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तीन दिवसीय ”सूकर पालन प्रबंधन” प्रशिक्षण संपन्न

पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा, दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविदयालय, अंजोरा, दुर्ग (छ.ग.) में विश्वविदयालय के कुलपति डा. आर.आर.बी सिंह के मुख्य आतिथ्य, डा. लक्ष्मी अजगल्ले अतिरिक्त संचालक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी छ.ग. राज्य पशुधन विकास अभिकरण रायपुर, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा के अधिष्ठाता डा. सुशांत पाल के विशिष्ठ आतिथ्य,, निदेशक फार्म डा. धिरेन्द्र भोंसले की अध्यक्षता, प्रशिक्षण के आयोजक डा. रामचंद्र रामटेके, उपस्थित प्राघ्यापक सहायक प्राध्यापक एवं प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये हूये 44 सूकर पालक किसानों एवं उद्यमियों/ प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति में तीन दिवसीय ”सूकर पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” में प्रशिक्षण जो दिनांक 22 से 24 अक्टूबर, 2024 तक आयोजित किया गया था|

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सूकर पालन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे छत्तीसगढ में सूकर पालन की संभावनायें, छत्तीसगढ की जलवायु के लिये उपयुक्त नस्ले, उनका आवास एवं सामान्य प्रबंधन, भोजन का प्रबंधन, सूकर में आकस्मिक शल्य चिकित्सा एवं प्राथमिक उपचार, सूकरों में होने वाली महत्वपूर्ण बीमारियां, उनका टीकाकरण, रोकथाम, सूकर फार्म में बायो सेक्यूरिटी, छत्तीसगढ एवं भारत सरकार दवारा सूकर पालन व्यवसाय को बढावा देने के लिये चलाई जा रही वाली महत्वपूर्ण योजनाये जैसे एन.एल.एम एवं नाबार्ड पोषित योजनाये, आवेदन प्रक्रिया, बैंक लोन की प्रक्रिया, छत्तीसगढ राज्य सूकर पालन में संभावनायें के बारे में विभिन्न विषय विशेषज्ञों के दवारा सारगर्भित व्याख्यान एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण उपरान्त समापन समारोह में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. वंदना भगत, डा. के. आर.बघेल, डा. ओसमा कलीम, डा. दिप्तिकिरण, डा.आशुतोष तिवारी, डा. शबीर अनंत, डा. दिलीप चौधरी का विशेष योगदान रहा, कार्यक्रम का संचालन डा. केशर परवीन एवं धन्यवाद ग्यापन प्रशिक्षण के आयोजक डा. रामचंद्र रामटेके के द्धारा किया गया । यह प्रशिक्षण सिरीज का 7 वा प्रशिक्षण था जिसमें अब तक लगभग 350 प्रशिक्षणाथिग्यों ने बकरी, सूकर एवं मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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