पशुपालन

पशुओं में आहार खर्च को कम करने हेतु मूल्यवर्धन में संपूर्ण पशु आहार का महत्व

डॉ. मनोज गेंदले, डॉ. रामचंद्र रामटेके, डॉ. आशुतोष तिवारी एवं डॉ. शबीर अनंत

छत्तीसगढ कृषि में पशुपालन का एक विशेष स्थान हैं । पशुपालन व्यवसाय की सफलता पशुओं के खान-पान पर निर्भर करता है। व्यवसाय में लगभग 60-70 प्रतिशत खर्च पशु पोषाहार में ही होता है। पशुपालक इस खर्च को पशु आहार की उचित व्यवस्था द्वारा कम कर सकता है। आहार में दाना, हरा चारा तथा सूखे चारे (भूसा , कडवी, पैरा आदि) शामिल है। आज की महगाई के समय में पशु हेतु पर्याप्त दाना खरीद पाना आम कृषक के वश में नहीं हैं। इसी तरह हर कृषक अपने पशु को साल भर हरा चारा उपलब्ध नहीं करा पाता । परिणाम स्वरूप मवेशी निम्न कोटि के सूखा चारा पर अपना जीवन निर्वाह करने हेतु विवश होता हैं। इस तरह का चारा निकृष्ट , स्वादहीन एवं सूखा होने के कारण पशु को आवश्यक पोषक तत्व नहीं दे पाते तथा यह पशुओं के स्वाथ्य एवं उत्पादन पर लाभदायक प्रभाव नही बना पाते ।

छत्तीसगढ की प्रमुख फसल धान है जिसके कारण यहा पर धान अवशेष के रूप में पेैरा काफी मात्रा में उपलब्ध होता हैं । जिसे यहा के कृषक सूखे चारे के रूप में पैरा को अपने मवेशी को खिलाते है। पैरा मेें प्रोटीन 1-2 प्रतिशत होता है और मुख्यतः इसमें कार्बोहाइड्रेट के रूप में लिग्नोसेल्यूजोज होता है, जो अपाच्य होता है। इस प्रकार पैरा में प्राटीन कम होता है, पर कार्बोहाइड्रेट पर्यात्त मात्रा में होता हैं। पैरा को सीधे खिलाने से पशुओं की आवश्यकता की पुर्ति नहीं होती है। पशुपोषण के क्षेत्र में हुए अनुसंधान से ज्ञात होता है कि निम्न कोटि के पशु भोज्य पदार्थ को हानिरहित तथा गुणकारी भोज्य पदार्थ में परिवर्तित किया जा सकता है ।

संपूर्ण पशु आहार में आहार के सभी अवयव जैसे चारा, दाना, खनिज लवण, नमक एवं विटामिन मिश्रण सही अनुपात एवं सही मात्रा में मिलाकर एक समान मिश्रण तैयार किया जाता है, इसे खिलाने से पशु की सभी आहार अवयवों के आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है।

संपूर्ण पशु आहार निर्माण हेतु खाद्य सामग्री –

अवयव मात्रा (कि.ग्रा.)
1) पैरा भूसा 60
2) शीरा 10
3) मूगफली खल्ली 14
4) गेहूं का चोकर 13
5) खनिल मिश्रण 2
6) नमक 1
कुल 100

संपूर्ण पशु आहार की निर्माण की विधि-
1. आहार अवयवों को एक जगह एकितित्र कर रखना
2. आहार अवयवों का समिश्ररण
3. आहार अवयवों का समिश्ररण पश्चात पैलेंटंग मशीन की मदद से पैलेट बनाना
4. सम्पूर्ण आहार आधारित पशुआहार -पैलेट

संपूर्ण पशु आहार ब्लाक खिलाने के फायदे –

  • संपूर्ण पशु आहार ब्लाक खिलाने से पशु को हर दिन संतुलित आहार मिलता है। उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
  • संपूर्ण पशु आहार ब्लाक बनाकर पशु को साल भर एक तहर की आहार दिया जा सकता है।
  • संपूर्ण पशु आहार खिलाने से पशु की उत्पादन प्रजनन दोनों ही क्षमता में वृद्धि होती है।
  • संपूर्ण पशु आहार ब्लाक खिलाने से समय और मजदूरी दोनोें की बचत होती है।
  • लागत प्रति ब्लाक (1.5 कि.ग्रा.) = रू 20 से 25/- बेचने में फायदा रू. 2.0 से 4.0/-किलो.
  • औसतन शारीरिक वृद्धि दर में बढ़ोतरी = 25-30 प्रतिशत
  • औसतन दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी = 15-20 प्रतिशत

वर्तमान में भारत सरकार की तरफ से राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजनानंतर्गत दाना एवं चारा विकास उपपरियोजना अंतर्गत उद्यमिता मूलक योजना में संपूर्ण पशु आहार ब्लाक (कंपलीट फीड ब्लाक) इकाई (प्रतिदिन 30 मिट्रिक टन उत्पादन) स्थापित करने हेतू 50 लाख तक के अनुदान का प्रोविजन किया गया है, जिसे स्थापित कर संपूर्ण पशु आहार ब्लाक बनाकर इसे व्यवसाय के रूप में स्थापित कर अपने एरिया में कम लागत में दाने एवं चारे का मूल्यवर्धन कर आसपास के पशु पालको को रेडीमेड संपूर्ण पशु आहार आपूर्ति कर आय पा्रप्त किया जा सकता है।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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