगढ़)

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