कृषि

कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर

 डॉ. सेवक अमृत ढेंगे, डॉ. अरविंद कुमार नंदनवार एवं डॉ. संतोष कुमार साहू

भारत कृषि प्रधान देश हैं, भारत की कुल आबादी का 75  प्रतिशत जनसँख्या ग्रामीण क्षेत्रो में निवास करती हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि एवं कृषि आधारित हैं । कृषि क्षेत्र  ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बनाए रखने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने और पोषण सुरक्षा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

1960 के दशक में, देश के खाद्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी हरित क्रांति योजना बनाई गई थी, जिसके लिए उच्च उपज वाले संकर बीजों, सिंचाई विधियों का विस्तार, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया गया । लेकिन आज कृषि और संबंधित क्षेत्र एक उद्यम और रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र बन गया है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में आधुनिक और सटीक तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है, कृषि और किसान कल्याण की विभिन्न नीतियां और योजनाएं, फसल संरक्षण के लिए फसल बीमा, कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी का सही उपयोग, कृषि और संबद्ध विषयों में विश्व स्तरीय शिक्षा, कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए वैश्विक बाजारों की उपलब्धता, कृषि के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी, किसान उत्पादक कंपनियां आदि जिससे भारत कृषि और संबद्ध क्षेत्र उद्यमिता और रोजगार सृजन के क्षेत्र में विकसित हुआ है।

वर्तमान में, कृषि और संबद्ध विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और स्नातकोत्तर डिग्री के साथ-साथ अल्पकालिक रोजगार-आधारित प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों की ओर रुझान है, क्योंकि इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति भी उपलब्ध हैं, साथ ही शिक्षा पूरी करने के बाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च वेतन वाले सरकारी और निजी स्तर के रोजगार के विभिन्न अवसर भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा, एक स्वतंत्र उद्योग के निर्माण के लिए बहुत गुंजाइश है, और एक प्रसिद्ध उद्यमी बनने के कई अवसर हैं।

किसी भी कृषि महविद्यालयों से कृषि और संबधित विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट डिग्री पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र विभिन्न सरकारी और निजी रोजगार के अवसरों के लिए पात्र हैं। इनमें से कुछ पद प्रत्यक्ष सेवा परीक्षा के तहत भरे जाते हैं, जबकि कुछ मौखिक साक्षात्कार के अंकों के आधार पर भरे जाते हैं। कृषि और संबधित विषयों के छात्र कड़ी मेहनत करके, ज्ञान और कौशल के आधार पर  प्रशासनिक अधिकारी बनने के साथ-साथ एक प्रगतिशील एवं नावलौकिक उद्येमी बनने के अवसर कृषि क्षेत्र में अधिक  हैं।

. सरकारी क्षेत्र अंतर्गत रोजगार के अवसर

  • सरकारी नौकरियां: कृषि अधिकारी, ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, मृदा संरक्षण अधिकारी, वन अधिकारी, सहायक वन संरक्षक, पुलिस उप-निरीक्षक, उप कृषि अधिकारी, कृषि उपनिदेशक आदि।
  • राष्ट्रीयकृत बैंकों में पद : राष्ट्रीयकृत या निजी बैंकों में विभिन्न पद जैसे क्षेत्र अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण विकास अधिकारी आदि।
  • राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न बोर्डों के तहत भरे जाने वाले पद: भारतीय खाद्य निगम, भारतीय जूट निगम, भारतीय राष्ट्रीय बीज निगम, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड, कर्मचारी चयन आयोग, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण, भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद, सामाजिक वानिकी और पर्यावरण पुनर्वास संस्थान, वन्यजीव अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय रेशम बोर्ड आदि से संबंधित वैज्ञानिक, बागवानी निरीक्षक, सब्जी निरीक्षक, खाद्य निरीक्षक, मछली निरीक्षक, बीज अधिकारी, फील्ड अधिकारी, तकनीकी अधिकारी आदि।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पद: वैज्ञानिक, तकनीकी कृषि सलाहकार, कृषि सांख्यिकी आदि। खाद्य और कृषि संगठन, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, अर्ध-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह, आदि में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र इन पदों के लिए पात्र हैं।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर): कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली के द्वारा स्नातकोत्तर स्तर पर विभिन्न विषयों में कृषि अनुसंधान वैज्ञानिक के पद के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित की जाती हैं । स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र इस नौकरी के लिए पात्र हैं। जिन छात्रों द्वारा स्नातकोत्तर और उससे ऊपर के पाठ्यक्रम पूरे कर लिए हैं, वे प्रत्येक जिले में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों में विभिन्न विषयों में विषय विशेषज्ञ के पद के लिए पात्र हैं। साथ ही जिन छात्रों ने अपना स्नातक एवं स्नातकोत्तर और उससे ऊपर का पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, वे परिषद के तहत कार्यरत विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान केंद्रों में रिसर्च एसोसिएट, जूनियर रिसर्च फैलोशिप और सीनियर रिसर्च फैलोशिप के पदों के लिए भी पात्र हैं।
  • राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों में पद: कृषि सहायक, जूनियर रिसर्च एसोसिएट और सीनियर रिसर्च एसोसिएट इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास कृषि में स्नातक की डिग्री, कृषि में मास्टर डिग्री या समकक्ष होना चाहिए। सहायक प्राध्यापक के पद के लिए, योग्यता और अनुभव के आधार पर स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट डिग्री पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र पात्र हैं, साथ ही सह प्राध्यापक, प्राध्यापक, विभाग प्रमुख, अधिष्ठाता, निदेशक विस्तार, निदेशक अनुसंधान, निदेशक शिक्षा एवं कुलपति आदि के लिए एक निश्चित अवधि के बाद अनुभव और अन्य योग्यता के आधार पर चयन किया जाता हैं । कृषि विश्वविद्यालयों के तहत कार्यान्वित प्रत्येक जिले में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र में विभिन्न विषयों में विषय विशेषज्ञ के पद के लिए स्नातकोत्तर और उससे ऊपर के पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र पात्र हैं। जिन छात्रों ने अपना स्नातक, स्नातकोत्तर और उससे ऊपर के पाठ्यक्रम पूरे कर लिए हैं, वे विश्वविद्यालय स्तर पर विभिन्न विभागों के लिए रिसर्च एसोसिएट, जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सीनियर रिसर्च फैलोशिप के पद के लिए भी पात्र हैं। साथ ही अन्य विभिन्न विभागों में परियोजना के तहत अस्थाई एवं संविदात्मक स्तर पर विभिन्न पदों के लिए भी योग्यता प्राप्त उम्मीदवार पात्र हैं।
  • प्रशासनिक सेवा पद: जिन उम्मीदवारों ने कृषि और संबधित विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और उससे ऊपर पाठ्यक्रम पूरा किया है, वे भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय वन सेवा, भारतीय आर्थिक सेवा आदि जैसे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अन्य प्रशासनिक परीक्षा के लिए पात्र हैं।
  • निम्न-सरकारी संस्था: कृषि और संबधित विषयों के साथ-साथ स्नातकोत्तर और उससे ऊपर पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र वैज्ञानिक, अनुसंधान सहयोगी, कृषि अधिकारी, सामाजिक अधिकारी, कनिष्ठ और वरिष्ठ प्रबंधक, कृषि उद्योग सलाहकार, तकनीकी अधिकारी, वरिष्ठ लेखाकार, पशु चिकित्सा अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी आदि के पदों के लिए पात्र हैं।

. निजी क्षेत्र अंतर्गत अवसर

  • कृषि आधारित उद्योग: बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि उपकरण अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कंपनी में  विपणन अधिकारी, कनिष्ठ और वरिष्ठ प्रबंधक, व्यवसाय विकास अधिकारी, बिक्री अधिकारी,  गुणवत्ता मूल्यांकन अधिकारी आदि के पदों के लिए कृषि और संबद्ध विषयों के स्नातक, स्नातकोत्तर और उससे ऊपर पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र के लिए अवसर प्राप्त हैं।
  • खाद्य उद्योग: इस क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उत्पादों का उत्पादन और बिक्री करने वाले निजी उद्यम में उत्पाद विपणन अधिकारी, बिक्री अधिकारी, उत्पाद परिवहन अधिकारी, भंडारण गुणवत्ता मूल्यांकन अधिकारी आदि पद उपलब्ध हैं ।

. स्वतंत्र कृषि उद्यम

जिन छात्रों ने कृषि और संबधित विषयों में स्नातक,स्नातकोत्तर और उससे ऊपर पाठ्यक्रम पूरा किया हैं, वे अपने ज्ञान और कौशल  के आधार पर स्वयं के लिए कृषि और संबधित क्षेत्र जैसे कृषि आधारित उद्यम , पशु एवं दूध आधारित उद्यम, रेशम, मुर्गी पालन, मधु मक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, खरगोश पालन, बटेर पालन, बकरी पालन,जैविक खाद निर्माण, जैविक किटनाशक निर्माण, कृषि उपकरण बिक्री, कृषि उत्पाद विपणन केंद्र, कृषि तकनीकी सलाहकार सेवा केंद्र, भूमि सुधार एवं सौंदर्यीकरण उद्यम, दाल मिल, खाद्यान्न विपणन, सब्जियां, फल, फूल आदि क्षेत्रों में उद्यम के अवसर ढूंढकर उद्यम स्थापित कर सकते हैं।  इनके अलावा  ग्राहक की पसंद के अनुसार कृषि प्रसंस्कृत उत्पादों को तैयार कर आकर्षित पैकिंग में बाजार में बेच सकते हैं। जो इस क्षेत्रों में अवसर ढूंढकर रूचि रखकर एक अच्छा मार्केट  नेटवर्क निर्माण करके स्वयं के ज्ञान और  कौशल के आधार पर एक प्रगतिशील के साथ नावलौकिक उद्येमी बनने के अवसर कृषि क्षेत्र में अधिक  हैं।

 लेखक :
डॉ. सेवक अमृत ढेंगे, डॉ. अरविंद कुमार नंदनवार एवं डॉ. संतोष कुमार साहू
सहायक प्राध्यापक
रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, छुईखदान, जिला केसीजी

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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