ऑयल पाम की खेती में अंतरवर्तीय, विविधीकरण, मिश्रित फ़सल से खुली तरक्की की नई राह
श्री तोमन सिंह साहू का अभिनव पहल


धमतरी । खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने ऑयल पाम की खेती को लगातार शासन प्रशासन के द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, मशीनीकरण, नवीन तकनीक खेती , ड्रिप इरीगेशन सिंचाई पद्धति, जैविक खेती, फसल विविधीकरण, मिश्रित फसल, पशु पालन, एकीकृत परंपरागत खेती से आगे बढ़कर अभिनव प्रयोगों, नवोन्मेषी, नवाचार, विषमुक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन, कम लागत, लाभकारी और टिकाऊ खेती, अवशेष प्रबंधन, नवप्रवर्तन, जल संचयन की पारंपरिक सोच को नई दिशा दी है।
धमतरी जिले विकासखंड मगरलोड के ग्राम भरदा निवासी श्री तोमन सिंह साहू ने चालीस साल पहले पारिवारिक खेती में कदम रखा था इससे पहले वह अपनी खेत में पारंपरिक रूप से धान, गेहूं, चना, सरसों, उड़द, तिवरा, मूंग, अलसी, दलहन, तिलहन और सब्जियों आदि जैसी निर्वाह फसलों की खेती करता था, यहां अधिकांश कृषक धान की खेती करते हैं जिससे पानी की खपत ज्यादा होती है, धान में पानी की अधिकता से आने वाले भविष्य में जल संरक्षण उपाय को लेकर जल बचत करने जागरूकता अभियान के तहत कम पानी वाली कम अवधि फसल का चयन किया। इस प्रकार धान की फसल लगा कर इन्हें निरंतर पानी लगाने की चिन्ता रहती थी उससे मुक्ति मिली, साथ ही इसकी आय में वृद्धि हुई, इन सभी कार्य में इनके भाई टॉनिक राम तथा अन्य परिवार के दस बारह सदस्यों को भी रोजगार मिला सभी लोगों को इस योजना के तहत प्रेरणा मिली।

श्री तोमन सिंह साहू विकासखंड स्तरीय गोष्टी, फॉर्म स्कूल पर आयोजित प्रशिक्षण, समूह क्षमता विकास आदि कार्यक्रमों में अपनी व्याख्यान के दौरान उन्नत तकनीकी का प्रचार प्रसार करते हुए मृदा स्वास्थ्य सुधारने, कृषि में विविधता करण तथा मृदा जल को संरक्षित करने हेतु लोगों को सतत प्रेरित एवं प्रोत्साहित करता रहता है।
उन्नत कृषि प्रौद्योगिकीयों विशेष रूप से ऑयल पाम और रागी की खेती के बारे में प्रशिक्षण लेने के बाद फसल की उत्पादकता और फसल विविधिकरण, मिश्रित फसल बढ़ाने मे कृषि, एवं उद्यानिकी खेती अपनाकर आर्थिक स्थिति मजबूत किया बल्कि किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनकर खेती की पारंपरिक सोच को नई दिशा दी है, अवशेष प्रबंधन का उपयोग करते हुए जल संरक्षण, जल बचत के साथ-साथ फसल चक्र परिवर्तन कर धान की खेती को छोड़ कर दीर्घ कालीन ऑयल पाम की खेती को अपनाया है। ऑयल पाम की खेती के जरिए जिले में अपनी पहचान बनाया है।
ऑयल पाम की खेती की जानकारी मगरलोड विकासखंड की वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री के.एस. नरेटी, श्री सूरज कुमार देवांगन, श्री संतोष कुमार बघेल एवं श्री कौशल प्रधान आर.एच.इ.ओ. उद्यानिकी विभाग तथा कृषि विभाग के श्री एफ. एल. पटेल परियोजना अधिकारी ने इस मुनाफे वाली फसल के प्रति प्रोत्साहित किया गया, उपसंचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पूजा कश्यप साहू ने ऑयल पाम लगाने प्रेरित किया। मेरे प्रक्षेत्र का भ्रमण कर कृषि उपसंचालक श्री मोनेश कुमार साहू द्वारा प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया तथा उन्होंने मेरी फसल को देख कर प्रसन्नता जाहिर की ,साथ ही कई बहुत महत्वपूर्ण जानकारी भी दी जिसे प्रयोग में लाकर मैने और अधिक उपज प्राप्त की।
अंतरवर्ती फसल में चना, सरसों की खेती की है वित्तीय लाभों का एहसास होने पर बर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हुई है। जैविक खेती जनता की प्राथमिकता को लेकर लघु धान्य मिलेट्स रागी, कोदो, कुटकी की खेती के साथ सब्जी उगाई जा रही हैं सब्जी की खेती में रासायनिक दवाइयां का इस्तेमाल कम किया, इसके लिए उन्होंने पशुपालन करते उनके गोबर से कम्पोस्ट खाद बनाकर अपने खेत में उपयोग किया, सब्जियों में रसायनो का उपयोग बंद किया गया, गोबर खाद का उपयोग कर फसलों को कीट बीमारियों से सुरक्षित रखते हुए अपनी पुश्तैनी खेती को आगे बढ़ा रहे हैं।
धान, गेहूं, चना, सरसों, अलसी, दलहन, तिलहन, मक्का एवं मोटा अनाजों की खेती रागी, मडवा, कोदो, कुटकी, सावा, हरिकांगी की खेती में सकारात्मक बदलाव से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन रहा है बल्कि भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण, टिकाऊ खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, रागी फसल की खेती विशेष रूप से कम लागत कम पानी में तैयार होने वाली और पोषण से भरपूर छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
महिलाओं ने खेतों में रागी की रोपाई कर आत्मनिर्भरता, रोजगार के अवसर मिलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट खाद का अधिक से अधिक उपयोग कर रासायनिक दवाइयो का इस्तेमाल कम किया जा रहा है, सब्जियों में ऐसे रसायनों का उपयोग हो जिससे स्वास्थ्य को नुकसान ना पहुंचाएं, केंचुए खाद, गोबर खाद, गोमूत्र, लहसुन, नीम, करंज निमास्त्र, आग्नेयास्त्र,ब्रह्मास्त्र, दसपरणी अर्क, हरिखाद बनाकर स्वयं खेत में डालकर देखा इससे आमदनी प्राप्त हुईं, तीन सौ किसानों को इसमें जोड़ा गया है जो रागी की खेती करने प्रेरित हुए, रागी की खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी किसानों को सक्षम बनाएगी।









