बोनसाई बनाकर आमदनी बढ़ायें व घर सजायें
उत्तम कुमार दिवान, दिपीका रंजन एवं डॉ. हर्षवर्धन पुराणिक


बोनसाई विशाल वृक्ष का छोटा रूप होता है। सामान्य शब्दों में इसे बौना वृक्ष कहा जा सकता हैं, जो मुख्यतः पुष्प प्रदर्शनियों , उद्यान व घरों में देखने को मिलते हैं। बोनसाई महंगे होने के कारण बहुत सारे लोग चाहकर भी अपने घरों में नहीं रख पाते हैं । अतः इसका उपाय यह है कि यदि हम स्वयं बोनसाई तैयार करें तो आमदनी के साथ मनचाहे बोनसाई भी अपने घर पर रख सकते हैं।
बोनसाई का अर्थ दो शब्दों से मिलकर बना है। बोन + साई, बोन = कम गहरा व साई = पौधा। इसका उद्भव चीन को माना जाता है परन्तु इसके पूर्ण विकास का श्रेय जापान को मानते हैं। वृक्षों को बौने रूप में विकसित करने, पेड़ों की कलात्मक कटाई-छंटाई करके उन्हें सुंदर रूप देने की यह अद्भूत कला काफी प्राचीन है. बोनसाई में पौधे को छोटा करके मनचाहा आकार दिया जा सकता है, परंतु उसके फलों का आकार नहीं बदला जा सकता. अतः बोनसाई में छोटे-छोटे उगने वाले फल-फूल के पेड़ ही लगाने चाहिए. बोनसाई उन वृक्ष-पौधों की अधिक आकर्षक बन सकती है, जिनकी पत्तियां छोटी, गूदेदार, मोटी और चमकदार हों।
बोनसाई के बनाने के लिए तीन प्रमुख बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:
बोनसाई तैयार करने के लिए उपयोग में आने वाले पौधेः
पत्ती वाले पौधे: फाइकस, फाइकस बेन्जामिना, गोल्डन फाइकस, जेडट्री ।
फल वाले पौधे: चाइनीज ओरेंज, अनार, इमली ।
इन्डोर बोनसाई के लिए: फाइकस, एरेलिया
बोनसाई के प्रकारः
1. छोटा बोनसाई – आकार 6 इंच से कम ।
2. मध्यम बोनसाई – आकार 6-12 इंच ।
3. बड़ा बोनसाई – आकार 12 इंच से बड़ा ।
बोनसाई तैयार करने के औजारः
सिकेटियर, स्टिक, वायर (कॉपर या एल्यूमिनियम की प्लास्टिक जाली, पॉट )।
बोनसाई ट्री कैसे बनाएं ?
बोनसाई बनाने के दो तरीके हैं, पौधशाला से उपयुक्त वृक्ष-शिशु खरीद लाना, या बीज द्वारा शुरू करना। इनमें से पहला जल्दी परिणाम देगा, पर यदि आप पौधे के विकास को शुरू से ही नियंत्रित करना चाहें, तो बीज से उगाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, पर इसमें बोनसाई बनने में बहुत समय लग सकता है।
पौधों का चयनः
बोनसाई के लिए हमें उन पौधों का चयन करना चाहिए जो अपनी प्रकृति से ही बौने होते हों. बोनसाई के लिए उपयुक्त पहाड़ी पौधे है पाईन, रॉक्सबर्गी ओरोकेरियाजुस, कॉनीफर, यूनीपेरस हॉरीजेन्टालिस आदि. इनकेा इच्छानुसार स्वरूप दिया जा सकता है । छोटी आयु में ही फूलने वाले पौधे, जैसे कि एडेनियम अत्यंन्त उपयुक्त पौधा है. बबूल, बोगेनविलिया, बॉटल ब्रश, गुलमोहर, गुडहल, इकसोरा आदि फूलने वाले पौधे भी बोनसाई के लिए उपयुक्त है. फल देने वाले पौधों-शहतूत, आम, नांरगी, नींबू, इमली आदि के भी बोनसाई बन सकते है ।
चौड़े पत्तों वाले पौधे जैसे बरगद, पाकड़, पीपल इनके तने शीघ्र ही मोटे हो जाते है, जिससे ये कई वर्ष पुराने होने का आभास देते हैं. किसी अच्छी नर्सरी से पौधे लेकर उनकों आप अपनी इच्छानुसार कोई भी आकार दे सकते है ।
पात्रः
अच्छे बोनसाई के लिए उपयुक्त पात्र का होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पौधे के चयन का. मोटी दीवार वाले वर्गाकार व चौकोर पात्र सीधी पद्धति के लिए उपयुक्त हैं । एक ओर झुके पौधे के लिए गहरे पात्र ठीक होते है । अंडाकार पात्र घुमावदार व नरम तनों वाले पौधे के लिए एवं अर्धलटके बोनसाई के लिए कुछ छिछले पात्र ही उचित रहते है, पात्रों की लंबाई पौधों की ऊंचाइ्र के दो तिहाई हिसाब से होनी चाहिए।
बोनसाई के लिए गमलों का चयन
बोनसाई के लिए छिछले गमले इस्तेमाल किए जाते हैं. मानक बोनसाई पात्र की ऊंचाई 25 सेंटीमीटर से भी कम होती?है और इस का आयतन 2 से 10 लीटर तक होता?है. ये गमले कई प्रकार के होते?हैं जैसे कि अंडाकार, गोलाकार, वर्गाकार या चौकोर. छिछले गमलों में पानी के निकास के लिए 2 छेद होने चाहिए. इस के अलावा गमले के किनारे पर 4 और छोटेछोटे छेद करने चाहिए, इन चारों छेदों में से तांबे के तार डालिए, जो कि आधे गमले के ऊपर हों और आधे गमले के नीचे निकले हों । ऐसा करने पर जब जड़ों की कटाई-छंटाई की जाती है, तब गमले से पौधे को निकालने में सुविधा होती है और जड़ों की छंटाई के बाद पौधे को गमले से बांधने में सुविधा होती?है. मगर जब बोनसाई झुकी या अर्ध झुकी पद्धति के बनाने हों तो गहरे गमलों का चुनाव करें, क्योंकि पौधे के झुकाव के कारण छिछला गमला पलट जाएगा ।
बोनसाई के लिए ऐसे तैयार करें पौधे:
बोनसाई के लिए वानस्पतिक तरीके द्वारा पौधे तैयार किए जाते हैं, क्योंकि ऐसे पौधे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता. बीजों द्वारा भी पौधे तैयार किए जाते?हैं, पर इस में ज्यादा वक्त लगता है ।
रोपाई का समय: पौधों की ज्यादातर प्रजातियों की रोपाई जुलाई अगस्त महीनों के दौरान की जाती है ।
कटाई-छंटाई: बोनसाई बनाने के लिए कटाई-छंटाई बहुत जरूरी है. सुंदर व आकर्षक बोनसाई कटाई-छंटाई के द्वारा ही बनाए जाते हैं ।
काट-छांट करते समय जितनी जरूरी हों, उतनी टहनियों को रखें बाकी सभी टहनियों को काट दें। इस बात का भी ध्यान रखें कि जब पीपल, बरगद जैसे बड़े पेड़ों का बोनसाई बनाना हो तो जड़ के पास से निकलने वाली सभी शाखाओं को काट दें । जब बहुतना बोनसाई बनाना हो तो जड़ के पास से निकलने वाली शाखाओं में से जितनी जरूरी हों उस से 2-4 शाखाएं ज्यादा रख लें, जिस से कि यदि कोई शाखा खराब हो जाए तो बची शाखाओं से बहुतना आकार दिया जा सके।
दोबारा रोपाई: बोनसाई पेड़ की हालत व उम्र के मुताबिक नियमित अंतराल पर गमला या पात्र बदलना चाहिए. आमतौर पर नर्सरी में विकसित पौधे को वहां से निकाल कर बोनसाई पात्र में रोपा जाता?है. अगर गमले या बोनसाई पात्र की मिट्टी के ऊपर जड़ फैलने लगे या पात्र के नीचे का सुराख, जड़ों के ज्यादा निकल जाने से बंद होने लगे, तो ऐसी हालत में गमला या पात्र बदल देना चाहिए ।
देख-रेख: पौधों को अधिक समय तक कमरे में न रखें. गमलें या पात्रों से पानी के निकास का उचित यप से निरीक्षण करते रहें. पौधों में कीट लगने पर कीटनाशक दवा का छिड़काव करें. बोनर्साई के गमलों को कम से कम चार घंटे सूर्य की रोश्नी में रखना आवश्यक है । गर्मी में ऐसे स्थान पर रखे जहां लगातार कई घंटे और विशेषकर तीसरे पहर की धूप बोनर्साई पौधों पर न पड़े. इतना परिश्रम करने के पश्चात आप देखेंगे की आपका बोनसाई वृक्ष आपके मनचाहे आकार में सुंदर व मनमोहक दिखेगा ।
सर्दी के दिनों में बोनसाई की देखरेख: सर्दी के दिनों में बोनसाई की देखरेख पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि बोनसाई छिछले पात्रों में लगाया जाता?है और बड़े पेड़ों की तरह इस की जड़ें जमीन के नीचे दबी नहीं होतीं. जब वातावरण में तापामन बहुत कम हो, तो बोनसाई को अंदर कमरों में रखना चाहिए. अगर अंदर रखना मुमकिन न हो तो, पहले उसे कागज या कपड़े से ढकें फिर ऊपर से पालीथीन से ढक दें. जब तापमान बढ़े तो पॉलीथीन को हटा दें ।
गरमी के दिनों में बोनसाई की देखरेख: गरमी के दिनों में जब दिन का तापमान बहुत ज्यादा हो, तो बोनसाई को केवल सुबह और शाम की धूप लगने दें और दोपहर के सम उसे छाया में रखें । इन दिनों पानी की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए पौधों में पानी की कमी न होने दें ।
बोनसाई के फायदे:
- बोनसाई रोजगार का एक अच्छा साधन भी है इसकी देखभाल गृहणियों द्वारा भी अच्छी तरह से की जा सकती है। बोनसाई बेहद सुंदर व आकर्षक होता है. यह घर की शोभा बढ़ाता है।
- जगह की कमी के कारण जो पेड़ घर में लगाना मुमकिन नहीं ह®ता, उन्हे भी बोनसाई के रुप में हम अपनेघरों में लगा सकते हैं।
- तमाम फसलें खराब मौसम के कारण कई बार खराब हो जाती हैं और किसानों को नुकसान हो जाता है, लेकिन बोनसाई को खराब मौसम से बचाया जा सकता है ।
- फल, फूल और सब्जियों के खराब हो जाने के कारण कई बार किसानों को सही मूल्य नहीं मिल पाता और खराब हो जाने के डर से किसान उन्हें कम कीमत पर बेच दिया करते हैं, किंतु बोनसाई की सही देखभाल साल दर साल उस की कीमत को बढ़ाती है ।
- बागबानी तनाव को दूर रखने में मदद करती है, किंतु शहरों में बागबानी मुमकिन नहीं हो पाती, ऐसे में बोनसाई एक अच्छा विकल्प है ।
- बुजुर्ग लोग जिन का समय नहीं कटता, वे बोनसाई लगा कर अपने आप को व्यस्त रख सकते हैं ।
- जिन किसानों के पास खेती के कम रकबे हैं, उन लोगों के लिए बोनसाई एक अच्छा जरीया है ।
- अगर घर में बोनसाई लगाया जाएगा, तो घर के बच्चे भी पेड़ों के महत्त्व को समझेंगे और उन के रखरखाव को बेहद आसानी से सीख जाएंगे ।
बोनसाई बनाने के दौरान ध्यान रखनें योग्य बातें
- पौधों को पात्र में सही तरह से लगाना चाहिए ।
- पौधेलगाते समय जड़ों के बीच में हवा न रहे, लिहाजा तने के आस-पास की मिट्टी को अच्छी तरह से दबा देना चाहिए ।
- बोनसाई को खुली हवा में रखें और इस बात का ध्यान रखें कि धूप चारों ओर से लगे ।
- बोनसाई को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लिहाजा उसे रोजाना पानी दें और तब तक दें, जब तक कि पानी पात्र के उपर से बहने न लगे ।
- बोनसाई को वैसा ही आकार व प्रकार दें, जैसा कि वह कुदरती रूप से होता है ।
- तांबे के तारों को कस कर न बांधें वरना पौधों पर तारों के निशान पड़ जाएंगे ।










