राज्य

नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी पर समिति प्रबंधकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

इफको द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

दिनांक 08.01.2025 को  नोडल कार्यालय, जिला बालोद में किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और उर्वरकों के सही उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए इफको द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समिति प्रबंधकों को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के महत्व और लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम में आर.के.एस. राठौर,  राज्य विपणन प्रबंधक  इफको , सी.आर. रावटे, नोडल अधिकारी, बालोद, आशीष चंद्राकर, सहायक संचालक कृषि , बालोद  एस.एन. तम्रकार, सहायक संचालक कृषि बालोद अतिथि के रुप में उपस्थित रहें । कार्यक्रम का संचालन,  दिनेश गाँधी, उप-प्रबंधक प्रक्षेत्र, इफको द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत आर.के.एस. राठौर  द्वारा  की गई एवं  नैनो उर्वरकों के विकास, उनकी वैज्ञानिक पृष्ठभूमि और उनके उपयोग के बढ़ते प्रचलन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी पारंपरिक उर्वरकों का एक किफायती और प्रभावी विकल्प है। उन्होंने नैनो उर्वरक की खरीद पर किसानो हेतू अधिकतम रु. 2 लाख की मुफ्त दुर्घटना बीमा के विषय मे भी विस्तार से बताया। उन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग की तकनीक, मात्रा निर्धारण, एवं समय-समय पर किए जाने वाले छिड़काव की विधि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

सी. आर. रावटे ने समझाया कि नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी का एक बोतल (500 मि.ली.) एक एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त है और इससे पारंपरिक यूरिया तथा डीएपी की आवश्यकता में भारी कमी लाई जा सकती है।

श्री आशीष चंद्राकर एवं श्री एस.एन. ताम्रकार ने फसल के विभिन्न चरणों में नैनो उर्वरकों के उपयोग के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते।
प्रशिक्षण के दौरान खेत में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के छिड़काव का व्यावहारिक जानकारी दिया गया, जिसमें उपस्थित समिति प्रबंधकों ने गहरी रुचि दिखाई। प्रशिक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि नैनो उत्पादों का उपयोग न केवल लागत को कम करता है बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार करता है।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें समिति प्रबंधकों ने अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। उपस्थित अधिकारियों ने सभी सवालों का उत्तर दिया और नैनो उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत योजना तैयार करने की सलाह दी। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें समिति प्रबंधकों ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया। अधिकारियों ने भविष्य में इस प्रकार के और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का आश्वासन दिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद यह अनुशंसा की गई कि जिले में अधिक से अधिक किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जाए और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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