दूधः संपूर्ण पोषण हेतु वरदान
डॉ. भारती साहू, डॉ. फणेश्वर कुमार, डॉ. जागृति कृषान, डॉ. रजनी फ्लोरा कुजुर, डॉ.प्रीति सिंग


भारत में पशुधन से प्राप्त उत्पादों में दूध का स्थान सर्वोच्च है। जिससे अच्छे आय के साथ साथ अच्छा पोशण भी प्राप्त होता है। मुख्यतः गाय और भैंस के दूध को आहार में सम्मिलित किया जाता है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में बकरी का दूध भी उपयोग में लाया जा रहा है। दूध को एक आदर्ष व पूर्ण आहार माना जाता है जिसमें अधिक मात्रा में पोशक तत्व होते हैं। दूध शरीर निर्माण के लिए आवश्यक प्रोटीन, हड्डी निर्माण के लिए आवश्यक मिनरल, स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिन तथा उर्जा देने के लिए लैक्टोज़ व दुग्ध वसा का अच्छा स्रोत होता है जो कि आसानी से पच जाता है। दूध अपने अच्छे गुणों के कारण सभी उम्र के लोगों जैसे विकसित होते बच्चे, वयस्क, बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती माताएं आदि के लिए एक महत्वपूर्ण आहार होता है। दूध के घटक में मुख्य रुप से पानी होता है जो कि लगभग 85 प्रतिशत होता है। इसके अन्य घटको का विवरण निम्नानुसार है-
- प्रोटीनः- दूध स्वयं में एक पूर्ण एवं उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन है, जिसमें सभी आवश्यक अमीनो अम्ल सही मात्रा में मौजूद होता है।
- मिनरलः- पोषण के लिए आवश्यक मिनरल जैसे कैल्शियम, फॉस्फोरस आदि दूध में विद्यमान होता है।
- विटामिनः- खाद्य पदार्थों का यह कारक सामान्य वृद्धि, स्वास्थ्य व प्रजनन कार्य हेतु आवष्यक होता है। दूध विटामिन ए, विटामिन डी, थाइमिन, राइबोफ्लेविन जेसे विटामिन का बहुत अच्छा स्रोत होता है। परंतु इसमें विटामिन सी की कमी होती है।
- वसाः- दुग्ध वसा उर्जा का बहुत बड़ा स्रोत होता है जिसमें आवष्यक वसीय अम्ल जैसे लिनोलिक अम्ल व अरेकेडोनिक अम्ल प्रचुर मात्रा में होते हैं। दूध वसा दूध उत्पाद के विभिन्न गुण जैसे कोमलता, नरमता व डेयरी उत्पाद के स्वाद हेतु जिम्मेदार होते है।
- लैक्टोजः- चूॅंकि लैक्टोज कार्बोहाइड्रेट है अतः इसका मुख्य कार्य शरीर को उर्जा प्रदान करना है। यद्यपि लैक्टोज आंत में हल्के अम्ल क्रियाओं में भी सहायक होता हैं।
- दूध में उर्जा की मात्राएँ- दूध स्वयं में उर्जा का पूर्ण स्रोत होता है। दूध में उपस्थित विभिन्न घटको से उर्जा प्राप्त होती है।
दूध वसा – 9.3 कैलोरी/ग्राम
दूध प्रोटीन – 4.1 कैलोरी/ग्राम
दूध षर्करा – 4.1 कैलोरी/ग्राम
दूध में बहुत कम मात्रा में फास्फोलिपिड, स्टेरॉल, एन्जाइम एवं रंगवर्णक आदि उपस्थित रहते हैं। दूध के घटक नस्लवार, दूध अवस्था की स्थिति, ऋतु, वातावरणीय कारकों के अनुसार कुछ मात्रा में बदलते रहते हैं।
दूध एवं उसके घटक (वसा व वसा रहित ठोस):
दूध में मुख्य घटक के रुप में पानी होता है जो कि दूध का लगभग 80 से 90 प्रतिषत भाग बनाता है। इसके अतिरिक्त बचा हुआ भाग ठोस पदार्थ का होता है।

नाइट्रोजन युक्त पदार्थ में केसीन प्रोटीन, लैक्टोएल्बुमिन व लैक्टोग्लोब्युलिन आदि आते हैं। दूध व उसके घटकों में गाय व भैंस के दूध में काफी अंतर होता है। इसके अतिरिक्त नस्लवार की भी भिन्नताएँ मिलती हैं। पषुओं का आहार दूध के घटकों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक होता है। उनके आहार में परिवर्तन दूध के घटकों में परिवर्तन कर देता हैं।
दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद के महत्व-
1. दूध प्रोटीन का उत्तम स्रोत है, इसे आहार में निश्चित रुप से लेना चाहिए।
2. दूध बच्चों के विकास में सहायक होता है। यह हड्डियों व दॉंतों के लिए आवश्यक होता है।
3. दूध में कैल्षियम प्रचुर मात्रा में होता है अतः माताओं एवं बढ़ते बच्चों के लिए यह आवश्यक पौश्टिक खाद्य है।
4. कुपोषण को दूर करने में दूध की अहम भूमिका है।
5. बीमारों एवं बुजुर्गों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए दूध का उपयोग आवष्यक रुप से करना चाहिए।
6. दूध के विभिन्न उत्पादों जैसे दही, पनीर, घी, खोवा एवं मिठाईयॉं अच्छे स्वास्थ्य, स्वाद के साथ साथ आय का अच्छा साधन है।
7. दूध में उपस्थित लैक्टोज़ पाचन हेतु फायदेमंद है।
8. दूध हृदय के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवष्यक होता है।
9. दूध उर्जा, प्रोटीन, विटामिन एवं मिनरल का स्रोत होने के कारण संतुलित आहार माना जाता है।
पषुधन से प्राप्त सभी उत्पादों में दूध जिसमें उपरोक्त श्रेश्ठताए व गुण हो के आधार पर इसे संपूर्ण आहार के वरदान के रुप में चिन्हांकित किया जा सकता है।










