राष्ट्रीयसफलता की कहानी

सुशासन दिवस

सुशासन निर्देशिका के अनुसार उत्तरदायी, समावेशी और दक्ष शासन का मापन

मुख्य बातें

  • सुशासन दिवस (25 दिसंबर) को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य शासन में जवाबदेही, पारदर्शिता एवं नागरिक केंद्रित सार्वजनिक सेवाओं को बढ़ावा देना है।
  • सुशासन निर्देशिका (जीजीआई) एक निदानात्मक उपकरण है जिसे प्रशासन सुधार और लोक शिकायत विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शासन का मूल्यांकन करने के लिए विकसित किया है।
  • सुशासन निर्देशिका शासन में गुणवत्ता का मापन दस क्षेत्रों में कई सूचकों के माध्यम से करती है, जिससे साक्ष्य-आधारित सुधारों एवं राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के बीच तुलना में सहायता मिलती है।

परिचय

सुशासन दिवस प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर मनाया जाता है, जिनके नेतृत्व ने उत्तरदायी, पारदर्शिता, और समावेशी विकास पर बल दिया। यह दिन यह स्मरण करने का भी समय है कि शासन केवल प्रशासन नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने का एक माध्यम है।

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के मूल्यों का सम्मान करते हुए, मिनिस्ट्री ऑफ़ पर्सनेल, पब्लिक ग्रीवांसेज़ एंड पेंशन्स गुड गवर्नेंस इंडेक्स जारी करता है—जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गवर्नेंस के प्रदर्शन का एक असेसमेंट है। यह गवर्नेंस पॉलिसी की भावना को मापता है जो नागरिक-केंद्रित नतीजों में बदलती हैं। हफ़्ते भर चलने वाले इस सेलिब्रेशन में गुड गवर्नेंस का कॉन्सेप्ट ज़िले से लेकर गाँव के लेवल तक फैलाया जाता है। डेटा के अनुसार, भारत ने कई क्षेत्रों में तरक्की की है, जो अलग-अलग नेशनल लेवल की योजनाओं को लागू करने से मिली है।

फोटो: उस समय के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 सितंबर, 2002 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली के 57वें सेशन को संबोधित किया।

 जन नायक: अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी (1924–2018) ने तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया और चार दशकों के अपने शानदार संसदीय करियर में, वे नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। ग्वालियर में एक साधारण परिवार से निकलकर भारत के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले वाजपेयी को राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए 1992 में पद्म विभूषण मिला और 2015 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकतांत्रिक आदर्शों, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का मुखर समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सुशासन और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी, दूरसंचार का विस्तार किया और बुनियादी ढांचे में सुधार किया। उनकी विरासत, शासन के भारत के दृष्टिकोण और पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशलता तथा नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर ध्यान केंद्रित करने में मार्गदर्शन करती है। 1994 में उन्हें “सर्वश्रेष्ठ सांसद” नामित किया गया था, प्रशस्ति पत्र में उनकी प्रशंसा “एक बहुआयामी व्यक्तित्व” के रूप में की गई थी, जिनका काम लगातार राष्ट्रवाद के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता था। इसी विचार पर आगे बढ़ते हुए, भारत सरकार पूरे देश में व्यवस्थित रूप से सुशासन को मापती और बढ़ावा देती है।

यूनाइटेड नेशंस के अनुसार, गुड गवर्नेंस पार्टिसिपेटरी, आम सहमति वाला, अकाउंटेबल, ट्रांसपेरेंट, रिस्पॉन्सिव, इफेक्टिव और एफिशिएंट, इक्विटेबल और इनक्लूसिव होता है, और कानून के राज को फॉलो करता है।

 सुशासन का मापन

सुशासन निर्देशिका

एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स और पब्लिक ग्रीवांस डिपार्टमेंट (DARPG) ने 25 दिसंबर, 2019 को गुड गवर्नेंस इंडेक्स पेश किया। इसका मकसद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गवर्नेंस परफॉर्मेंस को जांचना और सुधार को बढ़ावा देना है। नागरिकों की भलाई, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास और देश के आर्थिक बदलाव के लिए गुड गवर्नेंस बहुत ज़रूरी है। इंडेक्स में 10 खास सेक्टर की पहचान की गई है। इन सेक्टर में गवर्नेंस परफॉर्मेंस को 58 इंडिकेटर्स के आधार पर मापा जाता है, जिन्हें नागरिकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का वर्गीकरण

डी आर पी जी ने सही तुलना के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भूगोल, जनसंख्या और विकास के स्तर में बड़े अंतर को देखते हुए चार समूहों में बांटा है। 2020-21 इंडेक्स के अनुसार, ये इस प्रकार हैं:

ए श्रेणी के राज्य बी श्रेणी के राज्य उत्तर-पूर्वी व पर्वतीय राज्य केंद्र शासित प्रदेश
  • आंध्र प्रदेश
  • गोवा
  • गुजरात
  • हरियाणा
  • कर्नाटक
  • केरल
  • महाराष्ट्र
  • पंजाब
  • तमिलनाडु
  • तेलंगाना
  • बिहार
  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड
  • मध्य प्रदेश
  • ओडिशा
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल
  • अरुणाचल प्रदेश
  • असम
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू-कश्मीर
  • मणिपुर
  • मेघालय
  • मिजोरम
  • नागालैंड
  • सिक्किम
  • त्रिपुरा
  • उत्तराखंड
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  • चंडीगढ़
  • दादरा और नगर हवेली
  • दमन और दीव
  • लक्षद्वीप
  • दिल्ली
  • पुडुचेरी

सुशासन निर्देशिका के अनुसार 2020-21 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य

श्रेणी के राज्य                

Rank State/UT Position
1 गुजरात 1st
2 महाराष्ट्र 2nd
3 गोवा 3rd

बी श्रेणी के राज्य

Rank State/UT Position
1 मध्य प्रदेश 1st
2 राजस्थान 2nd
3 छत्तीसगढ़ 3rd

उत्तरपूर्वी पर्वतीय राज्य    

Rank State/UT Position
1 हिमाचल प्रदेश 1st
2 मिजोरम 2nd

                                                                         केंद्र शासित प्रदेश

Rank UT Position
1 दिल्ली 1st

गुड गवर्नेंस इंडेक्स 2019 के टॉप परफॉर्मर

State/UT
तमिलनाडु
महाराष्ट्र
हिमाचल प्रदेश
पुडुचेरी

 निर्धारित संकेतकों में राष्ट्र स्तरीय प्रगति

सुशासन निर्देशिका शासन के हर क्षेत्र में भारत की प्रगति, पारदर्शीता, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के प्रति लगातार बढ़ती प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। इन क्षेत्रों में पहचाने गए 58 अनुक्रम में से कुछ पर राष्ट्रीय उपलब्धियों पर संक्षिप्त जानकारी यहाँ दी गई है:

  1. कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र

कृषि और संबद्ध क्षेत्र में प्रगति के बारे में जानकारी निम्नलिखित कुछ मुख्य सूचकांकों से मिलती है:

  1. कृषि और संबद्ध क्षेत्र में प्रगति
  2. खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि
  3. बागवानी उत्पादों में वृद्धि
  4. दुग्ध उत्पादन में वृद्धि
  5. मांस उत्पादन में वृद्धि
  6. अंडा/पोल्ट्री उत्पादन में वृद्धि
  7. फसल बीमा
  8. ई-मार्केट में पंजीकृत कृषि मंडियां

  1. वाणिज्य और उद्योग

वाणिज्य और उद्योग क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से पता चलती है:

  1. व्यवसाय करने में सुगमता
  2. उद्योगों का विकास
  3. ऑनलाइन उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन के तहत रजिस्टर्ड एम एस एम ई इकाइयों की संख्या में वृद्धि
  4. जीएसटी के तहत पंजीकृत संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी
  5. नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण

  1. मानव संसाधन का विकास

मानव संसाधन को विकसित करने में हुई प्रगति निमलिखित संकेतकों के पता चलती है:

  1. शिक्षा की गुणवत्ता
  2. बुनियादी शिक्षा के स्तर पर छात्रों की शिक्षा जारी रहना
  3. लैंगिक समानता
  4. अनुसूचित जाती और अनुसूचित जन जाति का पंजीकरण अनुपात
  5. विद्यालयों में पढ़ाने और प्रशासनिक कार्यों के लिए कंप्यूटरों की उपलब्धता
  6. कौशल प्रशिक्षण का क्रियान्वयन
  7. स्वरोजगार सहित प्लेसमेंट में वृद्धि

  1. सार्वजनिक स्वास्थ्य

सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य संकेतकों से पता चलती है:

  1. हेल्थ और वेलनेस केंद्रों का संचालन शुरू होना
  2. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता
  3. मातृ मृत्यु दर (एम एम आर)
  4. शिशु मृत्यु दर (आई एम आर)
  5. टीकाकरण की उपलब्धि
  6. प्रति 1000 की आबादी पर अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या

  1. सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और सेवाएं

सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और संबंधित सेवा क्षेत्रों में प्रगति का पता निम्नलिखित संकेतकों से चलता है:

  1. पीने योग्य पानी तक लोगों की बढ़ती पहुंच
  2. ग्रामीण बस्तियों तक कनेक्टिविटी
  3. खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन तक पहुंच में वृद्धि
  4. आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा की उपलब्धता
  5. प्रति व्यक्ति बिजली खपत में वृद्धि
  6. शहरी क्षेत्रों में वार्डों में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा किया जाता है

  1. आर्थिक शासन

आर्थिक शासन क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से पता चलती है:

  1. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
  2. प्रति व्यक्ति आय के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा
  3. कुल राजस्व प्राप्तियों में राज्य की अपनी कर राजस्व प्राप्तियाँ
  4. प्रति व्यक्ति आय के मुकाबले कर्ज (कुल बकाया देनदारियाँ)

  1. सामाजिक कल्याण और विकास

सामाजिक कल्याण और विकास क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से पता चलती है:

  1. जन्म के समय लिंग अनुपात
  2. स्वास्थ्य बीमा कवरेज
  3. ग्रामीण रोज़गार गारंटी
  4. बेरोज़गारी दर
  5. सभी के लिए आवास
  6. महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
  7. एस सी, एस टी, ओ बी सी और अल्पसंख्यकों का सशक्तिकरण
  8. अदालतों द्वारा एस सी / एस टी पर अत्याचार से जुड़े मामलों का निपटारा
  9. प्रति 100,000 आबादी पर बैंकिंग आउटलेट
  10. आधार से जुड़े राशन कार्ड

  1. न्यायपालिका और जन सुरक्षा

न्यायपालिका और सार्वजनिक सुरक्षा क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से पता चलती है:

  1. दोषसिद्धि दर
  2. पुलिस कर्मियों की उपलब्धता
  3. महिला पुलिस कर्मियों का अनुपात
  4. अदालत में लंबित मामलों का निपटारा
  5. उपभोक्ता अदालतों द्वारा मामलों का निपटारा

  1. पर्यावरण

पर्यावरण क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से पता चलती है:

  1. वन क्षेत्र में बदलाव
  2. कचरा उत्पादन के अनुपात में कचरे का पुनरचक्रीकरण
  3. अवक्रमित भूमि का प्रतिशत
  4. ग्रिड इंटरैक्टिव नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में वृद्धि

  1. नागरिक केंद्रित शासन

नागरिक-केंद्रित शासन क्षेत्र में प्रगति निम्नलिखित मुख्य सूचकांकों से झलकती है:

  1. राज्यों द्वारा सेवा का अधिकार अधिनियम लागू करना
  2. शिकायत निवारण की स्थिति
  3. नागरिकों को प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन सरकारी सेवाएँ

सुशासन पर 2025 में सम्मेलन और सत्र

2025 में, डी ए आर पी जी ने सुशासन और उससे जुड़े विषयों पर अनेक सम्मेलन, वेबिनार और सत्र आयोजित किए गए:

गवर्नेंस पर 22-23 सितंबर, 2025 को विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में 28वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस (NCeG): ‘विकसित भारत: सिविल सर्विस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ थीम पर आधारित इस सम्मेलन में 1,000 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए। डिजिटल गवर्नेंस को आगे बढ़ाने के लिए विशाखापत्तनम घोषणा को अपनाया गया जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है।

10 से 14 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थानडी आर पी जी सम्मेलन: इस सम्मेलन में 66 ब्रेकआउट सत्र और 7 पूर्ण सत्र हुए। इसमें 58 देशों से 750 से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। 710 पेज की एक पुस्तक विकसित भारत@2047 – गवर्नेंस ट्रांसफॉर्म्ड जारी की गई। डी आर पी जी के सचिव वी. श्रीनिवास 62% वोटों से जीतकर भारत के पहले आई आई ए एस अध्यक्ष (2025-2028) बने।

राज्य सहयोग पहल (एस सी आई), 2025: राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के साथ दो राष्ट्रीय पहुँच सत्रों से AI-इनेबल्ड प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सर्विस पोर्टल और रियल-टाइम डैशबोर्ड के लिए 80 से ज़्यादा परियोजना प्रस्ताव मिले। एस सी आई का एक डेडिकेटेड पोर्टल, इस दिशा में आगे की प्रगति और परिणामों की निगरानी करता है।

 निष्कर्ष

सुशासन दिवस 2025 अटल बिहारी वाजपेयी के उत्तरदायी, नागरिक-केंद्रित शासन के दृष्टिकोण का सम्मान करता है। सुशासन निर्देशिका राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 10 क्षेत्रों में शासन प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक मज़बूत बेंचमार्क का काम करती है, जिससे साक्ष्य-आधारित सुधारों को बढ़ावा मिलता है। भारत की प्रगति इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्थित मूल्यांकन और सक्रिय शासन से अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं। भारत जैसे-जैसे 2047 तक विकसित होने की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में नवाचार और समावेशी नीतियों पर आधारित सुशासन को सशक्त करना, समान और टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

Source : https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2208352&reg=3&lang=2

Chhattisgarh Krishi Vaniki

’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ मासिक पत्रिका जो ग्रामीण एवं कृषि विकास पर आधारित है, जिसका प्रकाशन निरंतर रायपुर से किया जा रहा है ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ में तकनीकी आलेख एवं रचनात्मक समाचारों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता है। इस पत्रिका का पाठक विशेष कर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में फैला हुआ है तथा ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी सशक्त माध्यम है। ’’छत्तीसगढ़ कृषि वानिकी’’ एक ऐसी पत्रिका है जो सुदूर अंचलों के किसानों को कृषि, वानिकी, पषुपालन, मत्स्य पालन, वनोऔषधि आदि की नई तकनीकी जानकारी के साथ-साथ राज्य शासन की जनहितकारी नीतियों, निजी क्षेत्र के उद्यमियों के गतिविधियों/कार्यो की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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