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पाला, कृषि में उससे होने वाली हानियां एवं पाला से फसलों को बचाने के  उपाय

पांडुरंग बोबड़े,प्रीति बोबड़े

पाला क्या हैं

सर्दी के मौसम में दिसम्बर-जनवरी के महीनों में ठंडी हवा या शीतलहर चलती हैं और रात का तापक्रम लगातार कुछ दिनों तक कम होता जाता है या जब न्यूनतम तापक्रम लगातार 3सेल्शियस या इससे कम (0सेल्शियस) हो जाता और वाष्प कण बदलकर हल्के सफेद बर्फ की परत के रूप में भूमि की उपरी सतह या घास के ऊपर जम जाते है तो इस अवस्था को पाला कहते है । पाला गिरने से फसलो के अन्दर उपस्थित पानी जम जाता है, जिससे कोशिकाभित्ति फट जाती है और तरल पद्दार्थ बाहर की तरफ आ जाता है और पौधे मुरझा जाते है इसे ही फसलो पर पाला गिरना कहते है । पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलसे हुए दिखाई देते है । एवं बाद में झड़ जाते हैं । यहां तक कि अधपके फल सिकुड़ जाते है । उनमें झुर्रियां पड़ जाती हैं एवं कलिया गिर जाते है । फलियों एवं बालियों में दाने नहीं बनते हैं एवं बन रहे दाने सिकुड़ जाते है । दाने कम भार के एवं पतले हो जाते है रबी फसलों में फूल आने एवं बालियां/फलियां आने व उनके विकसित होते समय पाला पडऩे की सर्वाधिक संभावनाएं रहती है । अत: इस समय कृषकों को सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिये । पाले का पौधों पर प्रभाव शीतकाल में अधिक होता है ।

कब गिरता है पाला

जब तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर जाता है तथा हवा रूक जाती है, तो रात्रि को पाला पडऩे की संभावना रहती है । वैसे साधारणत: पाला गिरने का अनुमान वहां के  वातावरण से लगाया जा सकता है । सर्दी के दिनों में जिस रोज दोपहर से पहले ठंडी हवा चलती रहे एवं हवा का तापमान जमाव बिन्दु से नीचे गिर जाये । दोपहर बाद अचानक हवा चलना बन्द हो जाये तथा आसमान साफ रहे, या उस दिन आधी रात से ही हवा रूक जाये, तो पाला पडऩे की संभावना अधिक रहती है । रात को विशेषकर तीसरे एवं चौथे प्रहर में पाला पडऩे की संभावना रहती है । साधारणतया तापमान चाहे कितना ही नीचे चला जाये, यदि शीत लहर हवा के रूप में चलती रहे तो कोई नुकसान नहीं होता है । परन्तु यही इसी बीच हवा चलना रूक जाये तथा आसमान साफ हो तो पाला पड़ता है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक है ।

 शीत लहर एवं पाले से फसल की सुरक्षा के उपाय

फसलों को पाले की हानि से बचाने के लिए खेतों में पानी लगा देना चाहिए । खेतों में पानी लगा देने से भूमि के निकट की वायु का ताप हिमांक बिन्दु से अधिक ही रहता है जिसके फलस्वरूप पाले के स्थान पर ओस पड़ती है ।

  • खेतों की सिंचाई जरूरी :जब भी पाला पडऩे की सम्भावना हो या मौसम पूर्वानुमान विभाग से पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई दे देनी चाहिए । जिससे तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है सिंचाई करने से 5 – 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान मे बढ़ोतरी हो जाती हैं ।
  • पौधे को ढकें :पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है । नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढकने की सलाह दी जाती है । ऐसा करने से प्लास्टिक के अन्दर का तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। जिससे सतह का तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंच पाता और पौधे पाले से बच जाते हैं। पॉलीथीन की जगह पर पुआल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पौधों को ढकते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पौधों का दक्षिण पूर्वी भाग खुला रहे, ताकि पौधों को सुबह व दोपहर को धूप मिलती रहे । पुआल, घास तथा पॉलीथिन का पलवार (Mulch) के रूप में प्रयोग करना चाहिए जिससे खेत की नमी सुरक्षित रहे तथा खेत का ताप हिमांक बिन्दु से ऊँचा बना रहे ।
  • खेत के पास धुंआ करें : किसान भाई अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए अपने खेत की मेड़ो पर धुंआ करे, जिससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है ।
  • रासायनिक उपचार :जिस दिन पाला पडऩे की सम्भवना हों उन दिनों फसलों पर घुलनशील सल्फर ०.४ प्रतिशत एवं घुलनशील बोरान ०.२ प्रतिशत मिश्रण का ५०० लीटर पानी में घोल बनाकर फसलो पर छिडकाव करे । प्रति पम्प घुलनशील सल्फर ४० ग्राम एवं घुलनशील बोरान २०-२५ ग्राम का घोल बनाकर कम से कम छ: टंकी का प्रयोग करे । डाइमिथाइल सल्फोआक्साइड ७८ मि.ली./१००० ली./हेक्टेयर भी पीले से बचा सकता है ।
  • दीर्घकालिन उपाय: फसलों को बचाने के लिये खेत की उत्तरी-पश्चिमी मेड़ों पर तथा बीच-बीच में उचित स्थानों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी अरडू एवं जामुन आदि लगा दिये जाये तो पाले और ठण्डी हवा के झोंको से फसल का बचाव किया जा सकता हैं । फसलों में ऐसी जातियाँ उगानी चाहिए, जो पाले को सहन कर सकें ।

पांडुरंग बोबड़े,
प्रीति बोबड़े
राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र,अजिरमा,अंबिकापुर (छ.ग.)
इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय

Chhattisgarh Krishi Vaniki

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