पशुपालन

पशुओें में रक्त परीक्षण का महत्व

डॉ. जागृति कृषान, डॉ. रजनी फ्लोरा कुजूर, डॉ. वंदना भगत, डॉ. के. आर बघेल एवं डॉ0 प्रीति सिंह

पशुओें में रक्त परीक्षण नैदानिक मूल्यांकन, खाद्य और औषधि सुरक्षा मूल्यांकन और अनुसंधान अध्ययनों का एक नियमित हिस्सा है। पूर्ण रक्त गणना आमतौर पर पशु चिकित्सकों के द्वारा पशु चिकित्सा एवं पशुओं कि अच्छे से देखभाल में किया जाता हैं। रक्त के बिना, शरीर के अंगो को जीवित रहने के लिए आवश्यक आक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, संक्रमण से नहीं लड़ पाते, या अपने अपशिष्ट उत्पादो से छुटकारा नहीं पा पाते। पर्याप्त रक्त के बिना पशु कमजोर हो जाते है, और पशु की मृत्यु भी हो सकती है। जानवरों मे रक्त परीक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छुपी हुई बीमारीयों, संक्रमण या अंगो की खराबी का पता लगाने में मदद करता है, जो लक्षण दिखने से पहले ही हो सकती है।

रक्त का कार्य

  1. रक्त फुफ्फुसीय और पाचन तंत्र से आक्सीजन और पोषक तत्वों को ऊतकों तक पहुचाता है, जबकि कार्बनडाइआक्साइड जैसे अपशिष्ट उत्पादों को ऊतक से फुफ्फुसीय तंत्र तक ले जाता है।
  2. शरीर के तरल पदार्थों का पी.एच बनाये रखता है।
  3. अन्य अपशिष्ट उत्पाद जो रक्त द्वारा ऊतक से निकाले जाते है, जैसे लैक्टिक अम्ल, यूरिया एवं अमोनिया।
  4. शरीर के ऊष्मीय संतुलन के साथ-साथ प्रतिरक्षा को बनाये रखता है।
  5. हार्मोन को उनके उत्पादन स्थल से उनकी क्रिया स्थल तक पहुचाना।
  6. रक्त में थक्का जमने और शरीर से खून की कमी को कम करने या रोकने की आंतरिक क्षमता होती है।

रक्त का संघटन-
रक्त प्लाज्मा एवं रक्त कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
अ. रक्त प्लाज्मा- यह रक्त का तरल पदार्थ होता है, जिसमें रक्त कि कोशिकाएं के साथ मिला रहता है। इसका रंग पीला से रंगहिन होता है तथा प्रत्येक प्रजाति में अलग-अलग होता है। इसका पीला रंग बिलिरूबिन की उपस्थित पर निर्भर करता है। हलाकि कैरोटीन और अन्य रंगद्रव्य योगदान देने वाले कारक होते है।

ब. रक्त कोशिकाओ के प्रकार –रक्त कोशिकाए तीन प्रकार की होती है, लाल रक्त कणिकाए, श्वेत रक्त कणिकाए एवं प्लेटलेटस।

1. लाल रक्त कणिकाए-
लाल रक्त कणिकाए का आकार द्विअवतली होती हैं, तथा मध्य में गोलाई लिए हुए अंदर की ओर दबा हुआ होता हैं। बहुत सारे स्तनधारीयों में यह अकेंद्रियकिय तथा अचलित होता हैं। इसका द्विअवतली आकार पृष्ठीय क्षेत्रफल को बढ़ता है जिसके कारण कोशिका की प्रसार दूरी कम होती है, जिससे कार्बडाइक्साइड तथा आक्सीजन का आदान प्रदान में सुविधा होती हैं।
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणिकाओं का लाल रंगद्रव्य एक जटिल लौह युक्त, संयुग्मित प्रोटीन (ग्लोबिन, हिस्टोन) हैं, जो एक रंगद्रव्य और सरल प्रोटीन से बना होता है, हीमोग्लोबिन फेफड़ो से ऊतकों तक आक्सीजन पहुचाता हैं, तथा परिधीय ऊतकों से श्वसन प्रणाली तक कार्बनडाइक्साइड पहुचाता है।

2. श्वेत रक्त कणिकाए- श्वेत रक्त कणिकाए दो प्रकार के होते है। एग्रनेलोसाइट तथा ग्रनेलोसाइट।

  • ग्रनेलोसाइट- न्यूट्रोफिल, इवोसिनोफिल, बेसोफिल।
  • एग्रनेलोसाइट- लिफोसाइड एवं मोनोसाइड।
    इनका कार्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाये रखना होता हैं, यह शरीर को संक्रामक बीमारीयों से लडनें की प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते है।

3. प्लेटलेटस- ये रक्त में पाई जाने वाली छोटी, रंगहीन कोशिकाएं है, जो शरीर में रक्तस्त्राव को रोकने के लिए रक्त को जमाकर थक्का बनाने का काम करती है।

रक्त परीक्षण के नमूने- रक्त परीक्षण के नमूने पशुओं में अलग अलग स्थान से लिया जाता है।

पशु रक्त परीक्षण के नमूने का स्थान
श्वान, बिल्ली सिफैलिक एवं सिफेनस शिरा
गौवंशी, बकरा, घोड़ा, भेड़ जुगलर शिरा एवं कान शिरा
सूकर अग्र वेनाकेवा एवं कान शिरा
पक्षी पंख शिरा एवं हृदय

मुख्य रक्त परीक्षण
1. पूर्ण रक्त गणना-

  • लाल रक्त कोशिकाएं- रक्त में लाल रक्त कणिकाओं की संख्याए, हीमोग्लोबिन की मात्रा, इ.एस.आर एवं पीसीवी का विश्लेषण किया जाता है।
  • श्वेत रक्त कोशिकाएं- ये संकमण और प्रतिरक्षा प्रणाली को दर्शाती हैं।
  • प्लेटलेटस- रक्त में थक्का जमने की क्षमता का पता चलता हैं, जो चोटो के लिए महत्वपूर्ण है।

पूर्ण रक्त गणना का समान्य मान

2. बायोकैमिस्ट्री परीक्षण-

  • एल्ब्यूमिन- यह यकृत के कार्य का संकेत देता है।
  • सोडियम एवं पोटेशियम- गुर्दे, शरीर की पानी की मात्रा या अन्य समस्याओ का पता लगाने मेे मदद करता है।
  • एमाइलेज- अग्नाशय में सूजन का संकेत देता हैं।
  • बिलीरूबिन-यह यकृत में बीमारी का संकेत देता है।

रक्त परीक्षण का महत्व

  1. बीमारीयों का शीघ्र पता लगाना- रक्त परीक्षण से आंतरिक बीमारीयों का पता लगा सकते हैं। जो कि पशुओं की जल्दी उपचार में सहायक होती हैं।
  2. अंगो की कार्यप्रणाली की आकलन- यकृत, गुर्दे, अग्नाशय जैसे अंगो की कार्यक्षमता का पता लगाया जा सकता है, जिससे पशुओं की स्वास्थ स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है।
  3. संक्रमण एवं सूजन का कारण – रक्त परीक्षण से संक्रमण एवं सूजन का कारण का पता लगा सकते हैं।
  4. एनीमिया का पता लगाना- हीमोग्लोबिन एवं लाल रक्त कणिकाओं से एनीमिया (रक्तल्पता ) का पता लगाया जाता है, जिसका प्रमुख लक्षण मसूडो का पीलापन, कमजोरी एवं भूख ना लगना होता है।
  5. परजीवी रोगो की पहचान- रक्त मे रहने वाले आंतरिक परजीवियों का पता लगाकर पशुओं केा स्वस्थ रखा जा सकता हैं।
  6. शल्य चिकित्सा के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना- रक्त परीक्षण से शल्य चिकित्सा के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होता है, जिससे यह पता लगा सके शल्य चिकित्सा के जोखिम का पता लगा सके ।
  7. इलेक्ट्रोलाइट संतुलन की जांच-शरीर में इलेक्ट्रोलाइट जैसे सोडियम एवं पोटेशियम के स्तर को मापकर शरीर की पानी की मात्रा या अन्य समस्याओ का पता लगाने मेे मदद करता है।
  8. हार्मोनल असंतुलन की जांच- हार्मोन के स्तर की जांच करके हार्मोनल असंतुलन का पता लगाया जा सकता है।
  9. नियमित परीक्षण- नियमित परीक्षण स्वस्थ जानवरो के लिए महत्वपूर्ण है। ताकि भविष्य के लिए समान्य आधारभूत मान स्थापित किया जा सके विशेष रूप से ज्यादा उम्र वाले पशुओं (वृद्ध पशुओं) में।

लेखक:
डॉ0 जागृति कृषान, डॉ0 रजनी फ्लोरा कुजूर, डॉ0 वंदना भगत, डॉ0 के. आर बघेल एवं डॉ0 प्रीति सिंह
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा दुर्ग
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविद्यालय दुर्ग (छ0ग0)

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Related Articles

Back to top button