सफलता की कहानी

धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

धान के साथ आलू, गेहूं और लीची की खेती भी कर रहीं संजीता, नवाचार और मेहनत से बनीं अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विविधीकरण तथा कृषि आधारित सहायक आजीविका गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती संजीता एक्का इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर अपने परिवार के लिए आय के नए अवसर विकसित किए हैं।

सीमित आमदनी से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर
श्रीमती संजीता एक्का अपने पति श्री ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर खेती-किसानी और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। पहले उनका परिवार मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर था। खेती से होने वाली सीमित आमदनी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने आय के वैकल्पिक साधनों की तलाश शुरू की।

संजीता ने पारंपरिक खेती के साथ सबसे पहले मत्स्य पालन को अपनाया। इस गतिविधि से बेहतर लाभ मिलने पर उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने बत्तख पालन तथा सुकर पालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया। आज वे खेती के साथ इन सहायक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, जिससे परिवार की आय के स्रोतों में विविधता आई है और केवल एक फसल पर निर्भरता कम हुई है।

 धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

मत्स्य पालन से मिली नई दिशा, बत्तख और सुकर पालन ने बढ़ाए आय के अवसर
श्रीमती संजीता एक्का बताती हैं कि पहले वे अपने पति के साथ केवल धान की खेती करती थीं, लेकिन इससे अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता था। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें धान की खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने लगा। इस अनुभव ने उन्हें कृषि आधारित अन्य व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मत्स्य पालन के साथ बत्तख और सुकर पालन शुरू करने से उनकी आजीविका को नया आधार मिला है। अलग-अलग गतिविधियों से आय अर्जित करने के अवसर बढ़ने के साथ खेती में होने वाले मौसमी उतार-चढ़ाव पर निर्भरता भी कम हुई है। संजीता का मानना है कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सहायक व्यवसाय भी अपनाने चाहिए।

 धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

धान के बाद आलू और गेहूं की खेती, लीची की बागवानी से भविष्य की तैयारी
संजीता एक्का ने खेती में फसल विविधीकरण को भी विशेष महत्व दिया है। वे बरसात के मौसम में धान की खेती करती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में आलू और गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन करती हैं। इससे कृषि भूमि का अलग-अलग मौसम में बेहतर उपयोग हो रहा है और अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं बढ़ी हैं।

इसके साथ ही उन्होंने अपने खेत में लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है। लीची के पौधे भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आय का साधन बन सकते हैं। वहीं, पौधरोपण से मिट्टी के कटाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

 धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
संजीता का मानना है कि खेती में नए प्रयोग और विविध फसलों को अपनाना किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कृषि, पशुपालन और बागवानी को साथ लेकर चलने से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

सोलर फेंसिंग से खेती की सुरक्षा, आधुनिक तकनीक का भी कर रहीं उपयोग
कृषि गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए संजीता एक्का ने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है। इससे फसलों की सुरक्षा में मदद मिल रही है। खेती में आधुनिक तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वे कृषि कार्यों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।

शासन की विभिन्न योजनाओं और जिला प्रशासन से मिले सहयोग का लाभ उठाकर वे मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और फसल विविधीकरण जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार, अन्य किसानों को भी कर रहीं प्रेरित
श्रीमती संजीता एक्का ने अपनी प्रगति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं से किसानों को खेती के साथ अन्य आजीविका गतिविधियां अपनाने में सहयोग मिल रहा है।
वे अपने अनुभवों के आधार पर गांव के अन्य किसानों को भी धान की खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि किसान यदि अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खेती में बदलाव लाएं, तो आय के नए साधन विकसित कर सकते हैं।

महिला सशक्तीकरण और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रेरक मिसाल
संजीता एक्का की सफलता यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार और विविधीकरण अपनाकर ग्रामीण परिवार आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर न केवल पारंपरिक खेती के स्वरूप में बदलाव किया है, बल्कि मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और बागवानी को जोड़कर आजीविका का एक विविधतापूर्ण मॉडल भी विकसित किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। संजीता एक्का जैसी प्रगतिशील महिला किसानों की पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है।

आज संजीता एक्का की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि नई सोच और मेहनत से अपनी आजीविका को मजबूत बनाने वाली महिला के रूप में हो रही है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि खेती में बदलाव की पहल छोटे स्तर से भी की जा सकती है। दृढ़ संकल्प, मेहनत और योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की खुशहाली के साथ गांव की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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