

भारतीय कृषि उत्पादन में उर्वरको का योगदान 80 प्रतिशत है तथा जनसंख्या वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए आगे आने वाले समय मे भी रासायनिक उर्वरको की महत्ता को कम नहीं किया जा सकता है। ऐसे मे यदि किसानों को मिलावटी उर्वरक उपलब्ध कराये जाये तो इससे उत्पादन बढने की उम्मीद कदापि नहीं की जा सकती है। यघपि मिलावट को रोकनें के लिए राज्य सरकार एवं केंद्र सरकारें कृतसंकल्प हैं तथापि कृशि मे उपयोग होने वालें कुछ महत्वपूर्ण उर्वरको जैसे – यूरिया, डी, ए, पी, , म्यूरेट ऑफ पोटाष आदि में मिलावट को नहीं रोका जा सका है। कृशक प्रक्षेत्र पर इन उर्वरको में मिलावट की जॉच के कुछ साधारण सुझाव निम्न प्रकार है।

| क्र,सं, | उर्वरक | मिलावट |
| 1. | यूरिया | साधारण नमक एवं बालू |
| 2. | डी, ए, पी, | सिंगल सुपर फास्फेट , रॉक फास्फेट , एन.पी.के. के मिक्सचर |
| 3. | म्यूरेट ऑफ पोटाष | साधारण नमक एवं बालू |
| 4. | जिंक सल्फेट | बालू एवं मैग्नीशियम सल्फेट |
| 5. | सिंगल सुपर फास्फेट | बालू रॉख एवं जिप्सम की गोलियां |
| 6. | फेरस सल्फेट में | साधारण नमक एवं बालू |
| 7. | सी. ए. एन. | क्ले मृदा , जिप्सम की गोलियां |
कैसे पहचानें
यूरिया

- शुद्ध यूरिया के दाने सफेद , गोल, चमकदार एवं समान आकार के होते है।
- हथेली पर थोडा सा यूरिया लेकर पानी डालें तो हथेली पर कुछ समय के बाद ठंडक महसूस होगी, यदि ऐसा न हो तो मिलावट होगा।
- एक ग्राम यूरिया को गरम करने पर दाने पिघल जाते है तथा कोई अवषेश नहीं बचता, यदि अवशेष बचता है तो यूरिया मे मिलावट है।
- यूरिया गरम तवे पर रखने से पिघल जाता है और कोई अवशेष नहीं बचता ।
- परखनली में एक ग्राम यूरिया ले उसमें 5 मिली. आसुत जल मिलाकर घोलें , फिर 4 से 6 बूंद सिल्वर नाइटरेट का घोल डालें यदि सफेद अवशेष आता है तो उर्वरक में मिलावट समझें।
डी. ए. पी.

- सख्त दानेदार, भूरा-काला बादामी रंग लिए समान आकार के दाने होते है।
- डी, ए, पी, के दानो को चम्मच मे गरम करने पर सभी दाने फूलकर दोगुने आकार के हो जाते है।
- डी, ए, पी, के दानो को पक्के फर्श पर डालकर जूते से रगडे, आसानी से नही फूटेंगे, मिलावट होने पर आसानी से फूट जाते है।
- एक ग्राम नमूने को पीस ले और उसमें चूना मिलाने पर सूघें, उसमें से अमोनिया की गंध आती है। जिससे उसमें उपस्थित नत्रजन का पता चलता है , यदि कोई गंध न आये ंतो मिलावट हो सकती है।
- एक ग्राम पीसे नमूने को लेकर पानी में घोलें । फिर फिल्टर पेपर में छानकर उसमें 1 मिली. सिल्वर नाइटरेट का घोल मिलाए । यदि पीला अवक्षेप आता है तो वह फास्फेट की उपस्थिति बताता है।
म्यूरेट ऑफ पोटाश

- सफेद दाने कणाकार , पिसे नमक जैसा या पिसी लाल मिर्च जैसा मिश्रण होता है।
- ये कण नम करने पर आपस मे चिपकते नहीं।
- पानी में घोलने पर खाद का लाल भाग उपर तैरता है।
- गीलें कपडे पर रगडनें से कोई रंग नहीं छोडता।
- इसके कणो को जलती लौ में डालें , यदि लौ पीली हो जाये तो मिलावट समझें।
- एक चम्मच उर्वरक में 10 मिली. जल मिलायें । उपर से निथरे भाग से 2 मिली. घोल में 4 से 6 बूंदे कोबाल्ट नाइटरेट मिलायें इससें पीला अवक्षेप आता है । मिलावटी उर्वरक में ऐसा नहीं होता ।
जिंक सल्फेट

- सफेद पीलें तथा भूरे बारीक कणों का होता है।
- पानी में घोलने पर सम्पूर्ण घुल जाता है। यदि कोई भाग षेश रह जाता है तो मिलावट समझें।
- खुले मे रखने पर नमी सोखता है।
- जिंक सल्फेट पानी मे घोलने पर यूरिया एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश की तरह ठण्डा नहीं होता है।
- एक चम्मच उर्वरक को 5 मिली. आसुत जल में मिलायें। उसके एक भाग को परखनली में लेकर तनु लगभग 4 प्रतिषत सोडियम हाइडाक्साइड घोल मिलायें । सफेद चिपचिपा अवशेष प्राप्त होता है। इस अवक्षेप में सान्द्र लगभग 40 प्रतिषत सोडियम हाइडाक्साइड घोल मिलाने पर अवक्षेप घुल जायेगा। यदि न घुलें तो मिलावट समझें ।










