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इफको द्वारा जनपद जांजगीर में सहकारी समिति प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

जांजगीर। 23 सितंबर 2025 :  इफको द्वारा जांजगीर जिले के नोडल कार्यालय में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के प्रबंधकों एवं ऑपरेटरों के लिए विशेष सहकारी समिति प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले की सभी समितियों के प्रबंधक व कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक उर्वरक तकनीक, नवीन उत्पादों तथा उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में विशेष रूप से श्री अमित साहू (नोडल अधिकारी, जांजगीर), श्री दिनेश गांधी (उप प्रबंधक इफको), श्री योगेन्द्र साहू (क्षेत्रीय अधिकारी इफको) सहित जिले की विभिन्न समितियों के प्रतिनिधि एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में सबसे पहले प्रतिभागियों को इफको के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि इफको भारत की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है, जो लंबे समय से किसानों की उन्नति और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रही है। इसके बाद प्रशिक्षण में उपस्थित कर्मचारियों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए तरल उर्वरक हैं, जो पारंपरिक दानेदार यूरिया और डीएपी की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती हैं। इनका उपयोग करने से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि लागत भी काफी हद तक कम होती है। इसके साथ ही किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों ही संभव हो पाते हैं।

इफको  अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि नैनो यूरिया की 500 मिली बोतल एक बोरी यूरिया (45 किलो) के बराबर प्रभाव देती है और इसे फसल के 25 से 30 दिन तथा 40 से 45 दिन की अवस्था पर पत्तियों पर स्प्रे किया जाए तो पौधों को तुरंत पोषण मिलता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है। इसी तरह नैनो डीएपी का उपयोग बीज उपचार में और फसल वृद्धि अवस्था में स्प्रे के रूप में करने से जड़ें मजबूत होती हैं, पौधों की वृद्धि तेज होती है और फसल उत्पादन 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि किस प्रकार समितियां नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को दानेदार उर्वरकों के विकल्प के रूप में उपयोग कर सकती हैं। प्रतिभागियों को प्रायोगिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि नैनो उर्वरक के छिड़काव से फसलों की पैदावार बढ़ती है और मिट्टी पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता। इसके अलावा इफको के अन्य उत्पादों जैसे – एनपीके कंसोर्टिया, बायो डी-कंपोजर आदि के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को समझाया गया कि यदि समितियां नैनो उत्पादों के साथ इन जैविक एवं सहायक उत्पादों को जोड़कर किसानों तक पहुँचाएँगी, तो समितियों की आय में वृद्धि होगी और किसानों को भी आधुनिक तकनीक आधारित कृषि समाधान मिल सकेगा। सत्र के दौरान यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि आज की कृषि व्यवस्था में सहकारी समितियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि समितियां इफको के नवीन उत्पादों का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करेंगी, तो किसानों के बीच जागरूकता बढ़ेगी और साथ ही समितियों का कारोबार भी सुदृढ़ होगा।

कार्यक्रम के अंत में श्री अमित साहू (नोडल, जांजगीर) ने सभी उपस्थित प्रबंधकों और कर्मचारियों को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास न केवल समितियों को सशक्त बनाते हैं, बल्कि किसानों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने सभी समितियों से आह्वान किया कि वे नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं अन्य इफको उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाएँ और इनके प्रभावी वितरण की दिशा में कार्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि इफको के उत्पाद किसानों के लिए भविष्य की आवश्यकता हैं, क्योंकि इससे खेती की लागत कम होगी, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि होगी। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। सभी उपस्थित कर्मचारियों ने इस प्रशिक्षण से मिली जानकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करने का संकल्प लिया। इस प्रकार, जांजगीर जिले में आयोजित यह सहकारी समिति प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल समितियों को आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी देने वाला साबित हुआ, बल्कि यह सहकारिता की शक्ति को और मजबूत करने वाला भी रहा।

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