समेकित उद्यानिकी कार्य योजना का लाभ उठायें किसान
पौध, अंतरवर्ती फसल, फेंसिंग एवं बोरवेल का समेकित प्रावधान


प्रदेश में पूर्व में राज्य पोषित योजना के तहत संचालित समस्त योजनाओं को समाप्त कर कृषकों के उत्थान के लिए यह योजना लागु की गई है| यह योजना राज्य में उद्यानिकी की समस्त गतिविधियों को समेकित करते हुए फल एवं सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित है, जिसमें राज्य सरकार का शत्-प्रतिशत् योगदान होता है। यह योजना छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त जिलों में कियान्वित की जा रही है|
- योजना का उद्देश्य :-
- राज्य में बहुवर्षीय फल एवं सब्जी क्षेत्र में विस्तार एवं उत्पादन में वृद्धि करना।
- कृषकों के प्रक्षेत्र में रोपित फसलों की पशुओं से सुरक्षा हेतु फेन्सिंग को प्रोत्साहित करना।
- भू-जल का उद्यानिकी फसलों की सिंचाई हेतु समुचित उपयोग।
- फसल विविधिकरण एवं फसल सघनता को बढ़ावा देना।
- योजना का कियान्वयन
- योजना का क्रियान्वयन क्लस्टर आधार पर किया जाएगा, जिसकी इकाई ग्राम पंचायत होगी।
- उप/सहायक संचालक उद्यान द्वारा चयनित ग्राम पंचायतो की सूचना जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत को उपलब्ध कराई जाएगी।
- योजना के तहत् चयनित हितग्राहियों की सूची पर संबंधित ग्राम पंचायत या ग्राम सभा से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
क्लस्टर चयन के समय निम्नांकित बिन्दु ध्यान में रखे जायेंगे :-
- प्रत्येक क्लस्टर का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना चाहिये। जो चयनित ग्राम पंचायतो में ही अवस्थित हो।
- चयनित क्लस्टर की भूमि एवं जलवायु चयनित फसल के लिए उपयुक्त होना चाहिए, जिसका निर्धारण संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विषय विशेषज्ञों / वैज्ञानिकों से समन्वय द्वारा करेंगे।
- हितग्राहियों को फल एवं सब्जी की खेती से संबधित समस्त शस्य कियाओं, तकनीकी सहायता एवं मार्गदर्शन आदि अनिवार्यतः दी जाए।
- योजना अन्तर्गत लिये जाने वाले विभिन्न घटकों का क्रियान्वयन क्लस्टर क्षेत्र में ही होना चाहिये एवं उनका आपस में तालमेल होना अनिवार्य है।
3. हितग्राही की पात्रता एवं क्षेत्र / क्लस्टर चयन का आधार
- सभी वर्ग के भूमिधारी कृषक अथवा कृषक समूह योजना अंतर्गत लाभ लेने पात्र होंगे। कृषक समूह को प्राथमिकता दी जायेगी।
- इस योजनांतर्गत एक कृषक को जीवन पर्यंत एक बार ही लाभान्वित किया जावेगा।
- प्रत्येक हितग्राही / समूह को न्यूनतम 00 हेक्टयर और अधिकतम 2.00 हेक्टयर तक ही योजना से लाभ प्राप्त करने की पात्रता होगी। इस हेतु हितग्राही को निर्धारित प्रपत्र-1 में आवेदन करना होगा।
- ऐसे कृषक / कृषक समूह जिनके पास पूर्व से सिंचाई संसाधन (नलकूप/कूप/खुले जल स्रोत पर स्थित पंप) उपलब्ध होंगे, वे भी योजनांतर्गत लाभ लेने पात्र होंगे किन्तु उन्हे नलकूप खनन पर अनुदान का लाभ नही दिया जायेगा।
- ऐसे कृषक/कृषक समूह, जिनके पास सिंचाई संसाधन नही है तथा वे नलकूप के माध्यम से सुनिश्चित सिंचाई साधन विकसित करना चाहते है, तो इसका कियान्वयन “कृषि विभाग” की “किसान समृद्धि योजना’ के कियान्वयन हेतु जारी दिशा निर्देशों के अध्यधीन होगा। इस स्थिति में नलकूप खनन हेतु चयनित क्षेत्र के 300 मीटर की परिधि में पूर्व निर्मित नलकूप एवं हैंड पंप नही होना चाहिए। क्षेत्र चयन में इन बिंदु का विशेष ध्यान रखा जायेगा तथा इसका शत्-प्रतिशत सत्यापन क्षेत्र के ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी / उद्यान विकास अधिकारी द्वारा किया जायेगा।
- ऐसे कृषक / कृषक समूह जो बिंदु 5 में उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत “नलकूप खनन” हेतु पात्रता नही रखते, वे स्वयं के संसाधन से सिंचाई संसाधन विकसित कर योजना के अन्य लाभ प्राप्त कर सकते है, किंतु स्वयं के स्रोतो से विकसित सिंचाई स्रोत पर अनुदान का लाभ नही दिया जायेगा।
- उपरोक्त माण्दण्डों के अधीन पात्रता रखने वाले कृषक / कृषक समूहों का प्राप्त लक्ष्यों के अधीन तथा “पहले आये पहले पाये” के आधार पर चयन किया जाकर इसका अनुमोदन संबंधित ग्राम पंचायत / ग्रामसभा से लिया जायेगा तथा संबधित क्षेत्र के ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी द्वारा कृषको के आवेदन एवं अभिलेखों के सत्यापन उपरांत आगामी 5 कार्य दिवसों में उद्यान विकास अधिकारी / वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी को प्रस्तुत किया जाएगा। ग्राम पंचायत / ग्रामसभा द्वारा अनुमोदित सूची पर किसी भी स्तर से परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।
- योजना अन्तर्गत घटकों के क्रियान्वयन हेतु इच्छुक एवं निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले हितग्राहियों का चयन ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी द्वारा निर्धारित लक्ष्य से 20 प्रतिशत अधिक की प्रतीक्षा सूची सहित तैयार की जाएगी। इस पूर्ण सूची का ग्राम सभा से अनुमोदन उपरांत उद्यान विकास अधिकारी / वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
- प्रत्येक विकासखंड मुख्यालय स्तर पर एक पंजी संधारित की जायेगी जिसमें चयनित कृषक / कृषक समूहों की वरीयता का निर्धारण कार्यालय में चयन सूची प्राप्त होने के दिनांक के आधार पर निर्धारित किया जायेगा।
- उद्यान अधीक्षक या वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण उपरांत एवं सत्यापन उपरांत प्रकरण स्वीकृति हेतु 10 कार्य दिवसों कार्यालय उप/सहायक संचालक उद्यान को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
- उप/सहायक संचालक उद्यान द्वारा प्रकरणों की स्वीकृति की सूचना जिला पंचायत की कृषि स्थायी समिति तथा विभागाध्यक्ष को देंगें। इसकी प्रति कार्यालय के सूचना पटल पर चस्पा करेगा।
- उप/सहायक संचालक उद्यान अपने जिले के समेकित उद्यानिकी कार्य योजना के क्रियान्वयन क्षेत्रों का 30 अक्टूबर तक कुल हितग्राहियों के रकबे का 25 प्रतिशत स्थल निरीक्षण संबंधित ग्राम के पंच/ सरपंच की उपस्थिति में करेंगे।
- योजना कियान्वयन के दौरान किसी भी समय हितग्राही द्वारा लापरवाही बरतने पर (फल एवं सब्जी फसल का रोपण नहीं करने, फेन्सिंग एवं बोर खनन् तथा पंप प्रतिस्थापन नहीं करने आदि) हितग्राही को आगामी 05 वर्षों तक योजना का लाभ लेने से वंचित किया जा सकेगा।
4. कृषक की जिम्मेदारी :-
- योजना का लाभ लेने के लिये कृषक को स्वयं अथवा विभागीय कर्मचारियों के सहयोग से हार्टिकल्चर बेनेफिसरी ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल https://cghorticulture.gov.in/bts/#/login पर ऑनलाईन आवेदन करना होगा।
- कृषक अनुदान राशि के अतिरिक्त अन्य सामग्री / कार्यों के लिए राशि की व्यवस्था स्वयं से करेगा।
- कृषक को तकनीकी अमले के द्वारा दिये गये मार्गदर्शन एवं तकनीकी सलाह का पालन करना होगा।
- योजना के क्रियान्वयन में कृषक की लापरवाही पाये जाने पर उसे इस योजना से हटाया जा सकेगा एवं उसे अनुदान की पात्रता नहीं रहेगी।
5. योजना के घटक एवं अनुदान :-
(अ) न्यूनतम 1 हेक्टेयर से अधिकतम 2.00 हेक्टेयर तक फसल क्षेत्र विस्तार पर प्रति हेक्टेयर निम्नानुसार अनुदान कृषकों को देय होगा (नलकूप खनन एवं पंप प्रतिष्ठापन पर देय अनुदान को छोड़कर, जिसका विवरण कंडिका 9.10 में पृथक से उल्लेखित है)
(प्रति हेक्टेयर) (राशि लाख में)
| क.
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घटक का नाम
|
इकाई
|
इकाई लागत
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अधिकतम अनुदान राशि | अनुदान प्रतिशत |
| 1.
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फेन्सिग
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हेक्टेयर
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1.08970
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0.54485
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50%
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| 2. | फल पौध रोपण
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हेक्टेयर
|
0.4375
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0.10938
|
25%
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| 3. | फलोद्यानों में अंतरवर्तीय फसल के रूप में सब्जी फसलों का रोपण | हेक्टेयर
|
0.3000
|
0.3000
|
100%
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| योग | 1.8272 | 0.95423 |
फेन्सिंग का लाभ ऐसे कृषकों को प्रदान किया जावेगा, जिन्हें पूर्व में विभाग की सामुदायिक फेन्सिंग योजना से लाभान्वित नहीं किया गया हो।
(ब) नलकूप खनन एवं पंप प्रतिष्ठापन पर वर्गवार अनुदानः-
- नलकूप की गोलाई एवं गहराई का पंचनामा एक समिति जिसके सदस्य वरिष्ठ उद्यान विस्तार अधिकारी/उद्यान विकास अधिकारी, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी, क्षेत्र के सरपंच/पंच होंगे, के द्वारा स्थल पर संयुक्त रूप से जांच कर तैयार किया जावेगा। समिति के सदस्यों द्वारा निर्धारित प्रपत्र में पंचनामा जारी किया जावेगा।
- नलकूप खनन कराते समय यह सुनिश्चित किया जावेगा कि एक नलकूप से दूसरे नलकूप की दूरी कम से कम 300 मीटर हो। 300 मीटर की परिधि में पूर्व निर्मित सिंचाई नलकूप नहीं होना चाहिए अन्यथा इस योजना के तहत अनुदान की पात्रता नहीं होगी।
- सभी नलकूपों में पुर्नभरण संरचना (वाटर हार्वेस्टिंग) का निर्माण कराया जाना अनिवार्य होगा।
- नलकूप सफल (1500 गैलन प्रति घंटा डिस्चार्ज) / असफल होने की स्थिति में कृषक द्वारा दिया गया सफल / असफल होने का प्रमाण-पत्र मान्य होगा। किन्तु गोलाई एवं गहराई के संबंध में उपरोक्त दर्शित पंचनामा समिति द्वारा स्थल निरीक्षण के पश्चात् प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
- विद्युत कनेक्शन एवं नलकूप चालू करने की जिम्मेदारी कृषक की होगी।
- कृषकों को अपनी पंसद का आई.एस.आई मार्का पंप विभाग में पंजीकृत निजी डीलर अथवा सहकारी संस्थाओं अथवा अद्धशासकीय संस्थाओं से कय करने की स्वतंत्रता होगी।
- नलकूप खनन हेतु पंजीयन दिनांक से एक माह की अवधि में (15 जून से 31 दिसंबर की अवधि को छोड़कर) कृषक द्वारा नलकूप खनन कराने पर भौतिक सत्यापन के समय इस अवधि में 300 मीटर की परिधि में यदि दूसरा नलकूप (पंजीयन के पश्चात् खनित) पाये जाने पर कृषक को अनुदान की पात्रता होगी।
- कृषक अपनी इच्छा अनुसार पंजीकृत ठेकेदार से नलकूप खनन करा सकेंगे तथा पंजीकृत ठेकेदारों की सूची जिले के उप संचालक कृषि द्वारा विकसखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधकारी के कार्यालय को उपलब्ध कराई जावेगी।
- सफल कलकूपों पर प्रतिष्ठापित पंप को कृषक पांच वर्ष की अवधि तक किसी को बेच नहीं सकेगा। इसके लिये उससे शपथ पत्र लिया जावेगा।
- किसान समृद्धि योजना के प्रावधानानुसार कृषक वर्गवार अनुदान की पात्रता निम्नानुसार होगी :-
| कृषक वर्ग
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नलकूप खनन पर अनुदान
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सफल नलकूपों पर पंप प्रतिष्ठापन पर अनुदान
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| सामान्य वर्ग
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खनन की वास्तविक (केसिंग पाइप सहित) लागत अथवा रू. 10,000/- जो भी कम हो | पंप एवं सहायक सामग्री की लागत अथवा रू. 15,000/-जो भी कम हो |
| अन्य पिछड़ा वर्ग
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खनन की वास्तविक (केसिंग पाइप सहित) लागत अथवा रू. 15,000/- जो भी कम हो
|
पंप एवं सहायक सामग्री की लागत अथवा रू. 20,000/-जो भी कम हो
|
| अ.जा./अ.ज.जा. | खनन की वास्तविक (केसिंग पाइप सहित) लागत अथवा रू. 18,000/- जो भी कम हो | पंप एवं सहायक सामग्री की लागत अथवा रू. 25,000/-जो भी कम हो |
6. आदानों की व्यवस्था :-
- कृषक / कृषक समूहों के द्वारा योजनान्तर्गत क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के लिये कृषि विश्वविद्यालय/विभाग द्वारा अनुशंसित प्रजाति एवं किस्मों के पौध / बीज की पूर्ति विभागीय रोपणियों / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित महाविद्यालय / कृषि विज्ञान केन्द्र / फसल विशेष / व्यवसायिक खेती हेतु अनुकूल प्रदेशों के कृषि/महात्मा गांधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय/कृषि विज्ञान केन्द्र / अनुसंधान संस्थान से की जावेगी या राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से मान्यता प्राप्त (Accredited) रोपणियों से स्वयं कय कर सकेगा। निर्धारित प्रावधान के अनुरूप योजनान्तर्गत घटकों के लिये लगने वाली अन्य सामग्रियों का कय कृषक अपनी पसंद से खुले बाजार से भी कर सकेंगे। योजना में निहित प्रावधानों के अनुरूप कय की गई सामग्री का देयक सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने पर, भौतिक सत्यापन के उपरांत निधारित समय-सीमा में कृषक को देय अनुदान की राशि संबंधित कृषक के बैंक खाते में शासन द्वारा समय-समय पर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार किया जावेगा।
- कृषक योजनांतर्गत अनुशंसित कृषि आदान यथा रासायनिक उर्वरक / जैव उर्वरक / सूक्ष्म तत्व, विभिन्न श्रेणियों (आधार, प्रमाणित) के बीज रासायनिक / जैव / जैविक कीटनाशक का क्रय उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985, बीज नियंत्रण आदेश 1983, कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं उक्त अधिनियम / नियम में समय-समय पर किए गए संशोधनो के अध्याधीन अनुमत आदान सामग्री (उर्वरक / बीज / कीटनाशन) वैध अनुज्ञप्तिकारी निजी विक्रेता/छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. (मार्कफेड) से क्रय कर अनुदान प्राप्त कर सकेगा।
- यदि कृषक द्वारा सामग्री निर्धारित मूल्य या मात्रा से कम में कय की जाती है तो अनुदान का भुगतान भुगतान सामग्री विशेष हेतु निर्धारित अनुदान प्रतिशत के अनुसार किया जायेगा। यदि क्रय की गई सामग्री का कुल मूल्य योजना में प्रावधानित राशि से अधिक है तो अनुदान का भुगतान निर्धारित अधिकतम राशि की सीमा तक किया जावेगा।
- कृषक को विभिन्न शस्य कियाओं एव अनुरक्षण आदि के लिये स्वयं व्यय करना होगा।
- नलकूप खनन् एवं सफल नलकूपों पर पंप प्रतिष्ठापन का कार्य “कृषक समृद्धि योजना” के क्रियान्वयन हेतु जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जायेगा।
- अनुदान प्राप्त करने हेतु बोरवेल खनन के पश्चात् संबंधित शासकीय विभाग से बोरखनन कार्य का मूल्यांकन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना होगा।
- कृषक आदान सामग्री कय करने में असक्षम हो तो कृषक घोषणा पत्र के साथ आदान सामग्रियों की मांग विभागीय कार्यालय को प्रेषित करेंगे। विभाग द्वारा आदान सामग्रियों की व्यवस्था छ.ग. भण्डार कय नियम 2002 यथा संशोधित का अनुपालन करते हुए की जावेगी। समस्त आदान सामग्रियों का गुणवत्ता परीक्षण शासन के द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप किया जाना आवश्यक होगा।
- तकनीकी अधिकार योजना के कियान्वयन संबंधी समस्त तकनीकी अधिकार उप/सहायक संचालक उद्यान को प्रदत्त रहेंगे।
अधिक जानकारी हेतु निकटतम उद्यानिकी अधिकारी से संपर्क करें|











