

परिचयः बेल का शरबत एक पारंपरिक, पौष्टिक और ठंडक देने वाला पेय है जो भारत के कई हिस्सों में विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में सेवन किया जाता है। बेल फल एक आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फल है, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसका गूदा मीठा, सुगंधित और ठंडक प्रदान करने वाला होता है। जब बेल के गूदे को पानी, चीनी और मसालों के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है, तो यह शरबत बनता है। यदि इसे अधिक गाढ़ा करके प्रिज़रवेटिव्स के साथ बोतलबंद किया जाए, तो वह “बेल स्क्वैश“ कहलाता है, जिसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। बेल का शरबत न केवल प्यास बुझाने वाला पेय है, बल्कि यह पाचन को सुधारने, शरीर को ठंडक पहुँचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। इसकी लोकप्रियता इसके स्वाद, स्वास्थ्य लाभ और प्राकृतिक ताजगी के कारण दिनोंदिन बढ़ रही है। (Bael syrup)
पोषण मूल्य (प्रति 100 मि.ली.):
| पोषक तत्व | मात्रा |
| ऊर्जा | 80-100 कैलोरी |
| कार्बोहाइड्रेट | 20-25 ग्राम |
| शुगर | 15-20 ग्राम |
| फाइबर | 1.5-2 ग्राम |
| विटामिन | 8-10 मि.ग्रा |
| कैल्शियम | 30 मि.ग्रा |
| पोटैशियम | 120 मि.ग्रा |
आवश्यक सामग्रीः
| सामग्री का नाम | मात्रा (लगभग) |
| पका हुआ बेलफल | 1 किग्रा |
| पानी | 2-3 लीटर |
| चीनी | 500 ग्राम – 800 ग्राम (स्वाद अनुसार) |
| नींबू का रस (वैकल्पिक) | 2-3 चम्मच |
| काला नमक | 1 चम्मच |
| भुना जीरा पाउडर | 1 चम्मच |
| साइट्रिक एसिड (यदि स्क्वैश बनाना हो) | 5 ग्राम |
| सोडियम बेंजोएट (प्रिज़रवेटिव) | 1 ग्राम प्रति लीटर |
बनाने की विधिः बेल का शरबतः बेल फल को धोकर बीच से तोड़ें। चम्मच की सहायता से गूदा (चनसच) निकालें। गूदे को 1 लीटर पानी में 30 मिनट भिगोकर रखें। हाथ से मसलकर छान लें (मोटे छलनी या मलमल कपड़े से)। छने हुए रस में चीनी, काला नमक, भुना जीरा और नींबू रस मिलाएं। अच्छे से हिलाकर फ्रिज में ठंडा करके परोसें।
पका बेल फलः पूरी तरह पके हुए बेल फल को लें, जिससे शरबत का स्वाद और सुगंध बेहतर हो।
गूदा निकालनाः बेल को तोड़कर उसके अंदर का गूदा चम्मच या हाथ से निकाल लें।
पानी में भिगोनाः निकाले गए गूदे को थोड़ा पानी डालकर 15-20 मिनट तक भिगोने दें, ताकि वह नरम हो जाए।
मसलकर रस निकालनाः गूदे को हाथ से मसलें या लकड़ी के चम्मच से दबाकर रस निकालें।
छाननाः रस को छानकर मोटे रेशे, बीज और गुठलियाँ अलग कर लें।
चीनी, नमक और नींबू रस / साइट्रिक एसिड मिलानाः स्वादानुसार चीनी, थोड़ा नमक और नींबू का रस या साइट्रिक एसिड मिलाएँ ताकि स्वाद संतुलित हो।
प्रिज़रवेटिव मिलानाः स्क्वैश लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें थोड़ी मात्रा में प्रिज़रवेटिव (जैसे सोडियम बेंजोएट) मिलाएँ।
बोतल में भरनाः तैयार मिश्रण को अच्छी तरह साफ़ और सूखी बोतलों में भरें।
स्टोर करना / परोसनाः बोतलों को ठंडी जगह या फ्रिज में रखें और आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर परोसें।
उपयोगः यह एक प्राकृतिक स्क्वैश है जिसे रोजाना पानी में मिलाकर पिया जा सकता है। गर्मी के मौसम में यह ठंडक प्रदान करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। साथ ही, यह पाचन संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है, जिससे यह एक संपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक पेय बन जाता है। स्थानीय बाजारों में गर्मियों में मांग अधिक होती है। ऑर्गेनिक / आयुर्वेदिक ब्रांडिंग के साथ ऑनलाइन बेच सकते हैं। होटल्स, रेस्तरां और कैफे में हेल्दी डिं्रक के रूप में प्रमोट कर सकते हैं। पैकिंग और लेबलिंग अच्छी होनी चाहिए आकर्षक बोतल और हेल्थ बेनिफिट्स के साथ।
बेल शरबत के स्वास्थ्य लाभः बेल शरबत पेट की समस्याओं जैसे दस्त, कब्ज और गैस में राहत देता है। यह पाचन क्रिया को सुधारता है। गर्मी के मौसम में बेल शरबत शरीर को ठंडक पहुंचाता है और लू (हीट स्ट्रोक) से बचाव करता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ताजगी और ऊर्जा प्रदान करते हैं। बेल में मौजूद विटामिन ब् और अन्य एंटीऑक्सिडेंट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। यह लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और पेट की अंदरूनी गर्मी को शांत करता है। बेल का सेवन सीमित मात्रा में मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, लेकिन बिना चीनी मिलाए।
लेखक :
लिशा तंबोली, डॉ. संगीता एवं संस्कृति शुक्ला
पं. किशोरी लाल शुक्ला उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, राजनांदगांव (छ.ग.)










