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पशुधन उत्पादन में फीड एडेटिव एवं फीड सप्लीमेंटस का महत्व

डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम. के. गेंदले, डॉ. मीनू दूबे, डॉ. रैना दोनेरिया, डॉ. सोनाली पृष्टि

पशुओं एवं मुर्गियों के संतुलित आहार में सारे पोषक तत्व जैसे पानी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज लवण एवं विटामिन के साथ साथ विभिन्न प्रकार के फीड एडेटिव एवं फीड सप्लीमेंटस का निश्चित मात्रा में में होना बहुत जरूरी हैं। जिसकी कमी से पशुओं एवं मुर्गियों के सामान्य विकास, बढोतरी, दूग्ध, अंडें, मांस एवं ऊन उत्पादन की क्षमता प्रभावित हो सकती है यह लेख इसी को ध्यान में रखकर किसान भाईयों के उपयोग के लिये लिखा गया है, जिसका विवरण निम्नानुसार हैः-
फीड एडेटिव एवं फीड सप्लीमेंटस (न्यूट्रस्यूटिक्ल्स) के वर्गीकरण

न्यूट्रस्यूटिक्ल्स को उनके उपयोग के आधार पर अलग – अलग तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है। मुख्य समूह (1) आहार के रेशे (फाइबर), (2) प्रीबोयोटीक्स, (3) प्रीबयोटिक्स, (4) पालीअनसेचूरेटेड फैटी एसिड (5) एंटीओक्सिडेंट, (6) पालीफीनाल्स और (7) मसाले। न्यूट्रस्यूटिक्ल्स के स्वास्थय को बढ़ावा देने के प्रभाव मुख्य रूप से जैव रासायनिक और सेलुलर आदान–प्रदान के माध्यम/मध्यस्थता से होते हैं जो बीमारियों के लिए संवेदनशीलता को रोकता है और पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता या मात्रा को बढ़ावा देता है। न्यूट्रस्यूटिक्ल्स गुण रखने वाले प्रमुख रसायन समूहों में हैं फिनोल्स, फ्ल्वोनोइड्स, एल्कालॉइड, केरोटिनोइइड्स  और प्रोबायोटिक्स, फाइटो स्टीरोल्स, टैनिन, वसा एसिड, टेर्पिनोइड्स,  सैपोनिन, आहार फाइबर आदि होते हैं।

प्रीबायोटिक्स

पाचन प्रणाली के आधार पर पशुओं को दो श्रेणियों अर्थात जुगाली करने वाले (जिन के विशेषता – अग्रांत्र और पश्चांत्र दो माइक्रोबियल निवास की उपस्थिति) और गैर जुगाली करने वाला (विशेषता – सिकम केवल एक माइक्रोबियल वास की उपस्थिति) में बांटा जाता है। इसलिए पशुओं  के लिए प्रीबायोटिक्स में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए।

  • पशु के स्वयं के एंजाइमों द्वारा अपाच्य।
  • लाभकारी आंत माइक्रोफ्लोरा द्वारा चयनित उपयोग।
  • पौधों के स्रोत या माइक्रोबियल एंजाइमों द्वारा उत्पादन किया ।
  • जिसका जीआईटी (GIT) की उपकला सतह से अवशोषण न होता हो।
  • जीआईटी (GIT) से गुजरते हुए संरचनात्मक और कार्यात्मक अखंडता रखता हो।
  • यहाँ तक कि कम से कम कन्सट्रेशन में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकता हो।
  • हानिकारक पेट माइक्रोफ्लोरा के लिए रसायन/बांड दुर्गम हों।
  • पशुधन या उनके उत्पादों में कोई अवशेषों की समस्याएँ न हो।
  • गैर कैंसर कारक।
  • अन्य फीड सामग्री या सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण के साथ मिश्रण करने के इए आसान हो।

प्रोबायोटिक्स

एफएओ/डब्ल्यूएचओ के अनुसार, प्रोबायोटिक्स को ऐसे जीवित सूक्ष्मजीवों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो पर्याप्त मात्रा में देने पर मेजबान पर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। प्रोबायोटिक्स के लाभदायक प्रभाव आंतों के विभिन्न कार्यों के विनियमन जैसे माइक्रोबियल स्थिरता, जठरांत्र बाधा कार्य, बेक्टीरिओसिन के स्राव, इम्यून प्रभाव, प्रोकैंसर एंजाइमों में कमी, रोगजनकों जीवाणुओं के लगने में हस्तक्षेप आदि।

पशुओं में इस्तेमाल होने वाले आम प्रोबायोटिक्स

बैक्टीरियल प्रोबायोटिक्स (1)लैक्टोबैसिलस, (2) एंटीरोकोकस, (3) बेसिलस, (4) लेक्टोबकोकस, (5) बिफिडोबेक्ट्रीय, (6) ल्यूकोनोस्टोक, (7) पेडिओकोकस, (8) प्रोपिओनिबेक्ट्रीरिउम, (9) स्ट्रेप्टोकोकस आदि हैं।

एंटीऑक्सीडेंट क्रिया

प्रतिक्रियाशील ऑक्सीडजन प्रजातियों के प्रभाव को निष्क्रिया करने के लिए प्राकृतिक तंत्र में होते हैं, एंटीऑक्सीडेंट  यौगिकों (विटामिन सी, विटामिन ई, कैरोटिन, यूरिक एसिड आदि) और एंजाइम (केटालेज, सुपर ऑक्साइड दिस्मयूतेज, ग्लूताथिओन परोक्सिडेज/रिडक्टेज)। फ्री रेडिकल्स कण का उत्पादन अधिक होता है) सिंथेटिक एंटीऑक्सीडेंट बनाम प्राकृतिक के बीच प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट अधिक सुरक्षित है और सिंथेटिक एंटीऑक्सीडेंट के विपरीत यह कैंसर पैदा कराने वाले गुण प्रदर्शन नहीं करता। प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है। (1) विटामिन (एस्कार्बिक एसिड, अल्फ़ा टोकोफीरल,  बीटा कैरोटीन), (2) फिनोलिक्स (P – कूमेरिक एसिड, केफेईक एसिड, गेलिक एसिड रोज्मेरिनिक एसिड) (3) के फिनोलिक डाइपींस (कर्नोसिव एसिड, एपिरोस्मानेल) (4) फ्लवोनोइड्स  (केटचिन कैम्प्फीरोल) और (5) सुगंधित तेल (मेंथाल  कार्वक्राल, थाईमोल, एयूजिनोल)।

न्यूट्रास्यूटिकालस और प्रजनन

कम उपजाऊ पुरूष में न्यूट्रास्यूटिकल्स की शुक्राणु उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सिफारिश की जाती है फोलिक एसिड और जिंक सल्फेट कम उपजाऊ – पुरूष को दिलाने पर शुक्राणु एकाग्रता में एक महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। अर्जिनिन, विटामिन बी 12 मिथाइल कोबलमिन और जिन्सिग की तरह कई अन्य न्यूट्रास्यूटिकल्स पुरूष बाँझपन के इलाज के लिए इस्तेमाल किये गया हैं। β कैरोटिन एक महत्वपूर्ण न्यूट्रास्यूटिकल्स माना जाता है जो संभवत:  एक एंटीऑक्सीडेंट  के रूप में कार्य करता है। बैलों में यह साबित हुआ है कि β कैरोटिन की मध्यस्थता से उत्पन्न विटामिन ए की कमी से शुक्राणुजनन में कमी, वृषण क्षय, शुक्राणु रूपात्मक आसमान्याताओं में वृद्धि और बीजदार नलिकाओं के अध्:पतन  का कारण बनती है। इसलिए β कैरोटिन की सामरिक पूरकता से पुरूष की प्रजनन प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं। कार्निटीन ऊर्जा उत्पादन प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण यौगिक है क्योंकि यह माइटोकौन्ड्रिया में फैटी एसिड ऑक्सीजन को विनियमित करता है।

यह माइटोकौन्ड्रिया को एसिटाइल CO-A ला स्तर कम करता है जो ऑक्सीडेटीव पाथ पे के कई मुख्य एंजाइमों में से एक है। अधिवृषण के  माध्यम से शुक्राणु पारित होने के दौरान इसमें कार्निटीन की मात्रा बढ़ जाती है। घोड़े में एल कर्निटीन की आहार पूरकता का शुक्राणु के माइटोकौन्ड्रिया  गतिविधि और शीत संरक्षण के उपरांत गतिशीलता पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह एंटीऑक्सीडेंट क्रिया सहित विभिन्न स्वास्थ्य लाभकारी गुण रखता है चावल तेल गामा ओरेजेनाल का एक अच्छा स्रोत है। PUFA और Y  ओरैजेनाल युक्त वाणिज्यिक चावल तेल की घोड़े के आहार में पूरकता से वीर्य की कुल एंटीऑक्सीडेंट क्षमता, उच्च झिल्ली कार्यक्षमता और शुक्राणु की गतिशीलता में वृद्धि पाई गई।

गायों में, प्रसव के बाद, गर्भाशय में गर्भाशय प्रतिगमन के साथ जुड़ें कई गतिशीलता परिवर्तन होते हैं। प्रोसेटाग्लेंडीन गर्भाशय प्रतिगमन में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। प्रसव अवधि के दौरान लिनोलीईक  एसिड खिलाने से PG2 श्रृंखला के प्रोसेटाग्लेंडीन के जैव संश्लेषण को उत्तेजित कर सकते हैं जिससे गायों की प्रसवोत्तर  गर्भाशय स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं। यह सुझाव दिया है कि जन्मपूर्व गायों में मेगालेक – आर खिलाने से लिनोलीइक एसीड में समृद्ध लिपिड पूल बनाये रखे नमे मदद करता है जो आगे अरेकिडोनिक एसिड की सांद्रता बढ़ाता है जो PGF2α  और अन्य PG2 श्रृंखला के प्रोसेटाग्लेंडीन के संश्लेषण के लिए अग्रदूत होते हैं जो प्रसवोतर अनुकूल गर्भाशय स्वास्थय और इम्यूनो दक्षता को बढ़ाते हैं। गायों में प्रजनन, से पहले 25 दिनों से लेकर 70 प्रसवोत्तर दिनों तक लीनोलीइक एसिड के कैल्सियम लवण  और मोनो ईनोइक ट्रांस c:18  फैटी एसिड की आहार पूरकता से पहले गर्भाधान की दर में सुधार होता है। लीनोलीइक एसिड से समृद्ध कैल्शियम लवण की आहार पूरकता गायों में प्रजनन क्षमता में सुधार करने में लाभदायक पाया गया है।

 

डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. एम. के. गेंदले,
डॉ. मीनू दूबे, डॉ. रैना दोनेरिया, डॉ. सोनाली पृष्टि
पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय,
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविदयालय, दुर्ग (छ.ग.)

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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