कैबिनेट ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दी
100 ज़िलों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में विकास को तेज़ गति मिलेगी


तीन प्रमुख संकेतकों- कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और अल्प ऋण वितरण के आधार पर सौ जिले चिन्हित किये जाएंगे। प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र (वह कुल क्षेत्रफल, जहां किसी कृषि वर्ष में वास्तव में फसलें उगाई जाती हैं) और परिचालन जोत के हिस्से पर आधारित होगी। इस योजना में प्रत्येक राज्य से कम से कम एक जिले का चयन किया जाएगा।
योजना के प्रभावी नियोजन, क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिला धन धान्य समिति द्वारा जिला कृषि एवं संबद्ध गतिविधि योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। समिति में प्रगतिशील किसान भी सदस्य होंगे। जिले की योजनाएं फसल विविधीकरण, जल एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को विस्तार देने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होंगी। प्रत्येक धन धान्य जिले में योजना में प्रगति की निगरानी मासिक आधार पर डैशबोर्ड के माध्यम से 117 प्रमुख कार्य निष्पादन संकेतकों के अनुसार की जाएगी। नीति आयोग भी जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में नियुक्त केंद्रीय नोडल अधिकारी भी नियमित आधार पर योजना की समीक्षा करेंगे।
इन सौ जिलों में लक्षित परिणामों में सुधार के साथ देश के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के मुकाबले समग्र औसत में वृद्धि होगी। योजना के परिणामस्वरूप उत्पादकता में बढ़ोत्तरी होगी, कृषि और संबद्ध क्षेत्र में मूल्यवर्धन (उत्पाद और सेवा में उन्नयन) होगा और स्थानीय आजीविका सृजित होगी। इस प्रकार इस योजना से घरेलू उत्पादन में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) हासिल होगी। इन सौ जिलों के संकेतकों में उत्तरोत्तर सुधार के साथ ही राष्ट्रीय संकेतकों में भी स्वतः ही वृद्धि होगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा धन-धान्य कृषि योजना की मंजूरी के महत्वपूर्ण फैसले पर मीडिया को वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना” को आज कैबिनेट ने मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न में हमारा उत्पादन 40 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ा है फलों, दूध, सब्जियों में भी उत्पादन ऐतिहासिक रूप से बढ़ा है लेकिन फिर भी एक राज्य की उत्पादकता और दूसरे राज्य की उत्पादकता में काफी अन्तर है। राज्यों में भी एक ज़िले की दूसरे ज़िले से उत्पादकता कम है इसलिए जिन ज़िलों में उत्पादकता कम है या एसीसी पर किसान लोन बहुत कम लेते हैं, ऐसे ज़िलों को हम चिन्हित करेंगे। उन ज़िलों में 11 विभागों की योजनाओं को कन्वर्जन (संपरिवर्तन) के माध्यम से पूरी तरह से लागू करने का प्रयत्न करेंगे। उन्होंने कहा कि न केवल केंद्र सरकार की योजनाओं बल्कि राज्य सरकार की योजनाओं को भी कन्वर्जन करके पूरी तरह से लागू करेंगे। इसमें कोई काम करना चाहेगा तो उसे भी जोड़ेंगे और लगभग 100 ज़िलों को इस आधार पर चिन्हित करेंगे। हर राज्य का कम से कम एक ज़िला इसमें ज़रूर होगा। इसकी तैयार शुरू हो गई है। प्रत्येक ज़िले के लिए एक नोडल अफसर होगा। इसी जुलाई के महीने में यह तय कर लिया जायेगा कि कौन से ज़िले व नोडल अफसर इसमें होंगे। अगस्त में प्रशिक्षण शुरू हो जायेगा। इसके लिए जागरूकता भी बढ़ानी पड़ेगी।
श्री चौहान ने कहा कि नीति आयोग को कुछ मापदंडों के आधार पर ज़िलों की प्रगति दिखानी होगी। नीति आयोग मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड बनायेगा। इस अभियान को अक्टूबर के रबी सीजन से शुरू कर देंगे। इस अभियान के लिए एक जिला स्तर की समिति बनेगी। जिसे ग्राम पंचायत या ज़िला क्लेक्टर द्वारा चलाया जायेगा। उनके साथ ही विभागों के अधिकारी, प्रगतिशील किसान आदि की भी टीम बनेगी जो फैसले करेगी। केवल जिले में ही नहीं राज्य में भी टीम बनेगी। राज्य की टीम की जिम्मेदारी होगी कि ज़िले में योजनाओं का सही से कर्न्वजेंस (अभिसरण) हो। केंद्रीय स्तर पर दो टीम बनेंगी, एक केंद्रीय मंत्रियों की और एक सचिव की अध्यक्षता में अन्य विभागों के अधिकारियों की टीम बनेगी। इसमें विविधता के स्तर पर काम करेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हमारी कोशिश यही रहेगी कि जिन ज़िलों में उत्पादकता कम है उनमें केवल नेशनल एवरेज नहीं बल्कि सर्वोच्च उत्पादकता कैसे बढ़े और फसलों के साथ – साथ फल, मछली उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पशु पालन, कृषि वानिकी आदि सभी को भी ध्यान में रखा जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि यह एक बड़ा अभियान है।











