नवजात बछड़े /बछियों का पोषण प्रबंधन
डॉ.रामचंद्र रामटेके, डा.मनोज गेंदले, डा.शबीर कुमार एवं डॉ.निषिमा सिंह


- पशुपालन कार्यक्रम में नवजात बछड़े /बछियों का पालन पोषण काफी महत्वपूर्ण है।
- नवजात बच्चों की यह ऐसी अवस्था होती है कि इसमें जरा सी भी लापरवाही के कारण मृत्यु होने का खतरा काफी बढ़ जाता है ।
- जन्म से 6 माह के अन्तराल तक बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इसी समय में उनकी मृत्युदर काफी अधिक होतीहै ।
- यह बछड़े/बछियों में 20-25 प्रतिशत तक पायी गयी है।
नवजात बच्चों में मृत्यु के कारण
- जन्म भार का कम होना
- स्वच्छ वातावरण व ठीक रखरखाव का अभाव
- बच्चों को खीस न पिलाना
- बच्चों को भरपेट दूध न पिलाना
- परजीवी रोग
- नाभिनाल का सुचारू रूप से उपचार न करना
नवजात बच्चों में मृत्युदर कम करने के उपाय
- बच्चों के जन्म के पूर्व से ही उनके पोषण का ध्यान रखना चाहिए ।
- बच्चों को स्वच्छ व हवादार बाड़े में रखना चाहिए ।
- बच्चों की गर्मी व सर्दी से पूर्ण सुरक्षा करनी चाहिए ।
- बच्चों को जन्म के बाद ठीक से खीस पिलानी चाहिए ।
- बच्चों को उनकी अच्छी वृद्वि के लिए ठीक मात्रा में दूध पिलाना चाहिए ।
- नाभिनाल का सुचारू रूप से उपचार करना चाहिए ।
- बच्चों की परजीवी रोगों से रक्षा करनी चाहिए ।
गाय के बच्चों को दूध पिलाने की सारणी 3 माह
| शारीरिक भार (किग्रा) | बच्चों की उम्र(दिन) | खीस/पेवस(लि.) | दूध (लि.) | सप्रेटा (लि.) |
कॉफ स्टार्टर(ग्राम) |
| 25 तक | 5 दिनो तक | 1/10 शरीर भार का | – | – | – |
| 20 से 25 | 6-20 | – | 1/10 शरीर भार का | – | – |
| 25 से 50 | 21-30 | – | 1/15 शरीर भार का | 1/20 शरीर भार का | 100-200 |
| 30 से 60 | 31-60 | – | 1/20 शरीर भार का | 1/25 शरीर भार का | 200-500 |
| 40 से 75 | 61-90 | – | – | 1/25 शरीर भार का | 500-1000 |
बच्चों के जीवन में खीस पिलाने का महत्व
- खीस रेचक होती है, पाचन अंगों में जमा पदार्थो को बाहर निकालने व सफाई में मदद करती हैै ।
- इसमें ग्लोबुलिन प्रोटीन होती है जिसके द्वारा एन्टीबोडिज बच्चों को प्राप्त होती है और फलस्वरूप बीमारियों के जीवाणुओं से प्रतिरक्षा होतीहै ।
- इसमें प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है जो बच्चों की बढ़ोत्तरी में सहायक है ।
- खनिजपदार्थ जैसे कैल्सियम, फॉस्फोरस और लोहा दूध की अपेक्षा कई गुना होते हैंजो हड्डियां व रक्त बनाने में सहायक हैं ।
- इसमें विटामिन ए, डी तथा बी भी प्रचुर मात्रा म मिलता है ।
कृत्रिम खीसः- खीस के अभाव में कृत्रिम रूप से खीस का निमार्ण कर बछडों केा दिया जाना चाहिये। जिसके लिये निम्न पदार्थो को सम्मिलित कर कृत्रिम खीस तैयार किया जा सकता है। इस प्रकार के मिश्रण एक बार खिलाने के लिये पर्याप्त है एवं इस प्रकार बछड़े को 3 बार दिया जा सकता है।
| क्रमांक | भोज्य पदार्थो का नाम | मात्रा |
| 1. | कच्चा अण्डा | 1 नग |
| 2. | केस्टर तेल | 3 एम.एल. |
| 3. | विटामिन ए | 10000 आई. यू. |
| 4. | सम्पूर्ण दूध (गरम) | 525 एम.एल. |
| 5. | औरियोमायसिन | 80 मिली.ग्राम |
दुध या सप्रेटा के जगह मिल्क रिप्लेसरः-
दुध के जगह सप्रेटा या मिल्क रिप्लेसर बछडों को दिया जा सकता है जिसके लिये निम्नानुसार स्रामाग्रीयों को सम्मिलित कर तैयार किया जा सकता है।
| क्रमांक | एक मिल्क रिप्लेसर मे विभिन्न अवयवों की मात्रा | |
| 1. | सूखा स्कीम मिल्क | 50 भाग |
| 2. | सूखा मठा | 30 भाग |
| 3. | ड्रेक्सट्रोज | 8 भाग |
| 4. | ओट के आटा | 5 भाग |
| 5. | ब्रीवर यीस्ट | 5 भाग |
| 6. | इराडियेटेड यीस्ट | 0.26 भाग |
| 7. | विटामिन ए पूरक | 1.70 ग्राम |
| 8. | खनिज तत्व | 0.04 ग्राम |
| योग | 100 भाग |
कॉफ स्टार्टरः गाय व भैंस के बच्चों के लिए सुपाच्य प्रचुर प्रोटीन (23-26 सी.पी. या 18-20 डी.सी.पी. प्रतिशत ) व उर्जा (75 प्रतिशत टी.डी.एन. ) युक्त संतुलित आहार कॉफ स्टार्टर कहलाता है।
| क्रमांक | एक संतुलित कॉफ स्टार्टर में विभिन्न अवयवों की मात्रा | |
| 1. | पिसा जौ या मक्का | 50 भाग |
| 2. | मूंगफली की खली | 30 भाग |
| 3. | गेहॅूं का चोकर | 7 भाग |
| 4. | मछली का चूरा या सूखा सप्रेटा दूध | 10 भाग |
| 5. | खनिज मिश्रण | 2 भाग |
| 6. | नमक | 0.5 भाग |
| 7. | विटामिन ए पूरक | 10 ग्राम |
| 8. | एन्टीबायोटिक | 20 ग्राम |
| 9. | प्रति सौ किग्रा. में शीरा | 7 किलो |
लेखक :
डॉ.रामचंद्र रामटेके, डा.मनोज गेंदले, डा.शबीर कुमार एवं डॉ.निषिमा सिंह
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.)










